हाथरस: तीन साल पुराने चर्चित हत्याकांड में पांच को उम्रकैद, जमीन के विवाद में दुकान में घुस मारी थी गोली
हाथरस में तीन साल पुराने एसी मैकेनिक संजय हत्याकांड में पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। जमीन विवाद के चलते दुकान में घुसकर गोली मारी गई थी ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
जागरण संवाददाता, हाथरस। तीन साल पुराने चर्चित एसी मैकेनिक संजय हत्याकांड में अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या-6 शैलेंद्र सिंह की अदालत ने पांच आरोपितों को हत्या का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने मोनिशकांत शर्मा, गौरव चौधरी, देवेंद्र ठाकुर, संतोष जाट और रामू उर्फ रामकुमार को धारा 147, 148 और 302/149 के तहत दोषी माना।
मोनिशकांत और गौरव को आर्म्स एक्ट के तहत भी अतिरिक्त सजा सुनाई गई। हालांकि सभी आरोपितों को हत्या के प्रयास की धारा में दोषमुक्त कर दिया गया। अभियोजन पक्ष से एडीजीसी गोविंद वशिष्ठ ने बताया कि मृतक संजय शहर के गणेश सिटी, गिजरौली का निवासी था। पांच जुलाई 2023 को दोपहर करीब 2:30 बजे एसी मैकेनिक संजय अपनी संजय गांधी नगर स्थित दुकान पर बैठे थे।
दुकान पर कुछ अन्य लोग भी मौजूद थे। इसी दौरान दो युवक बाइक से वहां पहुंचे। दोनों ने चेहरे ढक रखे थे और हाथों में तमंचे थे। संजय को निशाना बनाकर फायर किया गया। धक्का-मुक्की के दौरान गोली उनके पैर में लगी। गवाह अशोक कुमार ने अदालत में बताया कि वह दुकान के सामने एसी ठीक कर रहा था। गाली-गलौज की आवाज सुनकर वह मौके पर पहुंचा।
उसके अनुसार मोनिशकांत और गौरव ने संजय को धमकी दी और मोनिशकांत ने फायर किया। इसके बाद लोगों ने हमलावरों पर ईंट-पत्थर चलाए और दोनों बाइक छोड़कर भाग गए। गोली लगने के बाद संजय को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर उन्हें अलीगढ़ रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में उनकी मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने मुकदमे में हत्या की धारा बढ़ाई।
खबरें और भी
घटनास्थल से हमलावरों की बाइक, सादी मिट्टी और खून लगी मिट्टी बरामद की गई। मुकदमे में अभियोजन ने 11 गवाह पेश किए। वादी मनोज कुमार ने दो युवकों के बाइक से आने और संजय पर फायरिंग करने की बात कही। अनिल पलावत ने जमीन विवाद और घटना के समय दुकान पर मौजूद होने की गवाही दी।
संतोष शर्मा और गगन शर्मा ने भी घटना के समय दुकान पर मौजूद होने और गोली चलने की पुष्टि की। अशोक कुमार की गवाही में मोनिशकांत और गौरव के नाम सामने आए। मोनिशकांत, गौरव, देवेंद्र, संतोष और रामू को हत्या में उम्रकैद और 50-50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। मोनिशकांत और गौरव को आर्म्स एक्ट में अतिरिक्त सजा मिली।
अदालत ने सभी सजाएं साथ-साथ चलाने और जेल में बिताई अवधि को सजा में समायोजित करने का आदेश दिया। एडीजीसी गोविंद वशिष्ठ के अलावा वरिष्ठ अधिवक्ता राजपाल सिंह दिसावर और राजीव तिवारी ने भी मामले की पैरवी की थी।
तमंचे और कारतूस भी बरामद
विवेचना के दौरान पुलिस ने आरोपितों से 315 बोर के तमंचे और कारतूस बरामद किए। मोनिशकांत से तमंचा और चार कारतूस, देवेंद्र से तमंचा और तीन कारतूस, गौरव से तमंचा, खोखा और जिंदा कारतूस तथा संतोष से तमंचा और चार कारतूस बरामद होने की बात विवेचक ने अदालत में कही। बरामद हथियारों को विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया।