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Kanpur House Collapse: फावड़े से खोदता रहा भतीजा, एक-एक कर निकले अपनों के 4 शव

Published: Sun, 06 Sep 2026 06:18 PM (IST)

कानपुर के हिरनी गांव में एक कच्चा मकान गिरने से पिता मुकेश सिंह और उनकी तीन बेटियों की मौत हो ...और पढ़ें

पिता मुकेश, पल्लवी, नीतू, माया की फाइल फोटो। स्वजन

पिता मुकेश, पल्लवी, नीतू, माया की फाइल फोटो। स्वजन

HighLights

  1. कानपुर के हिरनी गांव में कच्चा मकान गिरने से हादसा।

  2. पिता मुकेश सिंह और तीन बेटियों की दर्दनाक मौत हुई।

  3. देर से पहुंची प्रशासनिक मदद पर ग्रामीणों में रोष।

जागरण संवाददाता, कानपुर। सुबह के करीब 10:15 बजे थे। कानपुर सागर हाईवे से महज डेढ़ किलोमीटर अंदर पतारा ब्लाक का हिरनी गांव रोज की तरह अपनी रफ्तार में था। तभी अचानक एक कच्चे मकान के भरभराकर गिरने की आवाज ने पूरे गांव को दहला दिया। कुछ ही सेकेंड में मिट्टी, सरपत और लकड़ी की धन्नियों से बना 25 साल पुराना मकान मलबे में तब्दील हो गया। उस मलबे के नीचे एक पिता और उसकी चार बेटियां जिंदगी और मौत के बीच फंसी थीं।

चीख-पुकार सुनकर सबसे पहले परिवार और ग्रामीण दौड़े। भतीजा राज सिंह हाथ में फावड़ा लेकर मलबे पर जुट गया। उसके सामने कोई मशीन नहीं थी, कोई प्रशिक्षित बचाव दल नहीं था। बस एक फावड़ा था और मलबे के नीचे दबे अपने चाचा मुकेश सिंह और बहनों को बचाने की बेचैनी। राज मिट्टी हटाता गया और परिवार के लोग उसके साथ हाथों से मलबा खंगालते रहे।

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हैलट में भर्ती बेटी काजल को देखने पहुंचे जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह।

10:50 बजे डायल-112 की टीम पहुंची, लेकिन तब तक ग्रामीणों ने अपने स्तर पर बचाव अभियान शुरू कर दिया था। मलबे में दबे लोगों को एक-एक कर निकाला गया। 11:11 बजे 16 वर्षीय माया को बाहर निकाला गया। इसके तीन मिनट बाद 11:14 बजे सात वर्षीय पल्लवी को निकाला गया। 11:16 बजे पिता मुकेश सिंह (45) को मलबे से बाहर निकाला गया। इसके बाद 11:36 बजे 12 वर्षीय नीतू और आखिर में 11:56 बजे 19 वर्षीय काजल को बाहर निकाला जा सका।

हर बार मलबे से किसी को बाहर निकालते ही उम्मीद जागती, लेकिन पतारा सीएचसी पहुंचने पर एक-एक कर उम्मीद टूटती गई। डाक्टरों ने मुकेश सिंह, माया, नीतू और पल्लवी को मृत घोषित कर दिया। गंभीर घायल काजल को प्राथमिक उपचार के बाद कानपुर जिला अस्पताल रेफर किया गया।

पक्की दीवारों और कच्ची छत की धन्नियों पर टिकी थी जिंदगी

यह मकान करीब 25 साल पुराना था। लकड़ी की धन्नियां लगाकर उनके ऊपर सरपत रखा गया था और फिर मिट्टी से उसे पाटकर छत बनाई गई थी। यही कमजोर ढांचा परिवार का आशियाना था। सुबह मुकेश चारा काटने के बाद बेटियों के साथ ऊपर के कमरे में चाय पीने पहुंचे थे। बेटियां लकड़ी के तख्त पर बैठी थीं। बड़ी बेटी काजल आटा गूथकर खाना बनाने की तैयारी कर रही थी।

चीख-पुकार और धूल का गुबार

किसी को अंदाजा नहीं था कि अगले ही पल यही छत उनके लिए काल बन जाएगी। अचानक कच्ची छत भरभराकर नीचे आ गिरी। मुकेश और चारों बेटियां मलबे में दब गए। जिस घर में कुछ पल पहले चाय की खुशबू थी, वहां देखते ही देखते चीख-पुकार और धूल का गुबार छा गया।

पांच साल पहले मां भी छोड़ गई थी साथ

मुकेश सिंह का परिवार पहले ही एक बड़े दुख से गुजर चुका था। उनकी पत्नी रामप्यारी की करीब पांच वर्ष पहले प्रसव के दौरान मौत हो गई थी। इसके बाद मुकेश ही बेटियों के लिए मां और पिता दोनों बनकर परिवार संभाल रहे थे। मजदूरी, एक बीघा खेती और एक गाय के दूध से परिवार का खर्च चलता था। सीमित आमदनी में बच्चों की परवरिश कर रहे मुकेश के सामने कच्चा मकान ही उनका सहारा था। लेकिन रविवार सुबह उसी मकान ने परिवार की खुशियां छीन लीं।

डेढ़ घंटे बाद पहुंची दमकल, चार घंटे बाद पहुंचे डीसीपी

हादसे के बाद ग्रामीणों में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर नाराजगी भी दिखाई दी। परिजनों का कहना था कि राहत और बचाव के लिए शुरुआत में प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं पहुंची। हादसे के करीब डेढ़ घंटे बाद नरवल और जाजमऊ फायर स्टेशन की गाड़ियां गांव पहुंचीं, लेकिन तब तक ग्रामीण सभी पांच लोगों को मलबे से बाहर निकाल चुके थे।

चार घंटे बाद पहुंचे डीसीपी साउथ

घटना के करीब चार घंटे बाद डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी मौके पर पहुंचे। इससे पहले परिवार के लोग लगातार उच्च अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग करते रहे। सीएचसी में शव रखकर भी ग्रामीणों और स्वजन ने हंगामा किया। उन्होंने कार्रवाई के साथ परिवार को मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की मांग उठाई।

मुख्यालय से 40 किमी दूर हुआ था हादसा

हिरनी गांव कानपुर मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर और कानपुर सागर हाईवे से करीब डेढ़ किलोमीटर अंदर है। हादसे के बाद गांव की गलियों में सन्नाटा है। जिस घर से सुबह चाय की आवाजें आ रही थीं, वहां अब मातम पसरा है। एक फावड़े से शुरू हुआ बचाव अभियान पांच जिंदगियों को बचाने की कोशिश में बदल गया, लेकिन मलबे से निकले चार शवों ने पूरे गांव को भीतर तक हिला दिया।