Chitrakoot Flood: दो राज्यों के बीच फंसी मंदाकिनी, बाढ़ और सूखे से बचाने के लिए केंद्र करे नेतृत्व; एकीकृत चित्रकूट ही विकल्प
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी बाढ़ और दो राज्यों में बंटे होने के कारण संकट में है, जिससे रामघाट पर भी ...और पढ़ें

चित्रकूट के रामघाट पर बाढ़ उतरने के बाद का द़ृश्य, पावन चित्रकूट के लिए हर किसी को मां मंदाकिनी को लेकर भी अपने ह्दय पावन रखने होंगे। धीरज गुप्ता
HighLights
मंदाकिनी नदी बाढ़ और दो राज्यों में बंटे होने से संकटग्रस्त
एकीकृत चित्रकूट ही मंदाकिनी के संरक्षण और विकास का विकल्प
अतिक्रमण हटाकर, जल स्रोतों को जोड़कर नदी को बचाएं
शिवा अवस्थी, चित्रकूट। रामघाट पर आरती की भीड़, मंत्रों की गूंज व भक्तों के चरणों की चहलकदमी सब मिट्टी और कीचड़ में दफन हो चुके हैं। बाढ़ की तबाही के बाद का सन्नाटा जलस्तर घटने से टूट रहा है।
जलप्रलय की गवाह भगवान श्रीराम की तपोभूमि उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश की सीमा में बंटी होने से 84 कोस क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक, पौराणिक व ऐतिहासिक स्थलों में श्रद्धालुओं को समस्या होती है और इसका ही शिकार मंदाकिनी नदी की अविरलता भी है। कारण, पौराणिक नदी दो राज्यों के बीच फंस कराह रही है।
एकीकृत चित्रकूट बनाने से मंदाकिनी को नर्मदा नदी या मप्र की बाण सागर परियोजना से जोड़ा जा सकता है। मप्र के बांधों से वर्ष भर जल मिल सकता है। अब आवश्यकता है कि सीमांकन कर मंदाकिनी समेत सभी नदियों की असली जगह तय हो, अतिक्रमण की सफाई हो। विकास को नदी के अनुकूल बनाएं। आपदाओं पर पहले से चेतावनी व तैयारी का तंत्र विकसित हो। नदी तट के संवेदनशील इलाकों के लोगों को वहां से हटाकर स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था हो।
मंदाकिनी में बारिश में बाढ़ की आफत है तो गर्मी में आचमन योग्य जल नहीं मिलता। इसलिए चित्रकूट को एकीकृत कर केंद्र सरकार नेतृत्व करे, यही उचित विकल्प है। पावन चित्रकूट की अवधारणा इससे ही साकार होगी। यह कहना है दिगंबर अखाड़ा के महांत दिव्यजीवन दास व भागवत पीठ के आचार्य नवलेश दीक्षित का।
जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य भी इसके पक्षधर रहे हैं। पद्मश्री उमाशंकर पांडेय व प्रगतिशील किसान योगेश जैन कहते हैं कि एकीकृत चित्रकूट से श्रद्धालुओं को पर्यटन का रोमांच मिलेगा। 300 वर्ग किमी में 100 से अधिक विहंगम दृश्य आकर्षण बिखेरेंगे।
रजौला बाईपास से कर्वी पुल घाट तक अवैध कब्जे हटें, पयस्वनी व सरयू धाराएं मुक्त कराई जाएं, ताकि इनके किनारों पर विहंगम रिवर फ्रंट का दृश्य पर्यटकों को आकर्षित कर सकें। धारकुंडी आश्रम, शबरी जल प्रपात, बरदहा को संवारें।
उप्र में तीर्थ स्थलों को जोड़ने के लिए वर्ष 2019 में चित्रकूटधाम तीर्थ विकास परिषद का गठन किया गया था, ताकि अयोध्या व काशी की तर्ज पर धार्मिक पर्यटन विकसित किया जा सके। वर्ष 2022 में परिषद को 3.50 करोड़ रुपये का बजट भी मिला, लेकिन इससे मंदाकिनी के घाटों को पक्का करके जल स्रोत बंद करने का ही काम हुआ।
बुनियादी ढांचे का विकास अपेक्षित गति नहीं पकड़ सका। परिषद को ही 84 कोस क्षेत्र को सौंप दें तो बात बन सकती है। मंदाकिनी की अविरलता के प्रयासों संग पर्यटन, रोजगार, सड़क, सुरक्षा व धार्मिक सुविधाओं में भी बड़ा बदलाव संभव है।
उधर, मप्र सरकार सतना के चितौहरा व पिंडरा के बीच एक और बांध का निर्माण करा रही है। इसके बनने पर मंदाकिनी में वहां वर्षा के बाद पहाड़ों-जंगलों से आने वाला पानी नहीं आएगा, जिससे संकट बढ़ेगा।
अपर जिलाधिकारी अरुण यादव ने बताया कि आस्था की केंद्र मंदाकिनी को समन्वित प्रयास से संरक्षित करने को शासन से निर्देश पर कार्य होंगे। सतना जिले के कलेक्टर सतीश कुमार एस ने कहा कि अभी आपदा का समय है। इसके बाद कार्ययोजना बनेगी और मंदाकिनी ही नहीं पूरा चित्रकूट क्षेत्र नए कलेवर में दिखेगा, ऐसा प्रयास होगा।
इसकी भी आवश्यकता
- नदी तट की पौराणिकता बचाने को अधाधुंध निर्माण रोकें।
- चित्रकूट क्षेत्र में बांध बनाएं तो वर्ष भर जल मिलता रहेगा।
- जल स्रोत खोले जाएं, सीवरेज व्यवस्था सुदृढ हो, गंदगी न गिराएं।
- पुराने नक्शों, भू-सर्वेक्षण व आधुनिक तकनीक से गहन मैपिंग हो।
अब मंदाकिनी ही नहीं, अन्य नदियों के प्रवाह क्षेत्र तक में निर्माण हो गए हैं। इसलिए तबाही अधिक हो रही है। सरकारों को इसके लिए नीति बनानी चाहिए कि नदियों के आगे 50 से 100 साल तक के प्रवाह को ध्यान में रखते हुए उनका क्षेत्र छोड़ा जाना चाहिए, तभी ऐसी भीषण आपदाओं से बचा जा सकेगा।
-प्रो. विनोद तारे, पर्यावरण इंजीनियरिंग विशेषज्ञ आइआइटी एवं संस्थापक प्रमुख सी गंगा
चित्रकूट का समग्र विकास सरकार की प्राथमिकता में है। इसे दृष्टिगत रखते हुए हर क्षेत्र में काम चल रहे हैं। जिला खनिज निधि, नगरीय विकास सहित अन्य मदों से विकास परियोजनाएं संचालित हैं। अतिक्रमण हटाने से लेकर नदी संरक्षण की दिशा में काम किया जा रहा है।
-शीलेंद्र सिंह, आयुक्त रीवा संभाग
