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    Weather Updates: जानें कानपुर में क्यों बदला मौसम और कब तक रहेगा असर? अभी भी आंधी-बारिश और ओलावृष्टि का Alert

    Updated: Sat, 04 Apr 2026 07:08 PM (GMT+05:30)

    कानपुर सहित उत्तर भारत में ईरान से आए दो सक्रिय पश्चिमी विक्षोभों के कारण मौसम में बदलाव आया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. ईरान से आए दो पश्चिमी विक्षोभों ने बदला मौसम।

    2. IMD ने आंधी, बारिश, ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट दिया।

    3. प्री-मानसून गतिविधियों से रबी फसलों को भारी नुकसान।

    जागरण संवाददाता, कानपुर। कानपुर में मौसम में बदलाव ने हर किसी को प्रभावित किया। कानपुर सहित उत्तर भारत में मौसम में परिवर्तन हुआ। इस बदलाव के पीछे मुख्य वजह ईरान की ओर से आने वाले दो सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ हैं, जिन्होंने उत्तर भारत के मौसम तंत्र को पूरी तरह बदल दिया है।

    भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इस स्थिति को गंभीर मानते हुए आरेंज अलर्ट जारी किया है और आने वाले दिनों में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि की संभावना जताई है। मौसम विभाग के अनुसार ये दोनों पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत की सीमाओं में सक्रिय हो चुके हैं, जिसके चलते 4 से 6 अप्रैल के बीच मौसम सबसे ज्यादा अस्थिर बना रहेगा।

    37 किमी प्रति घंटे से पहुंची हवा

    कानपुर में शनिवार सुबह से ही आसमान में बादलों की आवाजाही बढ़ गई थी। दिन के तापमान में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जबकि रात में बादलों के कारण तापमान में हल्की बढ़ोतरी देखी जा सकती थी। वर्तमान में अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 20.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। 37 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हवा पहुंची जो आंधी की स्थिति को और खतरनाक बना दी। हवा की दिशा दक्षिण-पश्चिम बनी हुई है, जो पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव को दर्शाती है।

    तो क्या ये प्री मानसून गतिविधियां

    मौसम विशेषज्ञ डा. एस.एन. सुनील पांडेय का कहना है कि इस समय प्री-मानसून गतिविधियां तेज हो गई हैं, जिसके कारण गरज-चमक के साथ तेज हवाएं और कहीं-कहीं ओलावृष्टि देखने को मिल रही है। यह स्थिति अगले दो से तीन दिनों तक बनी रह सकती है। हालांकि इस दौरान स्थानीय स्तर पर अचानक तेज बारिश या ओले गिरने की घटनाएं हो सकती हैं, जिससे सतर्क रहना जरूरी है।

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    फसल को भारी नुकसान होगा

    मौसम का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ रहा है। अप्रैल की शुरुआत में हुई बेमौसम बारिश, तेज हवाओं और ओलावृष्टि ने रबी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। गेहूं की फसल तेज हवाओं के कारण जमीन पर गिर गई है, जिससे दानों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। सरसों की फलियां झड़ रही हैं और चने की फसल भी खराब हो रही है। इसके अलावा बारिश के कारण कटाई का काम रुक गया है और जो फसल पहले ही काटी जा चुकी है, वह भीगकर खराब हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों को 20 प्रतिशत से अधिक तक नुकसान हो सकता है, जिससे आर्थिक संकट गहराने की आशंका है।

    कब तक रहेगा ऐसा मौसम?

    मौसम विभाग के अनुसार 4 से 6 अप्रैल के बीच इस सिस्टम का असर सबसे ज्यादा देखने को मिलेगा। इस दौरान आसमान में लगातार बादलों की आवाजाही रहेगी और दिन के तापमान में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। मौसम विशेषज्ञ डॉ. एस.एन. सुनील पांडेय के मुताबिक, प्री-मानसून गतिविधियों के चलते तेज हवाएं (15–37 किमी/घंटा) गरज और हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ इलाकों में ओले गिरने की संभावना है।

    लोगों के लिए क्या है सलाह?

    • तेज हवाओं और आंधी के दौरान बाहर निकलने से बचें
    • खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े न हों
    • किसानों को फसल सुरक्षित रखने के लिए जरूरी इंतजाम करने की सलाह
    • मौसम अपडेट पर लगातार नजर रखें