AI मंथन: स्थानीय भाषाओं में वायस एप से मिलेगी मदद, बोलकर अपनी फसल का समाधान पा सकेंगे किसान
एआइ मंथन-2.0 में बताया गया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) जलवायु परिवर्तन और जल संकट के बीच किसानों को समय पर सटीक कृषि सलाह देने में सहायक होगी।

HighLights
एआइ जलवायु परिवर्तन और जल संकट में किसानों की मदद करेगी।
ड्रोन, सैटेलाइट से मिट्टी, फसल स्वास्थ्य का आकलन संभव होगा।
स्थानीय भाषा में वायस एप से किसान समाधान पा सकेंगे।
जागरण संवाददाता, कानपुर। जलवायु परिवर्तन, जल संकट और बदलते मौसम के बीच एआइ किसानों को समय पर सटीक सलाह देने में मददगार बनेगी।
एआइ मंथन-2.0 के दूसरे दिन ‘कृषि में कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ सत्र में श्रीराम हिमालय विश्वविद्यालय, देहरादून के प्रो. (डा.) नील मणि ने बताया कि एआइ, ड्रोन, सैटेलाइट, सेंसर और इंटरनेट ऑफ थिंग्स के माध्यम से मिट्टी, मौसम, फसल स्वास्थ्य, सिंचाई और कीट-रोग की स्थिति का आकलन किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि मोबाइल और इंटरनेट की उपलब्धता से तकनीक को गांवों तक पहुंचाना आसान होगा। स्थानीय भाषा में वायस आधारित एप के माध्यम से किसान बोलकर अपनी समस्या बता सकेंगे और उसी भाषा में समाधान पा सकेंगे।
मिट्टी, मौसम, सैटेलाइट और ड्रोन से मिले डाटा को जोड़कर कम लागत में बेहतर सलाह तैयार की जा सकती है। प्रो. नील मणि ने बताया कि ड्रोन और सैटेलाइट से फसल स्वास्थ्य, पौधों की ऊंचाई, सिंचाई और उर्वरक की जरूरत का पता लगाया जा सकता है।
मोबाइल कैमरे से गेहूं, आलू और टमाटर जैसी फसलों की स्थिति व गुणवत्ता का आकलन संभव है। एआइ से फसल उत्पादन का पूर्वानुमान लगाकर किसान बीमा और कृषि ऋण की बेहतर योजना बना सकेंगे।
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