कानपुर में अधिवक्ताओं का बड़ा ऐलान, राष्ट्रीय लोक अदालत का बहिष्कार, रजिस्ट्री दफ्तर में बंद कराया काम
कानपुर में बार और लायर्स एसोसिएशन ने राष्ट्रीय लोक अदालत के बहिष्कार की घोषणा की है। अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट और ...और पढ़ें

प्रदेश स्तरीय सम्मेलन में शामिल अधिवक्ता। जागरण
HighLights
कानपुर में बार और लायर्स एसोसिएशन का दो दिवसीय सम्मेलन शुरू।
अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य से विरत रहने से अदालतों में सन्नाटा।
रजिस्ट्री दफ्तरों में काम बंद, वादकारी और आम लोग परेशान।
जागरण संवाददाता, कानपुर। बार और लायर्स एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में बार एसोसिएशन परिसर में दो दिवसीय प्रदेश स्तरीय सम्मेलन हुआ। सम्मेलन के आखिरी दिन शुक्रवार को मांगें पूरी न होने तक हर बुधवार को न्यायिक कार्य से विरत रहने का प्रस्ताव आम सहमति से पास कर दिया गया।
शनिवार को होने वाली लोक अदालत के बहिष्कार का फैसला भी लिया है। 58 जिलों के अधिवक्ता संगठनों के पदाधिकारियों ने पश्चिमी जिलों के लिए मेरठ में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना और गोरखपुर बार एसोसिएशन के दिवंगत अधिवक्ताओं को मुआवजे की मांग के प्रस्ताव पर भी सहमति जताई। दूसरे दिन भी अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य से विरत रहने के कारण वादकारी अपने मुकदमों में तारीख लेकर लौट गए। रजिस्ट्री दफ्तर में भी काम बंद कराए जाने से रजिस्ट्रियां नहीं हो सकीं।

शुक्रवार सुबह सम्मेलन का उद्धाटन बार एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेंद्र अवस्थी, महामंत्री बिनय मिश्रा, लायर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश चंद्र वर्मा व महामंत्री राजीव यादव ने किया। सम्मेलन में अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट और वरिष्ठ अधिवक्ताओं को पेंशन की मांग, वकीलों के मुकदमे गैर जनपद ट्रांसफर करने के फैसले और हड़ताल की अंडरटेकिंग न देने समेत अन्य मुद्दों पर आम सहमति से प्रस्ताव रखे गए।

दूसरे सत्र में मांगें पूरी न होने तक प्रदेश भर में हर बुधवार को अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य से विरहत रहने और शनिवार को आयोजित लोक अदालत का बहिष्कार का प्रस्ताव रखा तो सभी ने ध्वनिमत से दोनों प्रस्ताव पास कर दिए।
रुरल बार एसोसिएशन के राष्ट्रीय अघ्यक्ष ज्ञान प्रकाश शुक्ल ने कहा कि अधिवक्ताओं के हित में कानपुर से आंदोलन की शुरुआत हो चुकी है। अब इसे पूरे प्रदेश में करना है। बार एसोसिएशन महामंत्री और लायर्स एसोसिएशन महामंत्री ने बताया कि सभी की सहमति से प्रस्ताव पास हो गए हैं। अब अधिवक्ता संगठनों को अपने जिलों में इस प्रस्तावों पर कानपुर की तरह अमल कराना है।
सम्मेलन में गोरखपुर, गाजीपुर, संत कबीर नगर, हरदोई, आजमगढ़, रामपुर, बिल्हौर, लालगंज, प्रतापगढ़, कानपुर देहात, महोबा, प्रयागराज, डेरापुर, कौशांबी, हरदोई, रायबरेली, गाजियाबाद, हापुड़, इटावा, उन्नाव समेत 58 जिलों के अधिवक्ता संगठनों के पदाधिकारियों ने भाग लिया। शुक्रवार को रायबरेली से 26 अधिवक्ता सम्मेलन में शामिल हुए।
यह मांगें उठाई गईं
- भारतीय विधिज्ञ परिषद द्वारा एडवोकेट एक्ट 1961 में प्रस्तावित संशोधन पर देश के सभी जनपदीय अधिवक्ता संघों का परामर्श व उनके सुझाव शामिल किए जाएं
- भ्रष्टाचार में संलिप्त प्रशासनिक अधिकारियों व न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ जांच के लिए शिकायती फोरम का गठन किया जाए।
- किरायेदारी के मुकदमों की सुनवाई का क्षेत्राधिकार सिविल न्यायालयों को दिए जाने की सिफारिश को तत्काल लागू कराया जाए।
- दंड प्रक्रिया संहिता के तहत पुलिस प्रशासन को दिए गए न्यायिक क्षेत्राधिकार को वापस लेकर पुन: न्यायिक मजिस्ट्रेटों की अदालतों को दिया जाए।
- प्रदेश के अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए अधिवक्ता कल्याण निधि की धनराशि पांच लाख से बढ़ाकर 25 लाख की जाए।
- नए अधिवक्ताओं को पांच वर्ष तक भत्ता दिया जाए।
- न्यायालय भवनों और अधिवक्ता चेंबरों के साथ बजटीय प्रविधान किया जाए।
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