लखनऊ प्रॉपर्टी डीलर हत्याकांड: बेटे को IPS और बेटी को डाक्टर बनाना चाहते थे पिता, चूर हो गए सपने
लखनऊ में प्रॉपर्टी डीलर संदीप की हत्या के बाद उनकी पत्नी प्रीति और बच्चों का दर्द पीजीआई ट्रामा सेंटर में दिखा। संदीप अपने बच्चों को आईपीएस और डॉक्टर ...और पढ़ें

पत्नी प्रीति बेटी शिवी, बेटे के हाथ में जूस की बोतल जो घर से भर कर लाया था। पिता को अस्पताल में पिलाएंगे। जागरण
HighLights
पत्नी प्रीति और बच्चों का पीजीआई में दर्दनाक मंजर।
संदीप बच्चों को आईपीएस और डॉक्टर बनाना चाहते थे।
चालक विपिन ने खून से सनी शर्ट छिपाने की कोशिश की।
विनय तिवारी, लखनऊ। पीजीआई ट्रामा सेंटर के बाहर बुधवार को ऐसा दर्दनाक मंजर था, जिसे देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। मृतक संदीप की पत्नी प्रीति जैसे ही अपने दोनों बच्चों के साथ पीजीआई के ट्रामा सेंटर पहुंची और कुछ देर बाद पति की हालत के बारे में पता चला तो वह बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़ीं।
होश आने पर बार-बार सिर्फ यही कहती रही आखिर यह कैसे हो गया। इन्होने किसी का क्या बिगाड़ा था जो बेरहमी से जान ले ली। यह देख आसपास के लोगों की आंखे भी नम हो गई। संदीप अपने बच्चों को आइपीएस अफसर और डाक्टर बनाना चाहते थे।
घटना के बाद संदीप का चालक विपिन भी पूरी तरह टूट चुका था। गोली लगने के बाद वह किसी तरह संदीप को उनकी कार से पीजीआई ट्रामा सेंटर लेकर पहुंचा, लेकिन उसमें इतनी हिम्मत नहीं थी कि संदीप की पत्नी और बच्चों को सच बता सके।
डीसीपी के निर्देश पर पत्नी और बच्चों को पीजीआई के ट्रामा सेंटर में बुलाने के लिए कहा गया। इसके बाद विपिन खून से सनी कार लेकर वृंदावन स्थित घर पहुंचा। इस दौरान उसकी शर्ट भी संदीप के खून से पूरी तरह भीग चुकी थी। उसे डर था कि कहीं प्रीति यह देखकर घबरा न जाएं, और कोई सवाल न करने लगे। इसलिए उसने शर्ट को मोड़कर खून के धब्बों को छिपा लिया।
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घर पहुंचने पर प्रीति लगातार पूछती रही क्या हुआ है इतनी जल्दी क्यों ले जा रहे हो। बेटे सार्थक को पता चला कि पिता अस्पताल में हैं तो उसने जल्दी से जूस को एक बोतल में भरा और मां के साथ अस्पताल चल पड़ा। बेटे को उम्मीद थी कि पापा ठीक हो जाएंगे और वह उन्हें जूस पिलाएगा। संदीप बेटे को आइपीएस अफसर और बेटी को डाक्टर बनाना चाहते थे।
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ट्रामा सेंटर में पत्नी चकरा कर गिर गई तो यह पूरा दृश्य बाहर खड़े उनके दोनों बच्चों ने देख लिया। 12 वर्षीय बेटे सार्थक और 9 वर्षीय बेटी की आंखें भर आईं। दोनों बार-बार यही पूछते रहे हमें यहां क्यों बुलाया गया पापा को क्या हुआ है, बच्चों के मासूम सवाल सुनकर वहां मौजूद पुलिसकर्मियों और परिचितों की भी आंखें नम हो गईं। परिचित बताते हैं कि चालक विपिन को उन्होंने मदद के तौर पर एक प्लाट मुफ्त में दिया था, ताकि वह किराए के मकान की जगह अपना घर बना सके।