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क्षेत्र पंचायतें बढ़ाना चाह रहीं अधिकार, दो हजार वर्गफीट तक के भूखंडों के मानचित्र स्वीकृति की मांग

Published: Mon, 24 Aug 2026 08:00 PM (IST)

UP News: क्षेत्र पंचायतों को 2000 वर्ग फीट से छोटे भूखंडों पर मानचित्र स्वीकृति का अधिकार दिया जाए, 2000 और उससे बड़े भूखंडों पर जिला पंचायतें ही नक्शा स्वीकृत करें।

पंचायती राज व्यवस्था के तीनों अंगों ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत

पंचायती राज व्यवस्था के तीनों अंगों ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत 

HighLights

  1. प्रदेश ब्लाक प्रमुख संघ ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर मांग पत्र सौंपा

  2. क्षेत्र पंचायतों की आय के लिए शासनादेश जारी करने की मांग

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। 16वें वित्त आयोग के परफार्मेंस ग्रांट देने की शर्तों में पंचायतों की स्वयं की आय का शर्त जोड़ने सेपंचायती राज व्यवस्था के तीनों अंगों ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत में स्वयं के आय के साधन बढ़ाने की प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। क्षेत्र पंचायतों को अपने क्षेत्र में नक्शा स्वीकृति का अधिकार देने की मांग सरकार से की गई है।

मांग में कहा गया है कि क्षेत्र पंचायतों को 2000 वर्ग फीट से छोटे भूखंडों पर मानचित्र स्वीकृति का अधिकार दिया जाए, 2000 और उससे बड़े भूखंडों पर जिला पंचायतें ही नक्शा स्वीकृत करें। कर की वसूली का अधिकार दिए जाने की मांग भी की गई है।

ब्लाक प्रमुख संघ के प्रदेश अध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप सिंह ‘सेनानी’ ने रविवार की शाम को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर क्षेत्र पंचायतों की आय बढ़ाने के मुद्दे पर चर्चा की। संघ की तरफ से विस्तृत मांग पत्र भी सौंपा।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र पंचायतों को नक्शा स्वीकृत करने का अधिकार नहीं दिए जाने की स्थिति में नक्शा स्वीकृति से जिला पंचायतों को होने वाली कमाई में क्षेत्र पंचायतों की भी हिस्सेदारी तय की जानी चाहिए। क्षेत्र पंचायतों के पास स्वयं के आय का कोई साधन नहीं है।

मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि अधिकांश क्षेत्र पंचायत नेशनल हाईवे अथवा स्टेट हाईवे के किनारे स्थित हैं। कार्यालयों की अवशेष भूमि पर कामर्शियल कांप्लेक्स का निर्माण कराया जा सकता है, लेकिन स्पष्ट दिशा निर्देशों के अभाव में ऐसा नहीं हो पा रहा है।

उत्तर प्रदेश क्षेत्र तथा जिला पंचायत अधिनियम-1961 में जिक्र है कि क्षेत्र पंचायतें अपने अधिकार क्षेत्र में मेले, प्रदर्शनियों, पशु बाजारों और ऐसी अन्य गतिविधियों का वैधानिक अधिकार रखती हैं। प्रदेश में ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के बीच कर निर्धारण के लिए कोई सीमांकन नहीं किया गया है। पंचायतों द्वारा वसूले गए कर में आनुपातिक बंटवारे का निर्धारण भी नहीं है। इन मुद्दों पर स्पष्ट शासनादेश जारी किए जाने की मांग की।