लखनऊ यूनिवर्सिटी में नीले रंग की होगी साइंस और इंजीनियरिंग संकाय की थीसिस, कार्य परिषद की बैठक में मिली मंजूरी
लखनऊ विश्वविद्यालय की कार्य परिषद ने पीएचडी थीसिस के लिए रंग कोडिंग और नियमित से अंशकालिक पीएचडी में परिवर्तन हेतु एसओपी सहित कई प्रस्तावों को मंजूरी दी।

नीले रंग की होगी विज्ञान और इंजीनियरिंग संकाय की थीसिस।
HighLights
पीएचडी थीसिस के लिए संकायवार रंग कोडिंग निर्धारित की गई।
कॉलेज शिक्षकों को अब पीएचडी शोध पर्यवेक्षण का अधिकार मिला।
संविदा कर्मियों के मानदेय में महत्वपूर्ण वृद्धि को मंजूरी दी गई।
जागरण संवाददाता, लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की बैठक गुरुवार को कुलपति प्रो. जय प्रकाश सैनी की अध्यक्षता में हुई। बैठक में शैक्षणिक प्रगति, शोध नीति, वित्तीय निर्णयों, आधारभूत ढांचे तथा छात्रहित से जुड़े कई प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई।
कार्य परिषद ने शोध की गुणवत्ता के लिए दो बड़े सुधारों को मंजूरी दी। इसके अंतर्गत पीएचडी थीसिस की फार्मेट व कलर कोडिंग निर्धारित की गई है। प्रबंधन, वाणिज्य, शिक्षा, विज्ञान और इंजीनियरिंग संकाय की थीसिस नीले रंग की होगी। कला, ललित कला, विधि और अभिनवगुप्त संस्थान के लिए मैरून रंग निर्धारित किया गया है।
वहीं कृषि, योग व वैकल्पिक चिकित्सा, आयुर्वेद और यूनानी संकाय के लिए हरा रंग तय किया गया है। बैठक में नियमित से अंशकालिक पीएचडी में परिवर्तन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की गई है, जिसमें विभागाध्यक्ष को साक्ष्य सहित औपचारिक आवेदन, डीआरसी द्वारा मूल्यांकन व संस्तुति, कुलपति का अनुमोदन और संबंधित शैक्षणिक सत्र का शुल्क जमा करना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा कालेज शिक्षकों को सुपरविजन का अधिकार भी दिया गया है। शशि भूषण बालिका महाविद्यालय और कृष्णा देवी गर्ल्स डिग्री कालेज सहित राजकीय डिग्री कालेजों के शिक्षकों को अब पीएचडी विद्यार्थियों के शोध निर्देशन का अधिकार दिया गया है।
वहीं शासकीय और सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के संबद्ध डिग्री कालेजों के शिक्षकों को भी पार्टटाइम पीएचडी सुपरविजन का अधिकार होगा। लुआक्टा के अनुरोध पर संबद्ध कालेज शिक्षकों के पाल्यों के लिए यूजी और पीजी की भांति पीएचडी में पांच प्रतिशत आरक्षण के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई।
विश्वविद्यालय परिसर में नवनिर्मित स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स का नामकरण पूर्व कुलपति स्वर्गीय प्रो. डीपी सिंह के नाम पर करने का निर्णय लिया गया। साथ ही समाजशास्त्र, मनोविज्ञान और अंग्रेजी विभागों के नवनियुक्त शिक्षकों को स्थायीकरण को भी स्वीकृति दी गई। कुलसचिव डॉ. भावना मिश्रा मौजूद रहीं।
17 नए स्ववित्त पोषित शिक्षक पदों का सृजन
विधि विभाग में स्ववित्तपोषित पांच वर्षीय एलएलबी पाठ्यक्रम के लिए 17 नए स्ववित्त पोषित शिक्षक पदों के सृजन को वित्तीय संस्तुति प्रदान की गई। इसके अलावा मोहम्मदी ला कालेज (लखीमपुर) को पांच वर्षीय विधि पाठ्यक्रम की पांच वर्षों के लिए अस्थायी सहयुक्तता दी गई।
विषय विशेषज्ञ का मानदेय 1500 रुपये निर्धारित
परिषद ने 29 सितंबर को हुई वित्त समिति के निर्णयों का अनुमोदन भी किया। स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में विषय विशेषज्ञ का मानदेय यूजीसी के नियमों और आय-व्यय के आधार पर 1500 निर्धारित किया गया। वहीं, आउटसोर्सिंग कर्मियों के वेतन को ध्यान में रखते हुए विभिन्न पाठ्यक्रमों के संविदा कर्मियों के मानदेय ढांचे को सुव्यवस्थित किया गया।
इसके तहत तृतीय श्रेणी कर्मियों का वेतन जो पूर्व में 14,000 रुपये था, उसे बढ़ाकर न्यूनतम 21,700 और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों का वेतन जो पूर्व में 11,650 था, उसे बढ़ाकर 18,000 करने का अनुमोदन दिया गया। इससे करीब 94 कर्मचारियों को सीधा लाभ होगा, जिनका वेतन एक दशक से अधिक समय से नहीं बढ़ा था।
