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    ये हैं UP Roadways, यात्रियों से अभद्रता की सजा सिर्फ चेतावनी, नशे में चालक चलाते बस, नहीं होता कड़ा एक्शन

    Updated: Tue, 28 Jul 2026 10:09 PM (IST)

    रोडवेज बसों में चालक-परिचालकों द्वारा यात्रियों से अभद्रता, किराया लेकर टिकट न देना और नशे में बस चलाने की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। अधिकारियों द्व ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. चालक-परिचालकों द्वारा यात्रियों से लगातार अभद्रता की शिकायतें।

    2. किराया लेकर टिकट न देना और नशे में बस चलाना।

    3. अधिकारियों द्वारा शिकायतों पर केवल चेतावनी देकर निस्तारण।

    जागरण संवाददाता, कानपुर। उप्र राज्य सड़क परिवहन निगम के अधिकारियों की अनदेखी से यात्रियों के बीच रोडवेज बसों में चालक-परिचालक के व्यवहार को लेकर शिकायतों का दौर थम नहीं रहा है। वहीं, इनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई के अभाव में यात्रियों की समस्याएं बढ़ रही हैं। अधिकांश शिकायतें चालक-परिचालकों के यात्रियों से अभद्रता करने की ही आ रही हैं।

    किराया लेकर भी टिकट न देने और नशे में बस चलाने की भी शिकायतें हैं। ये शिकायतें आइजीआरएस पोर्टल से लेकर परिवहन निगम के हेल्पलाइन नंबर तक में दर्ज हो रही हैं। यात्री समस्याओं को गंभीरता से न लेकर अधिकारी केवल चालक-परिचालक को चेतावनी देकर ही मामले को निस्तारित कर रहे हैं।

    रोडवेज बसों पर अक्सर परिचालक यात्रियों को किराया में शेष बचे रुपये लौटाने में दिक्कत करते हैं। पैसे खुल्ले न होने की बात कहकर रुपये लौटाने में समस्या उत्पन्न करते हैं और यात्रियों पर ही रौब दिखाने लगते हैं। रोडवेज बसों में ये आम समस्या है।

    झकरकटी बस अड्डे पर मिले यात्रियों ने बताया कि परिचालक अक्सर यात्रियों से अभद्रता करते हैं। गंतव्य स्थल पर न रोककर बस को अपने हिसाब से रोकते हैं। यात्री के बस से उतरने के दौरान चालक-परिचालक इतनी जल्दी में होते हैं कि चार-पांच किमी से पहले से ही सीट से उठाकर बस के गेट पर खड़ा कर देते हैं।

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    यात्रियों की शिकायतों का हवा-हवाई निस्तारण

    केस-एक

    बरेली की एक युवती ने बस (यूपी-78-एफटी-7085) के परिचालक पर यात्रा के दौरान अभद्रता करने का आरोप लगाया है। इस मामले में उसने आइजीआरएस पोर्टल पर शिकायत भी की। घटना 12 जून की बताई है। प्रकरण में एआरएम ने परिचालक प्रेमचंद्र को भविष्य के लिए सख्त चेतावनी देकर समस्या निस्तारित कर दी है।

    केस-दो

    कानपुर देहात के रसूलाबाद निवासी हरी शंकर ने आइजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की है। कहा है कि वह बस (यूपी-78-एएन-2360) में याकूबपुर से रसूलाबाद के लिए बैठे थे। महिला परिचालक ने किराया ले लिया, पर टिकट नहीं दिया। कई बार मांगा तो गुस्सा जाहिर करने लगी। विकास नगर डिपो के एआरएम ने 25 जुलाई को नियमित परिचालक कृतिका को चेतावनी देकर कार्रवाई खत्म कर दी है।

    केस-तीन

    चमनगंज के जावेद अख्तर ने आइजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की है। कहा है कि 23 जून को वह विकासनगर डिपो की बस (यूपी-78-एचटी-4645) से कानपुर आ रहे थे। परिचालक ने बगैर बताए रावतपुर टिकट काट दिया। उन्होंने किराये के 250 रुपये दिए, परिचालक ने उन्हें एक रुपया लौटाया नहीं। अन्य यात्रियों को भी उनके शेष रुपये नहीं लौटाए। रावतपुर में सभी यात्रियों को उतार दिया। चालक ने बस कानपुर न जाने की बात भी यात्रियों को नहीं बताई थी। इससे उनके साथ अन्य यात्रियों को भी दिक्कत हुई। इसमें एआरएम ने परिचालक राहुल कुमार की लापरवाही मानी, सचेत कर कार्रवाई खत्म कर दी।

    केस-चार

    मैनपुरी के विनोद कुमार आठ मई को बस (यूपी-78-जेटी-8335) से सौरिख से आनंदविहार जा रहे थे। उन्होंने बस चालक के विरुद्ध नशा करके बस चलाने और अभद्रता करने की शिकायत परिवहन निगम के हेल्पलाइन पोर्टल पर की थी। 23 जुलाई को एआरएम ने चालक संजय दुबे व परिचालक इंद्रभान सिंह को कड़ी चेतावनी देकर मामले को खत्म कर दिया है।


    यात्री शिकायतों में संबंधित चालक-परिचालक से स्पष्टीकरएण लेते हैं। चूंकि, इनके जवाब के बाद सही क्या है, इसे बताने के लिए पीड़ित दोबारा संपर्क में नहीं आता है। इसलिए चालक-परिचालक को चेतावनी देकर या कोई बड़ी गंभीर शिकायत है तो मानदेय में 200-300 रुपये कटौती की कार्रवाई करते हैं। कई झूठी शिकायतें भी आती हैं। बसों की छत टपक रही है तो इसकी भी शिकायतें आती हैं तो फोरमैन से जवाब लेते हैं।
    - कपिल देव, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक-विकासनगर डिपो

     

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