World Lion Day: कानपुर चिड़ियाघर कभी शेरों से रहता था गुलजार, अब घट रही संख्या
कानपुर चिड़ियाघर में शेरों की संख्या लगातार घट रही है, वर्तमान में केवल एक शेर और दो शेरनी बची हैं। पिछले नौ वर्षों से कोई नया शेर नहीं आया और न ही शा ...और पढ़ें

चिड़ियाघर में अपने बाड़े में शेरनी। चिड़ियाघर
HighLights
कानपुर चिड़ियाघर में शेरों की संख्या में भारी गिरावट
पिछले नौ वर्षों से नहीं हुई शेरों की वंश वृद्धि
इंदौर से नई शेरनी लाने की कवायद चल रही है
जागरण संवाददाता, कानपुर। चिड़ियाघर कभी शेरों की दहाड़ से गूंजने के लिए जाना जाता था। आसपास के क्षेत्र में भी उनकी दहाड़ने की आवाज सुनाई देती थी। इनकी संख्या धीरे-धीरे कम होती गई। वर्तमान समय में यहां एक शेर व दो शेरनी ही रह गए हैं। कोई वृद्धावस्था के कारण तो कोई बीमारी की वजह से मर गया। यहां वर्ष 2017 से शेरों की वृद्धि रुकी हुई है।
पिछले नौ वर्षों से न तो कोई शेर अथवा शेरनी यहां लाया गया और न ही किसी शावक का जन्म हुआ है। चिड़ियाघर में वर्ष 1998 से 2016 तक 18 वर्षों में 11 शेर-शेरनी लाए गए। इनमें चार शेर व सात शेरनी थी। अब इनकी संख्या को बढ़ाने के लिए फिर एक शेरनी को लाने की कवायद चल रही है। चिड़ियाघर के निदेशक बताते हैं कि वातावरण शेरों के अनुकूल बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

चिड़ियाघर वन्यजीवों के संरक्षण व उनके प्रजनन केंद्र के रूप में प्रसिद्ध है, इसके बावजूद यहां पर शेरों के वंश में वृद्धि नहीं हो पा रही है। चिड़ियाघर में बाघों की संख्या बढ़ी है। वर्तमान समय में यहां 13 बाघ हैं। वहीं शेरों की संख्या सिमट कर रह गई है। यहां शेरों की संख्या बढ़ाने के प्रयास भी किए गए लेकिन इसमें सफलता नहीं मिल सकी।
चिड़ियाघर नौ वर्ष पहले तक शेरों से गुलजार रहा है। यहां वर्ष 2016 में रायपुर से शेर अजय व शेरनी नंदिनी को लाया गया था। इनकी जोड़ी से कई शावकों का जन्म हुआ। नंदिनी ने वर्ष 2017 में छह शावकों को जन्म दिया इनमें से तीन शावक मर गए।
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शेर अजय व शेरनी नंदिनी की जोड़ी से चिड़ियाघर मे कई शावक पैदा हुए। शेरनी नंदिनी ने वर्ष 2017 में छह शावकों को जन्म दिया था। इनमें से तीन शावकों की मृत्यु हो गई थी। एक मादा शावक को दूसरे चिड़ियाघर भेज दिया गया। शेर अजय की दो महीने पहले बीमारी से मौत हो गई। वर्तमान समय में यहां शेरनी नंदिनी व उसके बच्चे शंकर व उमा ही रह गए हैं।
सुंदरी को नहीं अपनाया था नंदिनी ने, अमेरिका से दूध मंगाकर जीवन बचाया
शेरनी नंदिनी ने जन्म देने के बाद अपनी मादा शावक सुंदरी को नहीं अपनाया था। नंदिनी उसे दूध नहीं पिला रही थी। सुंदरी की जान बचाने के लिए चिकित्सकों ने प्रयास किए। वन्यजीव चिकित्सकों ने अमेरिका से दूध मंगाकर सुंदरी नौ महीने तक पिलाया। अमेरिका में शेरों के शावकों के लिए किटन मिल्क रिपलेसर तैयार किया जाता है। वन्यजीव चिकित्सकों के अनुसार यह दूध भारत में नहीं मिलता हैा। सुंदरी को बाद में तिरुपति चिड़ियाघर भेज दिया गया। वहां उसने शावकों को भी जन्म दिया।
इस तरह कम होती गई शेर व शेरनी की संख्या
- चिड़ियाघर में नवंबर वर्ष 1998 में जंगल से पकड़ कर पाउल नाम के शेर को जूनागढ़ से लाया गया।
- 10 फरवरी वर्ष 2003 को इसकी मौत बीमारी की वजह से हो गई। शेरनी राजवंती व नंदा को नवंबर 1998 में जूनागढ़ से लाया गया। राजवंती की जून 1999 में बीमारी से मौत हो गई । शेरनी नंदा की मौत टीबी से अक्टूबर 2001 में हो गई। शेरनी नंदनी को अक्टूबर 2001 को हैदराबाद से लाया गया। इसकी मौत वर्ष 2024 में आंतों की बीमारी से हो गई। शेरनी चित्रा , गौरी व शेर नागेश को फरवरी 2003 को हैदराबाद से लाया गया।
- चित्रा की मौत सितंबर 2009 में हृदयगति रुकने से हुई।, नागेश की मौत अक्टूबर 2010 में गुर्दे की खराबी से हो गई। गौरी की मौत वर्ष 2010 में आंतों की बीमारी से हुई।
- हैदराबाद से अप्रैल 2013 में लाए गए शेर विष्णु व शेरनी लक्ष्मी को लायन सफारी भेज दिया गया। वर्ष 2016 में रायपुर के नंदनवन से शेर अजय व शेरनी नंदिनी को लाया गया। इस महीने जून में अजय की मौत हो गई। चिड़ियाघर में वर्ष 2016 के बाद किसी शेर या शेरनी को नहीं लाया गया है। यहां शावकों का जन्म भी नहीं हुआ है।
चिड़ियाघर में शेरों की वंश वृद्धि बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे है। इसके तहत इंदौर के चिड़ियाघर से यहां शेरनी को लाने की कवायद चल रही है। शेरनी के बदले यहां से दरियाई घोड़े को भेजा जा जाएगा। शेरनी के आने के बाद उसका जोड़ा शेर शंकर के साथ बनाया जाएगा।
-डा.कन्हैया पटेल, चिड़ियाघर निदेशक
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