लखनऊ से एसी डक्ट में छिपा शराब बिहार भेज रहे कोच अटेंडेंट, रेलवे बोर्ड ने मांगा ब्योरा
लखनऊ से बिहार जाने वाली ट्रेनों में कोच अटेंडेंट एसी डक्ट में शराब छिपाकर तस्करी कर रहे हैं। रेलवे बोर्ड ने ऐसे अटेंडेंट का ब्योरा मांगा है और चिह्नित ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
कोच अटेंडेंट एसी डक्ट में छिपाकर शराब तस्करी कर रहे।
बस्ती में लखनऊ-बरौनी एक्सप्रेस से 316 बोतलें पकड़ी गईं।
रेलवे बोर्ड ने शराब तस्करी में लिप्त अटेंडेंट का ब्योरा मांगा।
जागरण संवाददाता, लखनऊ। पिछले साल 14 अगस्त को लखनऊ से बरौनी जा रही लखनऊ जंक्शन-बरौनी एक्सप्रेस की एसी सेकेंड बोगी ए-2 के यात्रियों ने गर्मी की शिकायत की तो बस्ती में रेलवे के बिजली अनुभाग के कर्मचारियों ने पहले एसी प्लांट चेक किया। फाल्ट नहीं मिला तो फाल्ट तलाशने के लिए छत का डक्ट खोला।
डक्ट में शराब की 316 बोतलें देखकर सभी चौंक पड़े। पता चला कि कोच अटेंडेंट ने ही इसे छिपाया था। एसी की फाल्ट तो नहीं मिली लेकिन नशाबंदी वाले बिहार में ट्रेन के जरिये शराब की तस्करी का नया ट्रेंड सामने आ गया।
तब से इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं, जिसके बाद अब रेलवे बोर्ड ऐसे कोच अटेंडेंट का ब्योरा तैयार करने में जुटा है, जो शराब तस्करी में लिप्त हैं।
बरौनी एक्सप्रेस में शराब तस्करी मामले की जांच करने वाली उच्च स्तरीय टीम को पता चला कि कोच अटेंडेंट को आठ हजार मानदेय कई महीने से मिला ही नहीं था। हर महीने शराब तस्करी से ही वह एक लाख तक की कमाई कर लेता था।
ऐसे अटेंडेंट शराब तस्करी से लेकर पुष्पक एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों की एसी बोगियों की सीटें बेचने में भी शामिल हैं। टीटीई से साठगांठ भी रहती है। पिछले एक साल से लखनऊ से बिहार जाने वाली ट्रेनों में शराब की तस्करी बढ़ी है।
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कोच अटेंडेंट की ड्यूटी तो एसी बोगियों के यात्रियों को लिनेन उपलब्ध कराने की होती है, लेकिन वह यांत्रिक विभाग के कर्मचारियों की मदद से एसी डक्ट, पैनल और शौचालय के बोल्ट खोलकर उसके भीतर शराब छिपाकर ले जा रहे हैं। इनमें लखनऊ से आरंभ होने वाली पाटलिपुत्र एक्सप्रेस, लखनऊ-बरौनी और छपरा एक्सप्रेस हैं।
रेलवे बोर्ड करेगा समीक्षा
आउटसोर्स पर तैनात होने वाले कोच अटेंडेंट के अपराधिक इतिहास का ब्योरा किसी के पास नहीं है। ठेकेदार सत्यापन भी नहीं कराते हैं। रेलवे बोर्ड ने आरपीएफ से उन ट्रेनों और कोच अटेंडेंट का रिकार्ड मांगा है, जिनको पिछले छह महीने के दौरान शराब तस्करी या अन्य अपराध में पकड़ा गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर बोर्ड चिह्नित ट्रेनों की निगरानी बढ़ाएगा।
पूर्वोत्तर रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक छह माह में आठ कोच अटेंडेंट तो सीधे तौर पर बिहार जाने वाली ट्रेनों में शराब तस्करी करते हुए धरे गए हैं। इसके अलावा आठ बार केवल तस्कर पकड़े गए हैं, उनके मोबाइल फोन में कोच अटेंडेंट से हुई बातचीत का ब्यौरा मिला है। इसकी रिपोर्ट बोर्ड को भेजी जा रही है।