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काकोरी ट्रेन एक्शन... जब 4600 की लूट के मुकदमे में अंग्रेज सरकार को खर्च करने पड़े थे 10 लाख

Updated: Fri, 14 Aug 2026 03:16 PM (IST)

काकोरी ट्रेन एक्शन में क्रांतिकारियों ने 4600 रुपये लूटे थे, लेकिन इस मुकदमे पर ब्रिटिश सरकार को 10 लाख रुपये खर्च करने पड़े। यह घटना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण मोड़ थी, जिसमें कई क्रांतिकारियों को सजा सुनाई गई।

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HighLights

  1. काकोरी ट्रेन एक्शन: 4600 रुपये की लूट पर 10 लाख खर्च।

  2. राम प्रसाद बिस्मिल सहित कई क्रांतिकारियों ने खजाना लूटा था।

  3. 2021 में 'काकोरी कांड' का नाम 'काकोरी ट्रेन एक्शन' किया गया।

जागरण संवाददाता, लखनऊ। काकोरी ट्रेन एक्शन... ने अंग्रेजी हुकूमत को हिलाकर रख दिया था। घटना को अंजाम देने वाले क्रांतिकारियों को पकड़ने के लिए हुकूमत ने पूरी ताकत झोंक दी थी। 4600 रुपये लूटने वाले इन क्रांतिकारियों को गिरफ्तार करने के बाद पहले रोशनुद्दौला कोठी, फिर रिंग थियेटर में दस महीने मुकदमा चला।

सरकार ने करीब 10 लाख रुपये खर्च किए थे। परिणाम क्रांतिकारियों को फांसी तक की सजा सुनाई गई। स्वतंत्रता आंदोलन की इस घटना का जिक्र हमेशा स्वर्ण अक्षरों में किया जाता है।

देश को आजादी दिलाने के लिए ब्रिटिश राज के खिलाफ छिड़ी जंग में क्रांतिकारियों को हथियार खरीदने थे, जिसके लिए अंग्रेजी सरकार के खजाने (करीब 4600 रुपये) को लूटने की योजना बनाई गई थी। क्रांतिकारियों ने नौ अगस्त 1925 को काकोरी में ट्रेन से ले जाए जा रहे अंग्रेजों के खजाने को लूट कर प्राप्त धन से स्वतंत्रता आंदोलन को गति दी थी। इसके लिए शाहजहांपुर में सात अगस्त 1925 को क्रांतिकारियों ने बैठक कर रणनीति तय की थी।

बैठक में चंद्रशेखर आजाद, राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्लाह खां, राजेंद्र नाथ लाहिड़ी, शचींद्र नाथ बक्शी, मन्मथ नाथ गुप्त सहित कई क्रांतिकारी शामिल हुए थे। यहीं तय हुआ था कि सहारनपुर से लखनऊ आने वाली आठ डाउन पैसेंजर से रोजाना जाने वाले अंग्रेजों के खजाने को लूट लिया जाए। अगले ही दिन योजनाबद्ध तरीके से क्रांतिकारियों ने ट्रेन लूटने की कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो सके।

क्रांतिकारियों ने लूटा था खजाना 

अगर वह इस कोशिश में सफल हो जाते, तो काकोरी कांड इतिहास में आठ अगस्त को ही दर्ज हो जाता। वे करीब दस मिनट की देरी से वहां पहुंचे थे और उनके पहुंचने के पहले ही ट्रेन निकल चुकी थी। पहली बार असफल होने के बाद नए सिरे से योजना बनाई गई और फिर नौ अगस्त को पूरी ताकत के साथ क्रांतिकारियों ने सफलतापूर्वक खजाना लूट लिया।

क्रांतिकारी राजेंद्र नाथ लाहिड़ी ने सहारनपुर-लखनऊ पैसेंजर ट्रेन की चेन खींचकर उसको रोक दिया, फिर राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में अशफाक उल्ला खां, चंद्रशेखर आजादी और वीर सपूतों ने ट्रेन पर धावा बोला। इसमें जर्मनी में बनी चार माउजर पिस्टल का इस्तेमाल किया गया था।

इस घटना से बौखलाई अंग्रेजी सरकार ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी और क्रांतिकारियों पर सरकार के खिलाफ सशस्त्र युद्ध छेड़ने, सरकारी खाजाना लूटने और हत्या करने का केस चलाया। क्रांतिकारियों की गिरफ्तारी पर पांच हजार रुपये का ईनाम भी घोषित किया गया। करीब दस महीने मुकदमा चला। इस मुकदमें में करीब 10 लाख रुपये खर्च हुए।

काकोरी ट्रेन कांड का दिया नाम 

2021 में ''''काकोरी कांड'''' का नाम किया गया काकोरी ट्रेन एक्शन : जब देश की स्वतंत्रता के लिए महात्मा गांधी ने अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन की शरुआत की, उसी दिन नौ अगस्त 1925 को लखनऊ से चंद किमी की दूरी पर अंग्रेजों के खिलाफ एक बड़ी हिंसात्मक आंदोलन की नींव रखी गई। राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में कई क्रांतिकारियों ने मिलकर सरकारी खजाने से लदी ट्रेन को लूट लिया। जिसे बाद में काकोरी ट्रेन कांड नाम दिया गया।

खजाने लूटने से अंग्रेजी सरकार को बहुत बड़ा झटका लगा था। इसलिए सरकार ने उस कांड में शामिल क्रांतिकारियों को पकड़ने के लिए अपनी सारी शक्ति झोंक दी थी। कांड में शामिल चंद्र शेखर आजाद फरार हो चुके थे, लेकिन अन्य क्रांतिकारियों को गिरफ्तार कर उनपर मुकदमा चलाया गया।

यह मुकदमा दिसंबर 1925 से अगस्त 1927 तक राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में कई क्रांतिकारियों ने मिलकर सरकारी खजाने से लदी ट्रेन को लूट लिया। दिसंबर 1925 से अगस्त 1927 तक लखनऊ के रोशनद्दौला कचहरी फिर बाद में जीपीओ के भवन में यह मुकदमा दो चरणों में चला।

प्रदेश सरकार ने नौ अगस्त 2021 को ''''काकोरीकांड'''' या ''''काकोरीषड्यंत्र'''' का नाम बदलकर ''''काकोरी ट्रेन एक्शन'''' कर दिया था। सरकार का मानना था कि ''''कांड'''' या ''''षड्यंत्र'''' जैसे शब्द इस महान ऐतिहासिक घटना के अपमान का बोध कराते हैं।काकोरी कांड - स्वतंत्रता सेनानियों की सजा

काकोरी कांड के अमर क्रांतिकारी और सुनाई गई सजाएं

क्र.सं. क्रांतिकारी का नाम सुनाई गई सजा / विवरण
1 राम प्रसाद बिस्मिल फांसी
2 अशफाक उल्लाह खां फांसी
3 रोशन सिंह फांसी
4 राजेंद्र नाथ लाहिड़ी फांसी
5 चंद्रशेखर आजाद फरार घोषित (अल्फ़्रेड पार्क इलाहाबाद में पुलिस संघर्ष में बलिदान)
6 शचींद्र नाथ सान्याल आजीवन कैद
7 योगेश चंद्र चटर्जी आजीवन कैद
8 गोविंद चरण कर आजीवन कैद
9 शचींद्र नाथ बक्शी आजीवन कैद
10 मुकुंदी लाल गुप्त आजीवन कैद
11 मन्मथ नाथ गुप्त 14 वर्ष कैद
12 विष्णु शरण दुबलिश 10 वर्ष कैद
13 सुरेश चंद्र भट्टाचार्य 10 वर्ष कैद
14 राम कृष्ण खत्री 10 वर्ष कैद
15 राजकुमार सिन्हा 10 वर्ष कैद
16 प्रेम कृष्णा खन्ना 5 वर्ष कैद
17 भूपेंद्र नाथ सान्याल 5 वर्ष कैद
18 राम दुलारे त्रिवेदी 5 वर्ष कैद
19 प्रणवेश कुमार चटर्जी 4 वर्ष कैद
20 राम नाथ पांडे 3 वर्ष कैद
21 बनवारी लाल 2 वर्ष कैद