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लेखराज और प्रिंस कॉम्प्लेक्स हादसों से भी नहीं लिया सबक, लखनऊ के 2000 कोचिंग संस्थान आज भी आग के मुहाने पर

Updated: Tue, 23 Jun 2026 10:14 AM (IST)

लखनऊ में अधिकांश कोचिंग सेंटर आग के मुहाने पर हैं, जहां सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है।

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संक्षेप में पढ़ें

जागरण संवाददाता, लखनऊ। बीती 28 अप्रैल 2022 को इंदिरानगर में लेखराज खजाना कांप्लेक्स के तीसरे तल पर सिक्योरिटी कंपनी के गोदाम में लगी आग पड़ोस में स्थित कोचिंग सेंटर तक पहुंच गई। कड़ी मशक्कत के बाद फायर विभाग के जवानों ने फंसे हुए विद्यार्थियों को सुरक्षित बाहर निकाला था।

इसी तरह तीन नवंबर 2022 को ही हजरतगंज में प्रिंस कांप्लेक्स के चौथे तल पर एक दुकान में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई। देखते-देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। आग बगल की कोचिंग के साथ चौथे तल तक पहुंच गई थी।

इन हादसों के बाद भी आज तक एलडीए और फायर विभाग सहित संबंधित विभाग नहीं चेत सके हैं। आज भी लखनऊ में चल रही करीब दो हजार कोचिंग आग के मुहाने पर हैं। इन कोचिंग सेंटरों में फायर सुरक्षा से जुड़े उपाय ही नहीं किये गए हैं।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों के लिए प्रदेश भर से बच्चे लखनऊ पहुंचते हैं। लखनऊ के हजरतगंज व कपूरथला में बच्चे डाक्टर, इंजीनियर, प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना लेकर कोचिंग पढ़ने आते हैं। कोचिंग सेंटरों में फायर सेफ्टी के नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

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बेसमेंट में जाने के अंधेरे भरे रास्तों, सीलन, बाहर निकलने के लिए सीमित जगह जैसी दिक्कतों के अलावा आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम भी यहां नहीं हैं।

पिछले साल दिल्ली में एक कोचिंग में पानी भरने के बाद हुए दर्दनाक हादसे को देखते हुए एलडीए ने भी कुछ कार्रवाई की थी। हजरतगंज स्थित दो कोचिंग सेंटर और एक लाइब्रेरी को भी सील कर दिया गया था। यह कोचिंग मानक विपरीत बने बेसमेंट में संचालित हो रहे थे।

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यह हैं हालात

लीला मेंशन बिल्डिंग की बेसमेंट में लाइब्रेरी चलती है। बगल से एक सकरी सीढ़ी ऊपर की ओर जाती है। इसी सीढ़ी से प्रवेश और निकासी की व्यवस्था है। प्रथम और द्वितीय तल पर कोचिंग चलती हैं।

यहां तार भी बहुत जर्जर हैं। प्रताप भवन में भी आठ कोचिंग चलती हैं। इसमें भी प्रवेश और निकासी का एक ही रास्ता है, जो कि इतना सकरा है जिसमें फायर ब्रिगेड की टीम घूम भी नहीं सकती है।

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यह होनी चाहिए कोचिंग सेंटर में व्यवस्था

  • शैक्षणिक संस्थान भवन का ग्राउंड एरिया 65 प्रतिशत खाली होना चाहिए
  • फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) 150 होना चाहिए। आशय यह है कि ऊंचाई अधिक न हो
  • फायर निकासी और पलायन मार्ग स्पष्टता और रुकावट रहित होना चाहिए
  • प्रवेश और निकासी के लिए वैकल्पिक रास्ता होना चाहिए
  • आकस्मिक स्थिति में अंधेरा न रहे, इसके लिए लाइट की व्यवस्था हो
  • बेसमेंट में रैंप की भी व्यवस्था होना चाहिए

भवन की सुरक्षा के लिए यह है जरूरी

  • अग्निशमक यंत्र
  • डाउन कमर सिस्टम
  • यार्ड हाइडेंट सिस्टम
  • आटोमेटिक स्प्रिंकलर्स सिस्टम
  • आटोमेटिक डिटेक्शन एवं अलार्म सिस्टम
  • मैनुअली चलने वाले इलेक्ट फायर अलार्म सिस्टम
  • अंडरग्राउंड वाटर टैंक
  • ओवरहेड वाटर टैंक

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