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    मोबाइल एडिक्शन अलर्ट: जानिए शरीर और दिमाग पर कितना खतरनाक असर, कानपुर विशेषज्ञ की चेतावनी 

    Updated: Sat, 21 Feb 2026 06:36 PM (IST)

    प्रो. धनंजय चौधरी ने मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि ...और पढ़ें

    दैनिक जागरण के हेलो डाक्टर में पाठकों के सवालों का जवाब देते जीएसवीएम मेडिकल कालेज के मनोरोग विभागाध्यक्ष प्रो. धनंजय चौधरी। जागरण

    दैनिक जागरण के हेलो डाक्टर में पाठकों के सवालों का जवाब देते जीएसवीएम मेडिकल कालेज के मनोरोग विभागाध्यक्ष प्रो. धनंजय चौधरी। जागरण

    HighLights

    1. मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से मानसिक दोष और डिप्रेशन बढ़ रहा है।

    2. बच्चों की सोच, खान-पान और शारीरिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित।

    3. आउटडोर गतिविधियों और विशेषज्ञ सलाह से लत पर काबू पाएं।

    जागरण संवाददाता, कानपुर। मोबाइल का अधिक प्रयोग करने और उसमें परोसे जा रहे कंटेंट के कारण बच्चों से लेकर युवा और बुजुर्ग अपनों से दूर हो रहे हैं। मोबाइल में अधिक समय तक बेवजह व्यस्त रहने वालों में मानसिक दोष के साथ अधूरी नींद, खराब गट हेल्थ, डिप्रेशन और आत्महत्या जैसी समस्याएं मिल रही है। एलएलआर अस्पताल के मनोरोग विभाग की ओपीडी में आत्महत्या के ख्याल के साथ ही कई तरह के मानसिक दोष वाले मरीज हर दिन पहुंच रहे हैं।

    10 से लेकर 40 आयुवर्ग तक के लोगों में मानसिक तनाव और मोबाइल के अधिक प्रयोग के कारण चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं मिल रही है। यह बातें दैनिक जागरण के हेलो डाक्टर में जीएसवीएम मेडिकल कालेज के मनोरोग विभागाध्यक्ष प्रो. धनंजय चौधरी ने पाठकों के सवालों का उत्तर देते हुए कही। पेश है बातचीत के मुख्य अंश...

     

    • मोबाइल का प्रयोग कितने समय तक करना ठीक रहेगा? - वेद प्रकाश गुप्ता, बारासिरोही।
    • कम से कम जितना हो सके। मोबाइल का प्रयोग कम करें। लगातार मोबाइल देखने से बचें। खासतौर पर रात में सोने से पहले मोबाइल की लत से बचें। यह अनिद्रा, तनाव और मूड डिआर्डर का कारण बनती है। इस कारण रात में नींद खराब होती है। इससे पाचन तंत्र खराब होता है।

     

    • क्या मोबाइल का प्रयोग बच्चों की मानसिकता को बदल रहा है? - भुवन जोशी, बर्रा। जय प्रकाश तिवारी, बर्रा एक। सतीश, जाजमऊ।
    • जी, हां, मोबाइल का अधिक प्रयोग बच्चों को चिड़चिड़ा बना रहा है। स्क्रीन टाइम अधिक होने से बच्चों के सोचने की क्षमता प्रभावित हो रही है। इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो रहा कंटेंट बच्चों की मानसिकता को बदल रहा है। बच्चों में मोबाइल के कारण उनका खान-पान, नींद और शारीरिक गतिविधियों बाधित हो रही है। बच्चों में अधिक मोबाइल प्रयोग से आंख, दिमाग और शरीर के अन्य अंगों को भी नुकसान हो रहा है। खासतौर पर युवा डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। जो आत्महत्या की ओर ले जा रहा है।

     

    खबरें और भी

    • बच्चों में मोबाइल की लत को कैसे दूर करें। बचाव के लिए क्या करें? - प्रदीप कुमार दिवाकर, बिठूर।
    • जितना हो बच्चों को आउटडोर गतिविधियों कराएं। मोबाइल में आनलाइन माध्यम से पढ़ाई के समय की सीमा निर्धारित करें। जितनी देर पढ़ाई करें उस समय नजर रखें। रात के समय मोबाइल बच्चों को कतई नहीं दें। अगर बच्चों में चिड़चिड़ापन आ रहा और गुस्सा बढ़ रहा है तो एक बार एलएलआर अस्पताल के मनोरोग विभाग की ओपीडी में जरूर दिखाएं।

     

    • मोबाइल अब जानलेवा लत बन गई है। बच्चों से लेकर युवा और बुजुर्ग तक इसके शिकार है। बचाव के लिए क्या करें? - जय प्रकाश साहू, आजाद नगर।
    • बिल्कुल मोबाइल का अधिक प्रयोग जानलेवा बन रहा है। इसलिए हम सबकी जिम्मेदारी है कि बच्चों को मोबाइल के दुरुपयोग बताएं। बच्चों को रोने पर मोबाइल थमाने की आदत से बचें। बच्चों को शाम को खेलने के लिए घर के पास बने पार्क में भेजें। युवा रात में मोबाइल से दूर रहें और बुजुर्ग में अकेलापन का कारण मोबाइल बन रहा है। ऐसे मामलों में वृद्धि तेजी से हो रही है। जो मनोरोगी बना रही है।

     

    • चार साल की बच्ची है, बिना मोबाइल देखे नहीं सोती है। बोलने में कार्टून कैरेक्टर की तरह बोलती है। क्या करें? - अपूर्वा अग्रवाल, जरौली।
    • बाल मन में अधिक मोबाइल के प्रयोग करने से इस प्रकार के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। मोबाइल के कारण बच्चों के मन में गहरा प्रभाव पड़ रहा है। अगर बच्चा कार्टून कैरेक्टर की तरह बोल रहा है तो सतर्क हो जाएं। मोबाइल पर प्रसारित हो रहे इंटरनेट कंटेंट से बच्चों की मानसिकता बदल रही है। जो व्यवहार को बदल रही है।

     

    • प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा हूं, रिजल्ट ठीक नहीं आने से डिप्रेशन बढ़ रहा है। इससे कैसे बचाव करें? - आलोक, गोविंद नगर।
    • निश्चित ही मेहनत के बाद बेहतर परिणाम सामने नहीं आने से नकारात्मक विचार आते हैं। इससे घबराएं नहीं, पर्याप्त नींद लें। लोगों से हंसकर मिलें। योग और प्राणायाम के साथ ध्यान जरूर करें। ध्यान करने से मन को शांति मिलती है और मन शांत रहता है। शरीर के हैप्पी हार्मोंस से तनाव खत्म हो जाएगा। आपके थोड़े से प्रयास से शरीर हार्मोनल रूप से बेहतर रहेगा और आप तनाव और डिप्रेशन से बचें रहेंगे।

     

    • मोबाइल का प्रयोग किस प्रकार हानिकारक है। इसके लक्षणों की पहचान कैसे करें? - सुनील, किदवई नगर।
    • मोबाइल स्क्रीन का अधिक प्रयोग आंख, दिमाग और गट हेल्थ को बुरी तरह से प्रभावित करता है। बचाव के लिए बच्चों को मोबाइल देने का समय निर्धारित करें। लगातार बच्चों को मोबाइल प्रयोग करने से बचाएं। मोबाइल पर रील्स देखने से मना करें। बच्चों से संवाद करें, दोस्ताना व्यवहार करें। ताकि बच्चा मोबाइल को दोस्त न बनाएं अभिभावक को अपना दोस्त बनाएं। जब बच्चा थोड़ी-थोड़ी बात पर गुस्सा होने लगते तो आप सतर्क हो जाएं। बच्चों में अकेलापन खतरनाक लक्षण हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में मनोरोग विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।



    • बच्चों और युवाओं को मोबाइल से कैसे दूर करें? - राजेश कुमार, कल्याणपुर।
    • अगर आपके समझाने से बच्चा नहीं मान रहा है तो एक बार एलएलआर के मनोरोग विभाग में दिखा लें। यहां पर विशेष प्रकार की थेरेपी की मदद से बच्चों की सोच को बदला जा रहा है। कार्निटिव थेरेपी देकर बच्चों और युवाओं की सोच को बदला जा सकता है। यह सुविधा सरकारी अस्पताल में उपलब्ध है। एक बार आप मनोरोग विभाग में दिखा लें।


    इन्होंने किए प्रश्न

    प्राची गुप्ता, नर्वल। शशि गुप्ता, रावतपुर। शशि कला, दीनदयाल नगर। अश्विनी, रातवपुर। अंकिता शुक्ला, पतारा। श्याम चंद्र पांडेय, गुजैनी। पूजा कुशवाहा, सर्वोदय नगर। पदम मोहन मिश्रा।

    हो रहा ये नुकसान

    • बच्चों में मोटापा बढ़ रहा है।
    • खान-पान स्तर बिगड़ रहा।
    • नींद और दिनचर्या बुरी तरह से प्रभावित हो रही।
    • चिड़चिड़ापन और तनाव के शिकार हुए।
    • शारीरिक रूप से बच्चों में शिथिलता आ रही है।


    इन बातों का रखें ख्याल

    • सात से आठ घंटों की नींद लें।
    • खाने में हेल्दी फूड का प्रयोग करें।
    • अधिक तेल और मसालेदार खाने से बचें।
    • जितना हो कम से कम मोबाइल का प्रयोग करें।
    • जरूरत पड़ने पर ही मोबाइल देखें।
    • हर समय मोबाइल हाथ में लेने की आदत से बचें।
    • सोते समय मोबाइल को बिस्तर से दूर रखें।
    • नियमित शारीरिक वर्क, योग, प्राणायाम और ध्यान करें।
    • चाय और काफी का अधिक प्रयोग करने से बचें।