कानपुर चिड़ियाघर में 3 काले हिरणों की मौत, एक बाड़े में हैं 87 हिरण, दूसरों में भी संक्रमण फैलने की आशंका
कानपुर चिड़ियाघर में तीन काले हिरणों की मौत हो गई है, जिसका कारण पेट में कृमि संक्रमण माना जा रहा ...और पढ़ें
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HighLights
कानपुर चिड़ियाघर में दो काले हिरणों की दुखद मौत हुई
पेट में कृमि संक्रमण को मौत का मुख्य कारण माना गया
बिसरा आइवीआरआइ बरेली जांच के लिए भेजा गया है
जागरण संवाददाता, कानपुर। चिड़ियाघर में दुर्लभ प्रजाति के तीन काले हिरणों की मौत हो गई। दो की मृत्यु सोमवार को हुई, जबकि एक मंगलवार को अपने बाड़े में मृत पाया गया। हिरणों की मौत होने से चिड़ियाघर में अफरा-तफरी का माहौल है। मौत का कारण पेट में कृमि संक्रमण को कारण माना जा रहा है। एक ही बाड़े में 87 काले हिरण रखे गए हैं।
दो हिरणों की मौत के बाद बाड़े के अन्य हिरणों पर भी संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है। फिलहाल मंगलवार को मृत पाए गए काले हिरण की मौत का स्पष्ट कारण पता लाने के लिए चिड़ियाघर प्रशासन ने उसके शव को जांच के लिए बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आइवीआरआइ), भेजा है। इससे पहले दो हिरणों के शरीर के नमूने बरेली भेजे गए थे। चिड़ियाघर के निदेशक डा. कन्हैया पटेल ने बताया कि बरेली से रिपोर्ट आने के बाद मौत का कारण स्पष्ट हो सकेगा।
संकटग्रस्त प्रजाति में आते हैं काले हिरण
काले हिरण वन जीव संरक्षण अधिनियम की सूची एक में आते हैं। उनको संकटग्रस्त प्रजाति की श्रेणी में रखा गया है। चिड़ियाघर में काले हिरणों की संख्या 87 है। पांच वर्ष पहले यहां इनकी संख्या 40 थी। काले हिरण अपनी खूबसूरती, घुमावदार सींग के कारण आकर्षण का केंद्र रहे है। चिड़ियाघर में हो रही काले हिरणों की मौत से उनके देखभाल व स्वास्थ्य को लेकर किए जा रहे प्रयासों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पिछले महीने जांच में पेट में मिले थे कृमि
पिछले महीने हुई जांच में हिरणों के पेट में कृमि पाए गए थे। उनको दवाएं दी गई थीं। इस बीच वर्षा के दौरान हिरणों को कृमि संक्रमण हो गया। शरीर कमजोर होने के कारण हिरण बाड़े में गिर गए। वन्यजीव चिकित्सकों ने जांच कर उनका इलाज शुरू किया। इलाज से कुछ सुधार हुआ, लेकिन वे पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो पाए।
सोमवार को पहले मादा काले हिरण की मौत हुई, इसके बाद नर काले हिरण ने भी दम तोड़ दिया। मंगलवार को तीसरे हिरण की मौत हो गई। वन्यजीव चिकित्सकों को हिरणों के स्वास्थ्य पर नजर रखने व नियमित जांच के निर्देश दिए गए हैं। जू कीपरों से भी हिरणों की गतिविधियों पर नजर रखने को कहा गया है।
