उत्तर प्रदेश में कॉल सेंटर की बढ़ेगी क्षमता, साइबर ठगी की शिकायत करना अब और भी आसान
साइबर ठगी पीड़ितों को अब हेल्पलाइन 1930 पर आसानी से मदद मिलेगी। लखनऊ में पुलिस विभाग के कॉल सेंटर की क्षमता 5000 से बढ़ाकर 9000 कॉल प्रतिदिन की जा रही ...और पढ़ें


समय कम है?
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ। साइबर ठगी के शिकार लोगों को ऑनलाइन कॉल करने पर आसानी से विशेषज्ञों की मदद मिल सकेगी। साइबर हेल्प लाइन नंबर 1930 पर उनकी फोन काल ''वेटिंग'' पर नहीं जाएगी।
इसके लिए कल्ली पश्चिम मोहनलालगंज में स्थित पुलिस विभाग के स्टेट फाइनेंशियल मैनेजमेंट सेंटर (एसएफएमसी) के काल सेंटर की क्षमता को पांच हजार काल प्रतिदिन से बढ़ाकर नौ हजार करने की तैयारी है। इस काल सेंटर में 30 सीटें बढ़ाई जाएंगी।
वर्तमान में वहां 50 सीटों का काल सेंटर है। अतिरिक्त सीटें बढ़ने से काल स्वीकार करने की क्षमता भी बढ़ जाएगी।
पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण ने बताया कि एसएफएमसी का 20 सीटों का काल सेंटर यूपी 112 मुख्यालय में संचालित था। काल वेटिंग और शिकायतें, समस्याएं समय पर दर्ज न होने की समस्या अधिक होने के कारण बीते वर्ष कल्ली पश्चिम में 30 सीटर काल सेंटर की शुरुआत की गई थी।
जिसकी क्षमता बढ़ाकर कुछ महीने बाद 50 सीट की कर दी गई थी। इससे साइबर क्राइम से संबंधित शिकायतों-समस्याओं को दर्ज करने में वृद्धि हुई थी। अब इसकी क्षमता को बढ़ाकर 80 सीट किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि एसएफएमसी के साथ ही साइबर फ्राड मिटिगेशन सेंटर (सीएफएमसी) भी वहां कार्य कर रहा है। इसे गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर क्राइम समन्वय केंद्र (आई4सी) के सहयोग से संचालित किया जा रहा है।
सीएफएमसी में साइबर क्राइम विशेषज्ञों के साथ 13 प्रमुख बैंकों के प्रतिनिधि भी काल पर उपलब्ध रहते हैं। यह टीम कोई भी फोन काल आने पर रियल टाइम वित्तीय धोखाधड़ी से संबंधित धनराशि को फ्रीज करने में मदद करती है।
डीजीपी के निर्देश पर नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) से पंजीकृत होने वाली वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायतों पर ठगी की रकम को फ्रीज कराने की प्रक्रिया शुरू की जाती है।