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    कन्नौज के तालग्राम में बढ़ा आवारा कुत्तों का आतंक, 40 दिन में 230 पर किया हमला

    Updated: Wed, 01 Jul 2026 03:42 PM (IST)

    कन्नौज के तालग्राम में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ गया है, जहां 40 दिनों में 230 लोग कुत्ते के काटने का शिकार हुए और एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाने अस्पताल प ...और पढ़ें

    तालग्राम में बढ़ा आवारा कुत्तों का आतंक।

    तालग्राम में बढ़ा आवारा कुत्तों का आतंक।

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    जागरण संवाददाता, कन्नौज। नगर व ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। हालात यह हैं कि तालग्राम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रतिदिन 20 से 25 डाग बाइट के मरीज एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं।

    सीएचसी के आंकड़ों के अनुसार 21 मई से 30 जून तक 40 दिनों में 230 लोग कुत्तों के काटने का शिकार हुए और उपचार के लिए अस्पताल पहुंचे। बढ़ती घटनाओं से लोगों में भय और असुरक्षा का माहौल है।

    नगर के प्रमुख चौराहों, बाजारों, मुहल्लों और ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा कुत्तों के झुंड दिन-रात घूमते दिखाई देते हैं। राहगीरों, बच्चों, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों पर हमला कर देते हैं। शाम ढलने के बाद कई स्थानों पर कुत्तों के झुंड रास्ता रोक लेते हैं, जिससे लोगों का आवागमन भी प्रभावित हो रहा है।

    स्वास्थ्य कर्मियों के अनुसार डाग बाइट के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। 40 दिनों में 230 नए मरीजों को एंटी रेबीज वैक्सीन लगाई गई। चिकित्सकों का कहना है कि कुत्ते के काटने के बाद लापरवाही बरतना गंभीर खतरा पैदा कर सकती है, क्योंकि रेबीज एक जानलेवा बीमारी है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन उन्हें पकड़ने या नियंत्रित करने के लिए कोई प्रभावी अभियान नहीं चलाया जा रहा है। लोगों ने नगर पंचायत और प्रशासन से विशेष अभियान चलाकर आवारा कुत्तों को पकड़वाने तथा समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की है।

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    सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. कुमारिल मैत्रेय ने बताया कि कुत्ते के काटने पर घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके बाद बिना देरी किए अस्पताल पहुंचकर एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाना जरूरी है। समय पर उपचार से रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी से बचा जा सकता है।

    सुप्रीम कोर्ट का आदेश बेअसर

    मई में सुप्रीम कोर्ट ने देश में पहली बार रेबीज से पीड़ित, लाइलाज बीमार या स्पष्ट रूप से खतरनाक और पागल लावारिस कुत्तों को इच्छामृत्यु (मारने) की अनुमति दी थी। शीर्ष अदालत ने यह सख्त कदम मानव जीवन को होने वाले खतरों को कम करने के लिए उठाया। लेकिन जिले में जमीनी हकीकत इसके उलट है।

    यहां सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को लागू करना तो दूर, आवारा जानवरों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए जरूरी एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर्स की कमी है। जिला स्तर पर न तो पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर है, न आधुनिक सर्जिकल सुविधाएं और न ही जरूरी लाजिस्टिक्स। बिना एबीसी सेंटर्स के नसबंदी कार्यक्रम ठप पड़ा है, जिससे इन जानवरों की आबादी तेजी से बढ़ रही है।

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