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    'किसके सहारे जिऊंगी…किससे दुख दर्द कहूंगी' कानपुर में मां-पिता, बहन और भांजे के शव देख बेटी की चीख से फटा लोगों का कलेजा

    By Sunil VermaEdited By: Anurag Shukla
    Updated: Sat, 21 Feb 2026 03:16 PM (IST)

    कानपुर के शिवली में हुए भीषण सड़क हादसे में राजकिशोर अग्निहोत्री, उनकी पत्नी, बेटी और दो वर्षीय नाती की मौत हो गई। मृतकों के शव कल्याणपुर स्थित आवास प ...और पढ़ें

    HighLights

    1. शिवली हादसे में अग्निहोत्री परिवार के चार सदस्यों की मौत।

    2. बेटी दीक्षा ने माता-पिता, बहन, भांजे का शव देखा।

    3. कल्याणपुर आवास पर दीक्षा का विलाप, लोगों की आंखें नम।

    जागरण संवाददाता, (कल्याणपुर) कानपुर। हे भगवान, ये क्या हो गया मेरे माता-पिता का सिर से साया छीन लिया अब किसके सहारे जिऊंगी किससे अपना दुख दर्द कहूंगी। माता-पिता, बहन और भांजे का शव देख बेटी दीक्षा की चीख ने वहां मौजूद हर किसी का कलेजा चीर दिया। हर किसी के आंखों में आंसू आ गए। बेटी चीखते हुए बेसुध हो गई तो लोग चेहरे में पानी के छींटे डालकर उसे होश में लाए। वह बोली मेरा तो पूरा परिवार ही उजड़ गया। आखिर मेरे दो साल के भांजे शिव की क्या गलती थी जो उसे भी छीन लिया।


    शिवली हादसे में दिवंगत 60 वर्षीय राजकिशोर अग्निहोत्री, उनकी 55 वर्षीय पत्नी स्नेहलता अग्निहोत्री, उनकी बेटी 30 वर्षीय हिमांशी व हिमांशी का दो वर्षीय बेटा शिव का शव कल्याणपुर आवास पहुंचा। यहां पर मौजूद राजकिशोर की छोटी बेटी दीक्षा शव देख चीख पड़ी। दीक्षा के घर के बाहर सांत्वना देने वालों की भीड़ जुटी रही। हादसे को लेकर मुहल्ले में चर्चा रही कि परिवार तेरहवीं में गया था लेकिन उन्हें मौत खींच ले गई। 

    शव पहुंचने पर वहां लोगों की काफी भीड़ रही। विधायक नीलिमा कटियार और पूर्व विधायक सतीश निगम भी पहुंचे। वहीं, अंतिम यात्रा शिवराजपुर खेरेश्वर घाट के लिए निकल चुकी है

     

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    हादसे में राजकिशोर के परिवार के लोगों के मौत की खबर सुनकर मुहल्ले वाले शिवली पहुंच गए। हादसे में छोटी बेटी दीक्षा समेत पांच लोग बच गए थे। दीक्षा के चेहरे पर चोटें आई थी जबकि अन्य लोग ज्यादा घायल थे। लोग दीक्षा को लेकर आवास स्थित घर आए। रात को ही घर के बाहर ही दीक्षा बिलख पड़ी लोग उसे संभाल रहे थे लेकिन उसके आंसू नहीं थम रहे थे। वह बार-बार लोगों से माता-पिता को बुलाते हुए उनके पास ले चलने को कह रही थी लोग उसे संभाल रहे थे। लोग उसे दिलासा दे रहे थे लेकिन वह सबकुछ बर्बाद होने की बात कह रही थी। मुहल्ले वाले उस घड़ी को कोस रहे थे जिसमें हादसा हुआ था कोई चालक की लापरवाही बता रहा था तो कोई इसे होनी बता रहा था।

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    इस तरह से हुआ था हादसा

    कानपुर कल्याणपुर के आवास विकास तीन निवासी प्राइवेट कर्मी 60 वर्षीय राजकिशोर अग्निहोत्री अपनी औरैया सहायल निवासी सास के त्रयोदशी संस्कार में शामिल होने गए थे। स्वजन संग वैन बुक कर शुक्रवार दोपहर को पहुंचे। वहां से रात करीब 8.15 बजे सभी वापस लौट रहे थे और वैन को कल्याणपुर का ही राजकुमार चला रहा था। शिवली के बैरी सवाई गांव के पास पहुंचे थे कि सामने से आ रहे वाहन से बचने के प्रयास में वैन चालक राजकुमार ने नियंत्रण खो दिया और सड़क किनारे तालाब में वैन जा गिरी। इससे वैन सवार लोगों में चीखपुकार मच गई, ग्रामीण पहुंचे और सभी पिछला गेट खोलकर निकालना शुरू किया, पुलिस भी आ गई और उनकी मदद कर सभी को निकालकर सीएचसी शिवली भेजा। जहां पर 60 वर्षीय राजकिशोर अग्निहोत्री, उनकी 55 वर्षीय पत्नी स्नेहलता अग्निहोत्री, उनकी बेटी 30 वर्षीय हिमांशी व हिमांशी का दो वर्षीय बेटा शिव की जान चली गई। वहीं परिवारीजन 30 वर्षीय कृतिका, 45 वर्षीय सुधा, हिमांशी की तीन वर्षीय पुत्री वानी, सुधा का चार वर्षीय पुत्र कान्हा व राजकिशोर का 24 वर्षीय पुत्र सुधांशु व चालक राजकुमार बच गए।

    खबरें और भी

    एसपी श्रद्धा नरेंद्र पांडेय ने बताया कि चार की जान गई है बाकियों को सकुशल बचा लिया गया है। चालक नदारद हो गया है उसका पता किया जा रहा।

    Four Family Members Bodies Reach Home in Kanpur (1)

    बच्चों को बचाने के लिए जद्दोजहद करती रहीं हिमांशी

    कार गिरी उससे पहले सभी आपस में बात कर रहे थे, समझ नहीं आया कि क्या हुआ और एकदम लगा कि जोर का झटका लगा और पानी वैन के अंदर भर गया। पीछे बच्चों को लेकर बैठी हिमांशी ने खुद से पहले बच्चों को बचाने का प्रयास किया पर गेट नहीं खुल सका। ग्रामीण आए तो बच्चों को पहले हिमांशी ने आगे किया, इसके बाद उसको निकाला गया अस्पताल सभी को लेकर गए पर हिमांशी व बेटे शिव की सांसें थम चुकी थी, माता पिता भी उनके दम तोड़ चुके थे।

    ग्रामीणों ने बच्चों को शांत कराया

    औरैया से लौट रहे सभी लोग बातचीत कर रहे थे। हिमांशी ने पुत्र व पुत्री को गोद में ले रखा था, राजकिशोर चालक के बगल में बैठे थे। जब कार गिरी तो शोर सुनकर लोग जुटे, रात का समय होने से ग्रामीण उतनी संख्या में नहीं जुट सके। ग्रामीण रामआसरे, शिवम, अशोक ने बताया कि हिमांशी बच्चों को आगे कर रही थी। शीशा तोड़ने का प्रयास किया पर विफल रहे, इसके बाद किसी तरह से गेट को खोल सके तो सभी को निकाला गया। इस बीच चालक सुरक्षित था वह कहीं गायब हो गया। बच्चे बुरी तरह से रो रहे थे ग्रामीणों ने उनको दिलासा दिया और चुप कराया। वानी को पता तक न था कि मां हिमांशी उसका साथ छोड़ चुकी है। वहीं मासूम कान्हा को घायल उसकी मां सुधा बार बार नम आंखों से निहार रही थी।