कानपुर पहुंचीं तापसी पन्नू ने कहा, छोटे शहरों से निकल रहीं कहानियां, नए कलाकारों को मिल रहा मौका
तापसी पन्नू ने कानपुर में जागरण फिल्म फेस्टिवल में शिरकत की और सिनेमा, महिला किरदारों व ओटीटी पर अपने विचार ...और पढ़ें
HighLights
जागरण फिल्म फेस्टिवल में तापसी पन्नू ने की शिरकत
छोटे शहरों से निकल रही हैं बेहतरीन कहानियां और प्रतिभाएं
'थप्पड़' के बाद लड़कियां अन्याय पर सवाल उठा रही हैं
जागरण संवाददाता, कानपुर। बड़े परदे पर गंभीर किरदार और असल जिंदगी में बेबाक अंदाज, यही तापसी पन्नू की पहचान है। शुक्रवार को जागरण फिल्म फेस्टिवल के आगाज पर कानपुर स्थित रेव थ्री में पहुंची बॉलीवुड अभिनेत्री तापसी पन्नू ने संवाद सत्र में सिनेमा, महिला किरदारों और ओटीटी पर बेबाकी से राय रखी।
उन्होंने कहा कि कानपुर आना खास है। मुझे लगता है ऐसे फेस्टिवल की सबसे ज्यादा जरूरत छोटे शहरों में है, क्योंकि कहानियां यहीं से निकलती हैं। थप्पड़ जैसी फिल्म के बाद समाज में बदलाव के बारे में उन्होंने कहा कि बदलाव एक रात में नहीं आता। लेकिन हां, अब लड़कियां सवाल पूछने लगी हैं।

पहले थप्पड़ को प्यार का हिस्सा मान लिया जाता था, अब उसे गलत कहा जा रहा है, यही बड़ी बात है। कभी-कभी हीरो आपको फिल्म में नहीं चाहता, लेकिन मैं हर चुनौती का डटकर सामना करती हूं। फिल्म में काम करते समय कलाकारों को कई तरह के उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने माना कि अब समय बदल चुका है। जिसके अंदर अभिनय प्रतिभा है उन्हें फिल्म में जगह जरूर मिलती है। मुझे ऐसी कहानियां पसंद हैं जहां लड़की सिर्फ हीरो का इंतजार नहीं करती, खुद अपनी लड़ाई लड़ती है। पिंक से लेकर थप्पड़ फिल्म में अभिनय तक यही कोशिश रही।
बेबी से हिंदी में पहचान मिली। आज भी हर फिल्म को पहली फिल्म जैसा मानकर काम करती हूं। वह अपने काम पर विश्वास रखती हैं और हर चुनौती का सामना मजबूती से करती हैं।
