Teachers Day: राज्य पुरस्कार से सम्मानित ये गुरुजन, किसी ने नवाचार को किसी ने मुश्किल हालात से जूझकर संवारा बच्चों का भविष्य
शिक्षक दिवस पर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के उन शिक्षकों को राज्य पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने नवाचारों ...और पढ़ें

HighLights
शिक्षकों को राज्य पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा
नवाचारों और प्रयासों से ग्रामीण बच्चों की शिक्षा सुधारी
मुश्किल परिस्थितियों में भी शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाई
जागरण टीम, कानपुर। शिक्षक दिवस पर आज उन भविष्य निर्माता यानी शिक्षकों को राज्य पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने मुश्किल परिस्थितयों से जुझकर भी हार नहीं मानी। परिषदीय स्कूलों में कम होती बच्चों की संख्या बड़ी चुनौती थी। ऐसे में इन शिक्षकों ने नवाचार के जरिये पढ़ाई के प्रति ग्रामीण बच्चों को जागरूक किया। साथ ही उनके अभिभावकों को भी अपने-अपने बच्चों को विद्यालय भेजने को प्रेरित किया। उनके इस कठिन तप की चहुंओर सराहना हुई और उन्हें राज्य पुरस्कार के लिए चयनित किया गया। ऐसे शिक्षकों की उपलब्धियों पर प्रस्तुत रिपोर्ट...
कानपुर: डा. कामायनी शर्मा ने 26 नवाचार तकनीक अपनाई, 294 बच्चों में शिक्षा के प्रति रुचि जगाई
ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों में शिक्षा की प्रति अलख जगाने का संकल्प लिए सरकारी स्कूल की शिक्षिका डा. कामायनी शर्मा ने शहर से दूर ककवन ब्लाक के औरोंताहरपुर गांव के पीएम श्री संविलियन विद्यालय का चयन किया। पिछले करीब आठ वर्षों से अपने अथक प्रयासों से बच्चों में शिक्षा की अलख जगाने के लिए एक के बाद एक कई नवाचार किए। अब तक 26 से ज्यादा किए गए नवाचार के दम पर उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि जगाई। परिणामत: अब स्कूल में 294 से ज्यादा बच्चे अध्ययनरत हैं। सहायक अध्यापक डा. कामायनी शर्मा ने पुरस्कार के लिए चयन होने का श्रेय राज्य सरकार, विभागीय योजनाओं, स्टाफ सदस्यों व स्वजनों को दिया है। पांच सितंबर को लखनऊ में शिक्षक दिवस पर होने वाले राज्यस्तरीय सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा उन्हें सम्मानित किया जाएगा।

महोबा: ओमप्रकाश तिवारी ने नवाचार से विद्यालय को बनाया माडल
ब्लाक कबरई के कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय कंपोजिट बिलखी के सहायक अध्यापक ओमप्रकाश तिवारी को राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। वह 2008 में विशिष्ट बीटीसी में चयन के बाद प्राथमिक विद्यालय मौहारी जैतपुर में सहायक अध्यापक बने। यहां स्कूल चलो अभियान, नुक्कड़ नाटक के जरिए शत-प्रतिशत नामांकन और उपस्थिति सुनिश्चित कर इसे माडल विद्यालय बनाया। 2015 में पदोन्नति पर प्राथमिक विद्यालय रहेलिया, कबरई में प्रधानाध्यापक बने। 10 साल दो माह में विद्यालय को निपुण विद्यालय बनाया।

कन्नौज: सुमनलता ने शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार कर विद्यालय में बढ़ाई विद्यार्थियों की संख्या
राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित कुंअरपुर बनवारी के प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका सुमनलता यादव 22 अगस्त 2009 को जब ग्राम कुंअरपुर बनवारी के प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापिका बनीं, तब विद्यालय में नामांकित छात्र-छात्राओं की संख्या सिर्फ 79 थी। सुमनलता ने शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, भौतिक परिवेश बदलने के प्रयास शुरू किए। उनके प्रयासों से प्राथमिक विद्यालय कुंअरपुर बनवारी में छात्र-छात्राओं की संख्या अब 357 तक पहुंच गई है। उनकी सेवाओं व शिक्षा के प्रति योगदान पर उन्हें वर्ष 2013 में लोकमणि लाल पुरस्कार, 2015 में रानी लक्ष्मीबाई वीरता पुरस्कार और वर्ष 2025 में कन्नौज रत्न पुरस्कार मिला।

इटावा: वीरेंद्र सिंह ने ड्राप आउट छात्राओं को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ा
राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित वीरेंद्र सिंह बालिका शिक्षा को नई दिशा देने और शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार करने के लिए जाने जाते हैं। पिछले 25 वर्षों से स्कूल से ड्राप आउट हुई छात्राओं को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने में वह जुटे हैं। उनके इस प्रयास से 100 से अधिक बालिकाओं का भविष्य संवर सका है। उनके इन उत्कृष्ट और अनुकरणीय कार्यों के लिए पूर्व में भी कई बार सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने विद्यालय के भौतिक व शैक्षिक परिवेश को माडल रूप दिया। गणित जैसे विषयों को रोचक बनाने के लिए प्रायोगिक शिक्षण व्यवस्था को लागू किया।

उन्नाव: प्रीति ने बालिका शिक्षा एवं स्वास्थ्य के लिए किए विशेष कार्य
शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित हसनगंज तहसील क्षेत्र के नेवलगंज उच्च प्राथमिक विद्यालय में तैनात सहायक शिक्षिका प्रीति भारती ने नौनिहालों के शैक्षिक उत्थान के लिए अथक प्रयास किया। पर्यावरण संरक्षण, नो यूज़ प्लास्टिक एंड रिसाइकल प्लास्टिक, पराली प्रबंधन, तथा खासकर बालिका शिक्षा एवं स्वास्थ्य के लिए विशेष कार्य किए। बालिकाओं के लिए कैंसर फ्री इंडिया के तहत सर्वाइकल कैंसर बचाव हेतु विशेष अभियान चलाया। यह अभियान विद्यालय स्तर पर ही नहीं ब्लाक स्तर पर भी चलाया जा रहा है। उनके विद्यालय के बच्चों का चयन मानक इंस्पायर अवार्ड तथा राष्ट्रीय आधारित योग्यता के लिए भी हुआ।

हमीरपुर: नीतिराज सिंह ने नवाचार को बढ़ावा देने के साथ शिक्षा की गुणवत्ता में किया सुधार
विकासखंड सुमेरपुर के चुनकी डेरा स्थित प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक नीतिराज सिंह यादव का राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए नाम चयनित हुआ है। जिन्हें आगामी पांच सितंबर को शिक्षक दिवस में सम्मानित किया जाएगा। स्कूल की खूबियों, नवाचार व शैक्षिक गुणवत्ता के आधार पर उनका शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन हुआ है।

चित्रकूट: हरीशंकर ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए नवाचार को दिया बढ़ाव
मानिकपुर के दूरस्थ क्षेत्र में स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय गड़चपा के प्रधानाध्यापक हरीशंकर त्रिपाठी को शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान, नवाचार और बच्चों के प्रति समर्पण के लिए राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए चुना गया है। खास बात यह है कि जिस विद्यालय को संसाधनों और भौगोलिक परिस्थितियों की चुनौती के बीच बेहतर बनाने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी, वही आज स्वच्छता, हरियाली और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पहचान बना है। हरीशंकर त्रिपाठी के प्रयासों से विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति और शैक्षिक वातावरण में सुधार हुआ। जून 2026 में स्वच्छ एवं हरित विद्यालय में गड़चपा को देश में 27 वां और प्रदेश में तीसरा स्थान मिला।

कानपुर देहात: प्रधानाध्यापक विनीत ने स्मार्ट कक्षाओं से बदली पढ़ाई की तस्वीर
शिक्षा को केवल किताबों तक सीमित न रखकर नवाचार और गतिविधि आधारित शिक्षण को अपनाने वाले अंता गांव स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक विनीत कुमार मिश्र का चयन राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए हुआ है। विद्यार्थियों के शैक्षिक विकास, नामांकन बढ़ाने, नियमित उपस्थिति और शिक्षण को रुचिकर बनाने के लिए किए गए उनके प्रयासों को सराहा गया है। मूल रूप से कानपुर नगर जिले के शिवराजपुर गंगा रोड टाउन एरिया निवासी विनीत कुमार मिश्र ने शिक्षण की पारंपरिक पद्धति से अलग बच्चों को स्मार्ट कक्षा में प्रयोगों के माध्यम से सीखने का अवसर दिया। कठिन विषयों को सरल तरीके से समझाने के लिए तकनीकी का प्रयोग किया।

फर्रुखाबाद: गीता ने खेल-खेल में बच्चों को सिखाई गणित, पेंटिंग के लिए किया प्रेरित
कंपोजिट विद्यालय अमानाबाद में वर्ष 2018 से कार्यरत शिक्षिका गीता वर्मा ने खेल-खेल में कदमों को गिनकर बच्चों को गणित सिखाई। विद्यालय न आने वाले बच्चों को घरों के आसपास शिक्षण संबंधी पेंटिंग कराकर पढ़ने के लिए प्रेरित किया। इसके साथ ही डिजिटल माध्यमों को भी शिक्षण का जरिया बनाया। उनकी कक्षा में 98 से 100 प्रतिशत तक उपस्थिति रहती है। नवाचार कर प्रकृति एवं गतिविधियों से जोड़कर शिक्षण कार्य कराने वाली गीता को राज्य पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। उन्होंने वाट्सएप ग्रुप एवं यूट्यूब के माध्यम से भी बच्चों को पढ़ाया।
