लखनऊ में कैंसर पीड़ित बुजुर्ग को 15 दिनों तक रखा 'डिजिटल अरेस्ट', ATS और CBI अफसर बनकर जालसाजों ने ठगे 1.29 करोड़
लखनऊ में साइबर जालसाजों ने एटीएस और सीबीआई अधिकारी बनकर एक कैंसर पीड़ित बुजुर्ग और उनकी पत्नी को 15 दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' रखा। आतंकी फंडिंग के आरोप ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर

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जागरण संवाददाता, लखनऊ। साइबर जालसाजों ने कैंसर पीड़ित बुजुर्ग और उनकी पत्नी को एटीएस चीफ, सीबीआई अफसर बनकर 15 दिन डिजिटल अरेस्ट रखा। आतंकी फंडिंग के आरोप लगाए और राष्ट्रदोह समेत अन्य मामलों में फंसने से बचाने का डर दिखाकर 1.29 करोड़ रुपये ठग लिए। पीड़ित ने साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।
गोमतीनगर विस्तार के खरगापुर सरस्वतीपुरम निवासी 76 वर्षीय कैंसर पीड़ित दिलीप नारायण पांडेय ने बताया कि 27 मार्च की रात पत्नी आराधना के मोबाइल फोन पर एक कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को एटीएस अफसर बताते हुए कहा कि एक कार्रवाई में चार आतंकवादी पकड़े गए हैं।
पूछताछ में आतंकियों ने बताया है कि आपके आधार कार्ड की मदद से मुंबई में सिम कार्ड लिया गया है। उस सिम से मुंबई में खाता खोलकर आतंकी फंडिंग की गई है। इसके बाद जालसाज ने वीडियो कॉल कर एटीएस अफसर की वर्दी में किसी को दिखाया।
एक जालसाज ने खुद को सीबीआई अफसर बताया और मुकदमे में फंसाने का डर दिखाया। उसने पीड़ित से किसी को कुछ भी बताने से मना कर दिया। जालसाजों ने 10 अलग-अलग नंबरों से कॉल कर डराया।
सुप्रीम कोर्ट का लोगो लगा एक पत्र भी भेजा। इसके बाद जांच के नाम पर पीड़ित को 27 मार्च से 10 अप्रैल तक डिजिटल अरेस्ट कर कई खातों में 1.29 करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए। परिवारजन ने जब बुजुर्गों के बर्ताव में बदलाव देखा तो उन्होंने कई बार पूछा।
इस पर उन्होंने ठगी की बात बताई। साइबर क्राइम थाने के इंस्पेक्टर ब्रजेश यादव ने बताया कि तहरीर पर आईटी एक्ट समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर छानबीन की जा रही है।
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