हापुड़ में डॉक्टर ने चचेरी बहन से रचाई शादी तो भड़की बिरादरी, पंचायत का गांव छोड़ने का फरमान
हापुड़ में एक चिकित्सक ने अपनी चचेरी बहन से कोर्ट मैरिज की, जिसके बाद बिरादरी ने उनका विरोध किया। सामाजिक मर्यादाओं का हवाला देते हुए गांव वालों ने दं ...और पढ़ें

हापुड़ में रिश्ते शर्मसार: झोलाछाप डॉक्टर ने चचेरी बहन से कोर्ट मैरिज की।
HighLights
कोर्ट मैरिज के बाद गांव पहुंचे चचेरे भाई-बहन, बराबर-बराबर बने हैं दोनों के मकान
भयभीत दंपती ने शहर के मंडी क्षेत्र में ली शरण, जान का खतरा होने की जताई आशंका
ग्रामीणों का एलान, संस्कार बिगड़ने का हवाला देकर कहा, किसी हाल में गांव में नहीं मिलेगा आश्रय
रुस्तम सिंह, हापुड़। एक रिश्ते ने गांव की चौपाल में भूचाल ला दिया। चिकित्सक युवक ने अपनी ही चचेरी बहन से कोर्ट मैरिज कर ली। पांच अगस्त को शादी करने के बाद दोनों जब पति-पत्नी के रूप में गांव पहुंचे तो बिरादरी में हड़कंप मच गया। बराबर-बराबर बने मकानों के बावजूद दोनों को अपने ही गांव में रहने की जगह नहीं मिली।
पंचायत और बिरादरी के विरोध के बाद जान के खतरे की आशंका से भयभीत दंपती ने शहर के मंडी क्षेत्र में शरण ले ली है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे रिश्ते सामाजिक मर्यादा और बच्चों के संस्कारों पर असर डाल सकते हैं, इसलिए दोनों को किसी भी हाल में गांव में रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
मामला बाबूगढ़ थानाक्षेत्र के एक गांव का है। यहां एक अपंजीकृत चिकित्सक का अपनी चचेरी बहन से पिछले करीब दो वर्ष से प्रेम प्रसंग चल रहा था। कुछ समय पहले इसकी जानकारी दोनों के स्वजन को हुई तो उन्होंने रिश्ते का विरोध शुरू कर दिया।
स्वजन ने दोनों को सामाजिक और पारिवारिक मर्यादाओं का हवाला देते हुए संबंध खत्म करने के लिए समझाया। युवती पर भी लगातार दबाव बनाया गया। बताया गया कि विरोध और दबाव के चलते युवती ने पहले नशीला पदार्थ खाकर जान देने का प्रयास किया। इसके बाद उसने फंदे पर लटककर भी आत्महत्या का प्रयास किया।
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खबर फैलते ही बिरादरी में मची खलबली
घटना के बाद स्वजन उसकी किसी दूसरी जगह पर शादी की तैयारी में जुट गए। उसका मोबाइल भी छीनकर रख लिया गया और दोनों के मिलने-जुलने पर रोक लगा दी गई। इसके बावजूद दोनों अपने फैसले से पीछे नहीं हटे और पांच जुलाई को चुपचाप कोर्ट मैरिज कर ली। इसके साथ ही दोनों ने गांव में अपने विवाह की जानकारी सार्वजनिक कर दी।
इसकी खबर फैलते ही बिरादरी में खलबली मच गई। बुजुर्गों ने चौपाल पर बैठक कर दोनों को समझाने का निर्णय लिया। दोनों के स्वजन ने भी साथ मिलकर उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन दोनों अपने निर्णय पर अडिग रहे। इसके बाद अगले दिन दोबारा पंचायत बैठी। पंचायत में मौजूद लोगों ने दोनों के गांव में रहने का विरोध किया।
उनका तर्क था कि इस तरह के रिश्ते का असर गांव के युवाओं और आने वाली पीढ़ी पर पड़ सकता है। ग्रामीणों ने गांव की सामाजिक व्यवस्था, परंपरा और बच्चों के संस्कारों का हवाला देते हुए दोनों को गांव में नहीं रहने देने का निर्णय लिया। पंचों ने समझदारी दिखाते हुए उनकी जान लेने को उग्र हुए युवाओं को तो शांत किया ही, साथ ही दोनों को गांव छोड़कर चले जाने और कभी वापस नहीं आने का फरमान सुना दिया।
जान के खतरे की आशंका से शहर में शरण
पंचायत के फैसले के बाद दंपती गांव छोड़कर शहर के मंडी क्षेत्र में रहने लगा है। दोनों को आशंका है कि विरोध करने वाले लोग उनके साथ कोई अनहोनी कर सकते हैं। हालांकि, अभी तक उन्होंने पुलिस से संरक्षण की मांग नहीं की है। वह अपने रहने का स्थान भी गोपनीय रखे हुए हैं। चर्चा कि उनके दूर के रिश्तेदार ने संरक्षण दिया हुआ है।
हमको इस मामले की जानकारी नहीं है। न तो गांव में किसी के परिवार ने सूचना दी है और न ही प्रेमी युगल ने संरक्षण की मांग की है। हम इस मामले की जानकारी जुटा रहे हैं। किसी को भी कानून हाथ में लेने या पंचायत करके अपना आदेश थोपने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
- प्रवीण कुमार- एसएचओ - थाना बाबूगढ़
दोनों रिश्ते के भाई-बहन हैं। उन्होंने शादी कर ली है। इस शादी को गांव व उनकी बिरादरी ने मान्यता नहीं दी है। इनको गांव से नहीं निकाला गया है। उनकी बिरादरी ने ही गांव छोड़कर चले जाने का निर्णय दिया है। हमारी इसमें कोई भूमिका नहीं है। हम पंचायत में भी नहीं गए थे।
- ग्राम प्रधान पति