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लखनऊ: 8000 रुपये में खून बेचकर शौक पूरे कर रहे थे इंजीनियर के छात्र, 5 गिरफ्तार

Published: Mon, 26 Oct 2026 07:30 AM (IST)

लखनऊ के एसजीपीजीआई में मरीजों के तीमारदारों को खून बेचने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है, जिसमें तीन इंजीनियरिंग छात्रों सहित पांच युवक गिरफ्तार किए गए हैं।

पकड़े गए इंजीनियरिंग छात्रों को ले जाती पुलिस

पकड़े गए इंजीनियरिंग छात्रों को ले जाती पुलिस

HighLights

  1. एसजीपीजीआई में खून बेचने के आरोप में पांच युवक गिरफ्तार

  2. गिरोह में तीन इंजीनियरिंग छात्र भी शामिल थे

  3. एक यूनिट खून 8,000 रुपये तक में बेचा जाता था

जागरण संवाददाता, लखनऊ। मरीजों को खून की जरूरत और तीमारदारों की मजबूरी कुछ युवाओं के लिए कमाई का जरिया बन गई है। एसजीपीजीआई में भर्ती मरीज के तीमारदार से पैसे लेकर रक्त बेचने के मामले में पकड़े गए पांच युवकों को लेकर प्रारंभिक जांच में चौंकाने वाली बातें सामने आई है।

ये युवक रक्तदान की आड़ में खून का सौदा करते थे। खून के बदले रकम लेकर अपने शौक पूरे करते हैं। एक यूनिट रक्त के बदले आठ हजार रुपये तक लेते हैं। पकड़े गए युवकों में तीन इंजीनियरिंग छात्र हैं, जबकि एक नौकरी पेशा है। घटना की जांच एसजीपीजीआई थाने की पुलिस कर रही है।

प्रारंभिक जांच में रायबरेली के खीरों थाना क्षेत्र निवासी हिमांशु सिंह की भूमिका प्रमुखता से सामने आई है। वह पीजीआई क्षेत्र के सरस्वतीपुरम में रहता है। वह पिछले चार वर्षों से इस गतिविधि में शामिल है। हालांकि, जांच में यह आशंका भी जताई जा रही है कि नेटवर्क का संचालन करने वाला कोई अन्य व्यक्ति हो सकता है, जो मेडिकल संस्थानों के आसपास बिचौलियों और मेडिकल स्टोर संचालकों के माध्यम से अपना नेटवर्क संचालित कर रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, एसजीपीजीआई में मरीजों के तीमारदार दवाओं आदि की आवश्यकता के लिए जब संस्थान के बाहर स्थित मेडिकल स्टोर पर जाते हैं तो संचालक द्वारा उनसे रक्त की जरूरत आदि के बारे में भी चर्चा करते हैं। तीमारदार शाहबाज अली और यश कुमार के साथ भी ऐसा ही हुआ। यहां मेडिकल स्टोर संचालक द्वारा उनसे डोनर उपलब्ध कराने के नाम पर सौदा तय किया गया।

इसके बाद मेडिकल स्टोर संचालक ने हिमांशु से संपर्क कराया। हिमांशु अपने नेटवर्क में शामिल इंजीनियरिंग छात्रों को फोन कर निर्धारित समय पर एसजीपीजीआई पहुंचने के लिए कहता है। वहां एडवांस पेमेंट न मिलने के कारण विवाद की स्थिति पैदा हो गई।

कॉलेज स्टूडेंट्स के मोबाइल नंबरों की सूची होने की बात आ रही सामने

बताया जा रहा है कि नेटवर्क से जुड़े लोगों के पास शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले युवाओं के मोबाइल नंबरों की सूची रहती है। ऐसे युवाओं को प्राथमिकता दी जाती थी, जो रकम के बदले रक्त देने के लिए करने के लिए तैयार हो जाते थे। इस तरह छात्रों को डोनर के रूप में इस्तेमाल कर मरीजों के तीमारदारों से पैसे वसूल किए जा रहे हैं।

एडवांस पेमेंट पर होता है खून का सौदा

एसजीपीजीआई के इमरजेंसी रेड जोन में भर्ती मरीज के तीमारदार की शिकायत के बाद सुरक्षा अधिकारी ने पांच युवकों को पकड़ा। इनमें बीबीडी के इंजीनियरिंग छात्र पवन, अमन और भावेश के अलावा प्रदीप के नाम सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि सभी इंजीनियरिंग छात्र रक्त के लिए एडवांस पैसा लेते थे। पैसे गूगल पे, फोन पे या फिर नकद भी लिए जाते हैं।

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एसजीपीजीआई कोतवाली प्रभारी सुनील कुमार सिंह के मुताबिक, पकड़े गए सभी पांचों आरोपितों के आधार कार्ड हासिल कर लिए गए हैं। सोमवार को संस्थान प्रशासन से इस बात की तस्दीक कराई जाएगी कि उनके आधार पर कितनी बार इसके पूर्व ब्लड देने का काम हुआ है। सभी पांचों आरोपितों का शांति भंग में फिलहाल चालान किया गया है।

पुलिस जांच के साथ हमारे यहां भी आंतरिक जांच की जाएगी। आधार नंबर के जरिए सभी पांचों युवकों का डेटा खंगाला जाएगा। तभी पता चलेगा कि पकड़े गए युवकों ने पहले कितनी बार रक्त दिया है।- सुरक्षा अधिकारी, डीके पांडेय, एसजीपीजीआई