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    यूपी : भाजपा कल 68 पदाधिकारियों के साथ बैठक कर देगी चुनावी होमवर्क, पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल लेंगे मीटिंग

    Updated: Fri, 10 Jul 2026 09:48 PM (IST)

    भाजपा उत्तर प्रदेश में चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए आज 68 पदाधिकारियों के साथ बैठक करेगी। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मप ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. भाजपा आज 68 पदाधिकारियों संग करेगी अहम बैठक।

    2. पंकज चौधरी और धर्मपाल सिंह देंगे चुनावी रणनीति।

    3. विधानसभा प्रभारियों की घोषणा, जातीय समीकरणों पर जोर।

    राज्य ब्यूरो, लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनावी बादल घने हो रहे हैं। सभी पार्टियां राजनीतिक भागदौड़ कर रही हैं, लेकिन भाजपा का रथ बैठक और अभियान के दो पहियों पर चल रहा है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह शनिवार को मुख्यालय पर 68 पदाधिकारियों के साथ बैठक कर भविष्य की रणनीति एवं कार्ययोजनाओं की दिशा तय करेंगे।

    उन्हें चुनावी होमवर्क भी दिया जाएगा। वहीं, बैठक में क्षेत्रीय प्रभारियों, क्षेत्रीय टीमों, मोर्चों की प्रदेश से लेकर जिला तक की टीमों एवं विधान सभा प्रभारियों की घोषणा कर उन्हें मैदान में उतारने पर भी निर्णय होगा।

    25 जून को प्रदेश इकाई के साथ ही मोर्चों एवं क्षेत्रीय अध्यक्षों की भी घोषणा की गई। चार जुलाई को राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन एवं बीएल संतोष ने लखनऊ में दो दिनों तक मैराथन बैठकें कीं। अब 11 जुलाई यानी शनिवार को प्रदेश नेतृत्व के सामने पदाधिकारियों की पहली औपचारिक बैठक होगी, जिसमें प्रदेश पदाधिकारी, क्षेत्रीय अध्यक्षों एवं मोर्चों के अध्यक्षों को बुलाया गया है।

    पंकज चौधरी के टीम में कितने मंत्री और उपाध्यक्ष

    पंकज चौधरी की टीम में आठ महामंत्री एवं 19-19 उपाध्यक्ष एवं मंत्री हैं। नए पदाधिकारियों को पार्टी चुनावी प्रबंधन और माइक्रोमैनेजमेंट के बारे में बताया जाएगा। चुनाव के लिए चरणबद्ध तरीके से तैयारी को कैसे बढ़ाया जा सकता है, इसकी भी दिशा तय होगी। सभी क्षेत्रों में नए अध्यक्ष बनाए गए हैं ऐसे में प्रदेश नेतृत्व की जिम्मेदारी और बढ़ गई है।

    जुलाई माह में पार्टी को आनलाइन लर्निंग का अभियान खत्म करना है। राष्ट्रीय नेतृत्व प्रदेश की टीम को ऐसे अभियान थमाएगी जिसमें सरकार की उपलब्धियों को लोगों को तक पहुंचाने का लक्ष्य होगा। जातीय समीकरणों को लेकर भी चर्चा होगी। माना जा रहा है कि विधान सभा प्रभारी बनाने में राजनीतिक अनुभव एवं जातीय गणित का विशेष ध्यान रखा जाएगा।

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