एटीएस के रडार पर आया जाली मुद्रा की तस्करी करने वाला गिरोह, दिल्ली में खपाते थे नकली नोट
एटीएस ने जाली भारतीय मुद्रा की सप्लाई करने वाले गिरोह के दो सदस्यों को लखनऊ से गिरफ्तार किया है। ...और पढ़ें

HighLights
एटीएस ने जाली मुद्रा गिरोह के दो सदस्य पकड़े।
पाकिस्तान में छपी उच्च गुणवत्ता वाली जाली मुद्रा खपाई जाती थी।
दिल्ली के बाजारों में भी होती थी नकली नोटों की सप्लाई।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। आतंकवाद निरोधक दस्ता ने राज्य में जाली भारतीय मुद्रा की सप्लाई करने वाले तस्करों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। जाली भारतीय मुद्रा की सप्लाई करने वाले गिरोह के दो सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद एटीएस को उनसे पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिली हैं।
गिरफ्तार आरोपित समीरुल का भाई जकीरुल भी इस गिरोह में शामिल है, जो दिल्ली के बाजारों में व्यापारियों को जाली भारतीय मुद्रा की सप्लाई करता था। उसे दो बार गिरफ्तार भी किया जा चुका है और शनिवार को वह जाली नोटों की एक खेप लेकर भागने में सफल रहा है। एएटीएस ने उसकी व गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए दो टीमें बनाई हैं।
एटीएस ने शनिवार को लखनऊ से जाली भारतीय मुद्रा की सप्लाई करने वाले गिरोह के कासगंज निवासी अजीम खान व राजा उर्फ समीरुल को गिरफ्तार किया था।
गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ में एजेंसी को पता चला कि पाकिस्तान में छपी उच्च गुणवत्ता वाली भारतीय जाली मुद्रा भारत-बांग्लादेश सीमा से सटे मालदा के एक तस्कर के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती थी।
500-500 रुपये के नोटों वाली यह जाली मुद्रा देखने में एकदम असली लगती है। आम नागरिक इनमें और असली नोटों में फर्क नहीं बता सकते हैं। एक लाख रुपये के बदले उन्हें तीन लाख रुपये के नोट मिलते थे।
आरोपितों द्वारा इनकी सप्लाई उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों सहित दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में 50 प्रतिशत की दर पर की जाती थी।
बंगाल से यूपी तक ट्रेन के जरिए इन नोटों की सप्लाई गिरोह की महिला सदस्यों द्वारा की जाती थी। पहले ये लोग बंगाल के एक गिरोह के लिए उत्तर प्रदेश में जाली नोटों की सप्लाई करते थे।
इस धंधे में एक आरोपित ने अपने भाई को भी शामिल कर लिया था। उसके जरिए दिल्ली में जाली नोटों की सप्लाई की जाती थी। फिलहाल एटीएस ने गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए हैं। वहीं इस मामले की जांच एनआइए भी कर रही है।