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अमेठी में 138 मतदाताओं के नाम हटाने पर इलाहाबाद हाई कोर्ट सख्त, आयोग से मांगा स्पष्टीकरण

By Jagran NewsEdited By: Shiv Govind Mishraa
Published: Thu, 29 Oct 2026 06:51 AM (IST)

अमेठी में 138 लोगों के नाम अंतिम मतदाता सूची से हटाए जाने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ ...और पढ़ें

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HighLights

  1. अमेठी में 138 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए।

  2. हाई कोर्ट ने निर्वाचन आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है।

  3. मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को निर्धारित है।

विधि संवाददाता, लखनऊ। अमेठी में 138 लोगों के नाम अंतिम मतदाता सूची से हटाए जाने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है कि किन नियमों और प्रक्रियाओं के तहत मतदाताओं के नाम हटाए गए। न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की एकल पीठ ने यह आदेश महमूदपुर बेनीपुर ग्राम पंचायत के गोपालपुर गांव के 138 निवासियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को होगी। याचियों का कहना है कि उनके नाम पिछले करीब एक दशक से मतदाता सूची में दर्ज थे। इस बार जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में भी उनके नाम शामिल किए गए थे, लेकिन अंतिम सूची प्रकाशित होने पर नाम गायब मिले। आरोप है कि संबंधित मतदाताओं को पहले कोई सूचना भी नहीं दी गई। इससे उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं मिला।

इससे पहले नौ अक्टूबर को हुई सुनवाई में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि जब मतदाताओं के नाम पुरानी और ड्राफ्ट सूची में दर्ज थे, तो अंतिम सूची से उन्हें किस आधार पर हटाया गया। कोर्ट ने नाम हटाने की प्रक्रिया और मतदाताओं को पूर्व सूचना देने के संबंध में भी जानकारी मांगी थी। सरकार की ओर से मामले की जांच कराने और संबंधित अधिकारियों से जानकारी जुटाने के लिए समय मांगा गया था।

आदेश को किया निरस्त

अविवाहित बहन को पारिवारिक पेंशन से वंचित नहीं कर सकता शासनादेश इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया है कि शासनादेश के जरिये संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत बनाए गए वैधानिक सेवा नियमों को बदला या निष्प्रभावी नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने मृत सरकारी कर्मचारी की अविवाहित बहन को पारिवारिक पेंशन देने से इन्कार करने संबंधी आदेश को निरस्त कर दिया।

साथ ही छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ पेंशन के बकाये का भुगतान करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति मनीष कुमार की एकल पीठ ने यह आदेश शमीन खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याची के अनुसार, उनके दिवंगत भाई ने सेवा पुस्तिका में उन्हें पारिवारिक पेंशन के लिए नामित किया था। इसके बावजूद पांच दिसंबर 2025 को उनका दावा खारिज कर दिया गया।

आरओ-एआरओ भर्ती चयन प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने आरओ-एआरओ भर्ती परीक्षा-2023 की चयन प्रक्रिया को चुनौती देने वाली दो याचिकाएं खारिज कर दी हैं। न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने कहा कि चयन प्रक्रिया में शामिल होने के बाद असफल अभ्यर्थी उसके नियमों को चुनौती नहीं दे सकते, जब तक यह साबित न हो कि पूरी सावधानी के बावजूद उन्हें संबंधित खामी की पहले जानकारी नहीं हो सकती थी।

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याचियों का कहना था कि प्रारंभिक परीक्षा में उनसे कम अंक पाने वाले कुछ अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया गया, जबकि उन्हें मौका नहीं मिला। उन्होंने अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने और मुख्य परीक्षा में 15:1 के अनुपात में अभ्यर्थियों को बुलाने की मांग की थी।