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    हापुड़: करोड़ों की साइबर ठगी का पैसा खाते में आया, खाताधारक के खिलाफ मुकदमा दर्ज

    Updated: Fri, 24 Jul 2026 06:22 PM (GMT+05:30)

    हापुड़ पुलिस ने साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले एक म्यूल खाते की जांच के बाद खाताधारक फुरकान के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इस खाते से 3.99 करोड़ रुपय ...और पढ़ें

    हापुड़ में ठगी का मामला सामने आया।

    हापुड़ में ठगी का मामला सामने आया।

    जागरण संवाददाता, हापुड़। मेरठ रेंज में चल रहे ऑपरेशन साइबर वज्र के तहत साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले म्यूल खातों की जांच के दौरान हापुड़ पुलिस ने एक खाताधारक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

    जांच में उसके बैंक खाते से 3.99 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी की रकम का लेनदेन मिलने और एनसीआरपी पोर्टल पर दो शिकायतें दर्ज होने का खुलासा हुआ है। पुलिस आरोपित की तलाश में जुट गई है।

    साइबर थाना में तैनात उपनिरीक्षक सुधीर कुमार की तहरीर के आधार पर दर्ज रिपोर्ट के अनुसार मेरठ रेंज के अधिकारियों और गृह मंत्रालय के निर्देश पर साइबर फ्राड में प्रयुक्त म्यूल खातों की जांच की जा रही है। इसी क्रम में नई बस्ती जामिया नगर, ओखला दिल्ली के रहने वाले फुरकान के स्टेट बैंक आफ इंडिया की हापुड़ शाखा के खाते की जांच की गई।

    जांच के दौरान एनसीआरपी पोर्टल पर इस खाते से संबंधित दो शिकायतें मिलीं। इसके साथ ही खाते में 3.99 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी की रकम का लेनदेन सामने आया। पुलिस के अनुसार आरोपित ने अपने बैंक खाते का इस्तेमाल जानबूझकर साइबर अपराधियों को आर्थिक लाभ पहुंचाने और स्वयं लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से किया।

    साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक मुनीष प्रताप सिंह ने बताया कि आरोपित फुरकान के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि अपर पुलिस महानिदेशक मेरठ जोन के निर्देश पर साइबर अपराधियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। कई अन्य संदिग्ध खातों की भी जांच जारी है और जांच में दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    यह होता है म्यूल खाता

    साइबर अपराधों में अपराधी अक्सर दूसरे लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम मंगाने और आगे ट्रांसफर करने के लिए करते हैं। ऐसे खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है। इन खातों के माध्यम से ठगी की रकम का स्रोत छिपाने का प्रयास किया जाता है। जिससे वास्तविक अपराधियों की पहचान छिपी रह जाती है।

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