लखनऊ अग्निकांड: 30 दिन बाद भी नहीं मिले 15 मौतों के गुनहगार, अधिकारी सार्वजनिक नहीं कर रहे SIT और LDA की रिपोर्ट
लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड के 30 दिन बाद भी 15 मौतों के दोषियों का पता नहीं चल सका है, जिससे लोगों में गुस्सा है। ...और पढ़ें

अलीगंज की बिल्डिंग में लगी आग। जागरण आर्काइव
HighLights
30 दिन बाद भी 15 मौतों के दोषी नहीं मिले।
एसआईटी और एलडीए की जांच प्रक्रिया धीमी।
भवन मालिक पर इनाम राशि बढ़कर एक लाख हुई।
जागरण संवाददाता, लखनऊ। अलीगंज के सेक्टर-डी में बने भूखंड संख्या-एमएस-102 पर गहरे काले धब्बे जल्द ही गायब हो जाएंगे, क्योंकि भवन ढहाया जा रहा है। लेकिन, 22 जून से जो आग लोगों के दिलों में जल रही है वह ठंडी पड़ने का नाम नहीं ले रही, जिन विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों की अनदेखी से 15 बेगुनाह जलकर भस्म हो गए, उनके गुनहगार 30 दिनों में खोजे नहीं जा सके।
लचर सिस्टम सिर्फ जवाबदेह विभागों से कथित जिम्मेदारों की सूची मांगता रहा, आग का धुआं इतना गहरा था कि दो सदस्यीय एसआइटी और एलडीए की आंतरिक जांच की रिपोर्ट लिखी नहीं जा सकी है।
भीषण दुर्घटना में कार्रवाई के नाम पर पांच अधिकारी व छुटभैये कर्मचारी ही निलंबित किए गए हैं, एक भवन स्वामी को एक माह में गिरफ्तार नहीं जा सका। उस पर इनाम की धनराशि बढ़कर एक लाख हो गई है। घटना में बड़ों पर कार्रवाई छोड़िए अधिकारी उनका नाम लेने की हिम्मत नहीं दिखा पा रहे।
अलीगंज के अवैध भवन में 22 जून को भीषण अग्निकांड में 15 युवाओं की मौत व नौ लोगों के घायल होने में सभी टकटकी लगाए थे कि कड़ी और बड़ी कार्रवाई होगी। इसकी वजह, सीएम योगी आदित्यनाथ का मौके पर पहुंचकर अपर मुख्य सचिव पर्यटन अमृत अभिजात व एडीजी जोन लखनऊ प्रवीण कुमार को एसआईटी जांच सौंपकर सात दिन में रिपोर्ट मांगना था।
एलडीए से 2016 से अब तक तैनात अधिकारियों का ब्योरा तलब किया गया था। राजधानी के सबसे भीषण अग्निकांड की जांच कब पूरा होगी, यह कोई नहीं बता पा रहा। अग्निकांड के दोषियों को चिन्हित करने की प्रक्रिया बेहद धीमी है। इस मामले में एक दर्जन इंजीनियरों पर भी शिकंजा कसने की चर्चा हैं।
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विद्युत सुरक्षा निदेशालय की भूमिका पर उठे थे सवाल
एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में एलडीए के साथ ही विद्युत सुरक्षा निदेशालय के अफसरों की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। आवास की जमीन पर व्यावसायिक निर्माण मिला साथ ही 20 किलोवाट बिजली भार की जगह 35 किलोवाट का उपयोग मिला था।
अभिलेखों में हेराफेरी करने वाले पेशकार को कुछ दिन पहले ही एलडीए ने निलंबित किया था। इसे मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाना ही माना जा रहा है। एलडीए उपाध्यक्ष ने बताया, अग्निकांड की आंतरिक जांच अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा की अगुवाई में कराई गई थी, रिपोर्ट को एसआईटी को भेजा है।
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एक माह का घटनाक्रम
- 22 जून: अलीगंज सेक्टर डी स्थित भूखंड संख्या एमएस 102 पर बने अवैध भवन में आग लगने से 15 लोगों की मौत व नौ घायल हुए।
- 23 जून: शासन ने जांच के लिए एसआईटी गठित किया। आरोपित भवन स्वामी व तीन अन्य को जेल भेजा गया था।
- 24 जून: एसआईटी ने घटनास्थल का निरीक्षण किया आइएएस व पीसीएस अधिकारियों के नाम एलडीए ने एसआईटी को भेजा गया था।
- 25 जून: एसआईटी ने दोबारा घटनास्थल का निरीक्षण किया था।
- 26 जून: आरोपित भवन स्वामी वीरेंद्र शुक्ल को जेल में नोटिस तामील कराया गया। शासन ने चार इंजीनियर व एक सुपरवाइजर को निलंबित किया।
- 27 जून: एसआईटी ने अधिकांश गवाहों और संबंधित अधिकारियों के बयान पूरा किया था। साक्ष्यों का क्रास वेरीफिकेशन किया गया।
- 29 जून: एलडीए ने जोन चार में तैनात रहे इंजीनियरों की अंतिम सूची एसआईटी को सौंपी थी।
- 07 जुलाई: विहित प्राधिकारी न्यायालय में भवन गिराने की सुनवाई शुरू हुई।
- 10 जुलाई: एक-एक दिन समय देकर जवाब दाखिल करने को कहा गया। भवन को 15 दिन में खुद गिराने अन्यथा एलडीए ध्वस्त करेगा आदेश दिया।
- 20 जुलाई: भवन स्वामी की ओर से अवैध भवन गिराने की प्रक्रिया शुरू हुई पुलिस ने रोका।
- 21 जुलाई: दोपहर से अवैध भवन के ऊपरी मंजिल से भवन गिराने की प्रक्रिया तेज हुई।