हिमाचल की सैर और 'रहस्यमयी सपना', IIT कानपुर के प्रोफेसर ने कॉमिक बुक के जरिए आसान बनाई क्वांटम मैकेनिक्स
आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर मनोज कुमार हरबोला ने क्वांटम मैकेनिक्स को सरल बनाने के लिए एक कॉमिक बुक तैयार की है, जिसमें ग्राफिक चित्रों और हिमाचल यात्रा ...और पढ़ें

आईआईटी की क्वाटंम मैकेनिक्स पर आधारित कॉमिक बुक का हिस्सा और आईआईटी प्रो. मनोज कुमार हरबाेला
HighLights
प्रो. हरबोला ने क्वांटम मैकेनिक्स पर कॉमिक बुक बनाई।
हिमाचल यात्रा की कहानी से जटिल सिद्धांत समझाए गए।
छात्रों ने कॉमिक से क्वांटम अवधारणाएं आसानी से सीखीं।
जागरण संवाददाता, कानपुर। क्वांटम मैकेनिक्स जैसे अत्यंत जटिल विषय को सहज, सरल और मनोरंजक बनाने के लिए आईआईटी के प्रोफेसर मनोज कुमार हरबोला ने एक अनूठी कॉमिक बुक तैयार की है जिसमें ग्राफिक चित्रों की मदद से दो दोस्तों की हिमाचल प्रदेश की यात्रा का वर्णन किया गया है।
हिमाचल यात्रा और 'रहस्यमयी साझा सपने' पर आधारित कथा की यह पहल उन छात्रों को ध्यान में रखकर बनाई गई है जो भौतिकी के अमूर्त सिद्धांतों और गणितीय समीकरणों को समझने में कठिनाई महसूस करते हैं।
क्वांटम मैकेनिक्स के मूलभूत स्तंभों को इस कामिक बुक में दैनिक जीवन के उदाहरणों और रूपकों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। प्रो. हरबोला द्वारा लिखी पुस्तक को संस्थान की डिजाइन टीम ने ग्राफिक डिजाइन के साथ प्रस्तुत किया है। आईआईटी के दो छात्रों के हिमाचल प्रदेश के मैक्लोडगंज और उसके पास स्थित त्रियुंड पर्यटन स्थल की पृष्ठभूमि पर आधारित एक रोचक कहानी के माध्यम से यह कामिक बुक क्वांटम भौतिकी के मूल सिद्धांतों को प्रस्तुत करती है।
जिसमें क्वांटम एंटैंगलमेंट और वेवफंक्शन समेत अन्य सिद्धांतों को शामिल किया गया है। इसमें समीकरणों के बजाय रोजमर्रा की घटनाओं के माध्यम से क्वांटम सिद्धांतों को समझाया गया है। एक प्रसंग में सूर्योदय के जरिए बताया गया है कि सूर्य से निकलने वाला प्रकाश भी क्वांटम प्रक्रियाओं का परिणाम है।
कथा के मुख्य पात्र दोनों दोस्त अपनी यात्रा के दौरान रात में एक जैसा ही सपना देखते हैं। इसकी वजह दोनों का निरंतर साथ रहते हुए एक जैसा व्यवहार है। प्रो. हरबोला के अनुसार बिना किसी संचार माध्यम के दो दोस्तों द्वारा एक ही सपना देखना यह दर्शाता है कि कैसे दो 'एंटैंगल्ड' कण एक निर्धारित दूरी के बावजूद एक-दूसरे से सीधे जुड़े रहते हैं।
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सपने के अम्यूजमेंट पार्क में पासे और सीढ़ियों का उलटा काम करना क्वांटम दुनिया की अनिश्चितता और नॉन-क्लासिकल व्यवहार का प्रतीक है। इसी तरह से वेवफंक्शन का ढहना भी होता है। जब तक सपना चल रहा था, वह कई संभावनाओं में था लेकिन दोनों दोस्तों की बातचीत और सपने को समझने पर एक निश्चित निष्कर्ष मिलता है।
छात्रों को पढ़ने के लिए दी गई कॉमिक बुक
प्रो. हरबोला ने अपनी एक क्लास में 44 छात्रों को यह बुक 30 मिनट तक पढ़ने के लिए दी और छात्रों से कहा कि पढ़कर बताओ कि इसमें क्वांटम फिजिक्स कहां-कहां है। करीब 30 मिनट तक कॉमिक पढ़ने के बाद छात्रों ने स्वयं कहानी में छिपे क्वांटम सिद्धांतों की पहचान की। इससे आठ से दस ऐसे विषय चुने गए, जिन पर अब कक्षा में विस्तार से चर्चा की जाएगी।
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नाटकों से भी जगा रहे विज्ञान में रुचि
विज्ञान की पढ़ाई को रोचक बनाने के लिए आईआईटी इससे पहले भी कई पहल कर चुका है। वर्ष 2025 में आईआईटी ने सेंटर फॉर एजुकेशनल रिसर्च एंड टीचिंग एक्सीलेंस (सर्टेक्स) की स्थापना की है। जिसका उद्देश्य कक्षा शिक्षण में नवाचार को बढ़ावा देना है।
शैक्षणिक सत्र 2022-23 से आईआईटी की ड्रामेटिक्स सोसायटी हर वर्ष विज्ञानियों और वैज्ञानिक खोजों पर आधारित नाटक प्रस्तुत कर रही है। इनमें परमाणु विज्ञान, एलन टयूरिंग के जीवन और डीएनए पर आधारित प्रस्तुतियां शामिल हैं। इन नाटकों को देखने के लिए हर वर्ष करीब एक हजार लोग परिसर में पहुंचते हैं। नाटय प्रस्तुतियों का लेखन भी प्रो. हरबोला ने किया है।
कामिक का उद्देश्य विज्ञान को आसान बनाना नहीं, बल्कि उसे समझने का तरीका बदलना है। उनका कहना है कि खेल-खेल में सीखने से जिज्ञासा बढ़ती है और यही बेहतर सीखने की सबसे मजबूत नींव होती है।
प्रो. मनोज के हरबोला