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एक ही दवा-एक ही ब्रांड… कीमत में 27000 रुपये का अंतर, यूपी की प्राइवेट अस्पतालों में मुनाफाखोरी का खुला खेल

Published: Thu, 08 Oct 2026 05:45 AM (IST)Updated: Thu, 08 Oct 2026 07:04 AM (IST)

उत्तर प्रदेश के अस्पतालों की फार्मेसी में एक ही कंपनी की दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत (एमआरपी) में भारी अंतर ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

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HighLights

  1. एफएसडीए ने 214 अस्पतालों की फार्मेसी से 167 दवाओं का मूल्य विश्लेषण किया।

  2. टेनक्टेरेल और इनोंजा जैसी गंभीर दवाओं की कीमतों में भारी अंतर।

  3. केंद्र सरकार को सूची भेजकर मूल्य नियंत्रण की सिफारिश की गई।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश के अस्पतालों की फार्मेसी (दवा की दुकान) से जुटाए गए दवाओं और इंजेक्शनों के नमूनों और उनकी खरीद के बिलों की जांच में एक कंपनी की एक ही दवा की अधिकतम खुदरा कीमत (एमआरपी) अलग-अलग पाई गई है। ये दवाएं गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होती हैं।

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने ऐसी 167 दवाओं की सूची केंद्र सरकार को भेजकर आवश्यक कार्रवाई की सिफारिश की है। साथ ही, प्रदेश के दवा कारोबारियों को दवा की खरीद कीमत सार्वजनिक करने का निर्देश देकर कीमतों में विसंगति और मुनाफाखोरी को नियंत्रित करने का प्रयास किया है।

एफएसडीए के अधिकारियों के मुताबिक, 214 अस्पतालों की जांच में एकत्र की गई दवाओं की एमआरपी की तुलना की गई है। इसमें रिलायंस लाइफसाइंस की टेनक्टे-प्लेज 40 एमजी (टेनक्टेरेल) इंजेक्शन की कीमत कहीं 43,119 रुपये तो कहीं 49,060 रुपये मिली। गंभीर हृदयघात में जीवन बचाने के लिए इस्तेमाल होने वाले इस इंजेक्शन की एक खुराक की कीमत में 5941 रुपये का अंतर पाया गया है।

तीन तरह की मिली इंजेक्शन की एमआरपी

इसी तरह गंभीर रूप से जलने पर शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थों की पूर्ति के लिए इस्तेमाल होने वाले ह्यूमन एल्बुमिन 20 प्रतिशत (एल्बुराल) इंजेक्शन की एमआरपी तीन तरह की मिली। कहीं 7986 रुपये, कहीं 9749 रुपये और कहीं 10,724 रुपये दर्ज थी।

इंटास की एल्बुसेल इंजेक्शन की कुछ डोज की कीमत 7986 रुपये और कुछ की 10,989 रुपये मिली। शरीर में खून, प्लाज्मा और प्रोटीन की कमी पूरी करने तथा रक्त की मात्रा संतुलित रखने में इस्तेमाल होने वाले इस इंजेक्शन की कीमत में 3003 रुपये का अंतर मिला। जीवन के लिए खतरा पैदा करने वाली बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली बेनेटास की कीमत में 5699.10 रुपये और न्यूकाइन में 655.63 रुपये का अंतर मिला।

एक ही दवा की कीमत में 27,390 रुपये का अंतर

दोबारा कैंसर सेल बनने के बाद उसके उपचार में इस्तेमाल होने वाली इनोटुजुमैब ओजोगामाइसिन 1 एमजी (इनोंजा) की कीमत में सबसे बड़ा अंतर मिला। इसकी एमआरपी कहीं 3,02,610 रुपये तो कहीं 3,30,000 रुपये दर्ज थी। यानी एक ही दवा की कीमत में 27,390 रुपये का अंतर पाया गया।

गुफिक बायोसाइंसेज की कोलिस्टिमेथेट 4.5 एमआईयू की कीमत में 1683 रुपये, दो एमआईयू में 670 रुपये और टाइगेसाइक्लिन 50 एमजी में 1,326 रुपये का अंतर मिला। कैस्पोफंगिन, पालीमाक्सिन बी, एज्ट्रियोनाम और टर्लिप्रेसिन की एमआरपी में अंतर दर्ज किया गया।

मेनैक्ट्रा वैक्सीन की कीमत में 250 रुपये, एंटी-डी 300 एमसीजी में 297 रुपये, न्यूमोकोकल वैक्सीन में 335 रुपये और आक्ट्रीओटाइड में 73.33 रुपये का अंतर मिला।

एफएसडीए की आयुक्त डाॅ. रोशन जैकब के मुताबिक 167 दवाओं की सूची केंद्र सरकार के साथ साझा की गई है। एनपीपीए से अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली दवाओं को मूल्य नियंत्रण वाली अनुसूचित सूची में शामिल करने का आग्रह किया है।

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