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    आकाश आनंद का 'अंकल' दांव: बसपा ने बदला रणनीति का गियर, जेन-जी को साधने की तैयारी

    Updated: Tue, 11 Aug 2026 10:43 PM (IST)

    बसपा प्रमुख मायावती के भतीजे आकाश आनंद ने अखिलेश यादव और राहुल गांधी को 'अंकल' कहकर संबोधित किया है। ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. आकाश आनंद ने अखिलेश-राहुल को 'अंकल' कहा।

    2. यह बसपा की 2027 के लिए जेन-जी रणनीति है।

    3. युवाओं के मुद्दे जैसे बेरोजगारी, पेपर लीक पर फोकस।

    दिलीप शर्मा, लखनऊ। प्रदेश में बसपा भले ही अभी चुनावी मुकाबले में तीसरे पायदान की चुनौती से जूझ रही हो, लेकिन वर्ष 2027 के लिए पार्टी ने अपनी रणनीति का गियर बदल लिया हैं।

    पिछले तीन दिन में बसपा प्रमुख मायावती के बयान और उसके बाद उनके भतीजे पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद द्वारा हाथरस की अपनी चुनावी जनसभा में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी को ‘अंकल’ कहकर संबोधित करना, महज राजनीतिक तंज से ज्यादा जेन-जी को साधने की रणनीति के रूप में दिख रहा है।

    संदेश देने की कोशिश है कि अखिलेश और राहुल भले ही खुद को युवा राजनीति का चेहरा मानते हों, लेकिन अब वे ‘पुरानी पीढ़ी’ के नेता हैं। इसके मुकाबले आकाश खुद को नई पीढ़ी के प्रतिनिधि के रूप में पेश कर रहे हैं। उन्होंने उम्र के अंतर को राजनीतिक हथियार बनाकर ‘पुरानी राजनीति बनाम नई राजनीति’ का फ्रेम तैयार करने का दांव चला है।

    वर्तमान में बेरोजगारी, पेपर लीक आदि पर युवाओं में असंतोष, राजनीतिक दलों के लिए चुनौती है। आकाश ने जंतर-मंतर आंदोलन का संदर्भ लेकर सवाल किया कि आंदोलन के बाद युवाओं को क्या हासिल हुआ। यही वह मुद्दा है, जहां बसपा अपनी दलित राजनीति संग युवा एजेंडे को जोड़ने की कोशिश कर रही है।

    ‘अंकल’ वाला प्रयोग को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। यह उस पीढ़ी को साधने की कोशिश है, जो नेताओं को उनकी उम्र से कम और उनकी भाषा, मुद्दों व राजनीतिक शैली से अधिक आंकता है। उम्र का अंतर अक्सर पीढ़ीगत बदलाव का प्रतीक बनाया जाता है।

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    आकाश ने इसी अंतर को चुनावी संदेश में बदलने की कोशिश की है। जिस युवा मतदाता को पारंपरिक राजनीतिक चेहरों से दूरी महसूस हो रही है, उसे यह संदेश कि बसपा के पास उसकी पीढ़ी का नेता मौजूद है। उनकी यह कोशिश इंटरनेट मीडिया पर खूब प्रसारित हो रही है।

    हालांकि, आकाश के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि क्या वह इंटरनेट मीडिया की भाषा को वोट की भाषा में बदल पाएंगे। ‘अंकल’ जैसा शब्द जेन-जी के बीच तुरंत ध्यान खींच सकता है, लेकिन चुनाव, केवल भाषण के अंश इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होने भर से नहीं जीते जाते।