इजरायल-ईरान युद्ध का कानपुर के व्यापार पर भी पड़ने लगा असर, अब नए रास्ते से भारत आ रहे जहाज
वैश्विक तनाव के कारण कानपुर के औद्योगिक क्षेत्र पर गहरा असर पड़ा है। कच्चे माल की कीमतें 400-500 डॉलर से बढ़कर 1500 डॉलर प्रति टन हो गई हैं। ...और पढ़ें
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HighLights
कच्चे माल की कीमतें 400-500 से 1500 डॉलर प्रति टन हुईं।
मालवाहक जहाज 10,000 किमी अतिरिक्त सफर कर रहे, आपूर्ति में देरी।
कानपुर की औद्योगिक इकाइयों का उत्पादन 40% तक घटा।
जागरण संवाददाता, कानपुर। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष का कानपुर औद्योगिक क्षेत्र पर भी खासा असर देखने को मिल रहा है। घरेलू वस्तुओं से लेकर अन्य उत्पादों पर महंगाई का कहर टूटने लगा है। कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित होने से उद्योगों पर बन आई है। कच्चे माल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हुई है।
प्रतिटन कच्चे माल की जो कीमतें पहले 400-500 डालर थीं, वह आज बढ़कर 1500 डालर पहुंच गई हैं। वैश्विक तनाव से होर्मुज स्ट्रेट और बाब अल-मंडेब (लाल सागर) में खतरा बढ़ने के बाद से अब मालवाहक जहाज करीब 10 हजार किमी अतिरिक्त लंबा सफर तय कर भारत आ रहे हैं। आपूर्ति आने में 10 से 20 दिन लग रहे हैं।
कानपुर में औद्योगिक इकाइयों की हालत खराब होने की बात उद्योग विभाग के अधिकारी भी स्वीकारने लगे हैं। उपायुक्त उद्योग अंजनीश प्रताप सिंह ने बताया कि जिले में छोटी-बड़ी करीब एक हजार प्लास्टिक इंडस्ट्री हैं, इनकी स्थिति बहुत खराब हो गई है। वजह बताते हैं कि कच्चा माल दो से ढाई-तीन गुणे महंगा हो गया है।
कंटेनर्स सीधे होर्मुज से न होकर अफ्रीका के रास्तों से घूमकर आ रहे हैं। चूंकि, होर्मुज में तनाव के कारण कुछ जहाज अफ्रीका के दक्षिणी सिरे से होकर भारत पहुंच रहे हैं। यह रास्ता काफी दूरी वाला पड़ रहा है। इससे कंटेनर्स के चार्जेज बहुत बढ़ गए हैं।
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उपायुक्त उद्योग ने बताया कि प्रतिटन कच्चे माल का जो चार्ज पहले 400-500 डालर था, वह आज बढ़कर 1500 डालर से भी अधिक तक पहुंच गया है। इससे घरेलू उत्पाद भी प्रभावित होने की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं।
उन्होंने बताया कि जब बिना किसी बाधा के कच्चे माल की सप्लाई निरंतर हो रही थी, उस बीच में उद्यमियाें ने अनुबंध कर आर्डर ले रखे थे और अब कच्चा माल महंगा हो गया है तो उसी पुरानी कीमत पर वह आर्डर पूरे नहीं कर पा रहे हैं। चूंकि, पहले से अनुबंध हैं इसलिए दरों को बढ़ाने के लिए आर्डर संशोधित नहीं कर सकते हैं। ऐसे में वर्तमान में कानपुर क्षेत्र की प्लास्टिक इंडस्ट्री काफी नुकसान में है।
सप्ताह में पांच दिन ही चल पा रही औद्योगिक इकाइयां
उपायुक्त उद्योग ने बताया कि कानपुर क्षेत्र में जितने भी आयात-निर्यात वाले उद्योग हैं, वह सभी वैश्विक तनाव से प्रभावित हो गए हैं। माल परिवहन के चार्ज बहुत महंगे हो गए हैं। उन्होंने बताया कि मालवाहक जहाज अफ्रीकी महाद्धीप पारकर आ रहे हैं।
इन जहाजों को भारत पहुंचने में 10 से 20 दिन लग रहे हैं। उन्होंने बताया कि कच्चे माल के अभाव में ही कानपुर इलाके की औद्योगिक इकाइयों के संचालन का क्रम टूट गया है। उनके संचालन की शिफ्ट कम हो गई हैं। अब सप्ताह में अधिकतम पांच दिन ही इकाइयां चल पा रही हैं।
40 प्रतिशत उत्पादन घटा : उपायुक्त
उपायुक्त उद्योग अंजनीश प्रताप सिंह ने पूछने पर कहा कि औद्योगिक इकाइयों के पास कच्चे माल के अभाव में नए उत्पादों की कमी आने पर उसका बाजार पर क्या असर है, इससे जुड़ा आंकड़ा उनके पास नहीं है। लेकिन, उनके सुनने में आया है कि औद्योगिक इकाइयों में करीब 40 प्रतिशत तक उत्पादन घट गया है।