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बदनौली गोलीकांड: दलित युवक की मौत के बाद गांव में उबाल, हापुड़ में 2 घंटे जाम रहा हापुड़-मोदीनगर मार्ग

Published: Mon, 07 Sep 2026 06:28 PM (IST)

हापुड़ के बदनौली गोलीकांड में घायल दीपक की उपचार के दौरान मौत के बाद गांव में तनाव बढ़ गया और ...और पढ़ें

हापुड़ में 2 घंटे जाम रहा हापुड़-मोदीनगर मार्ग। जागरण

हापुड़ में 2 घंटे जाम रहा हापुड़-मोदीनगर मार्ग। जागरण

HighLights

  1. घायल दीपक की मौत के बाद बदनौली में तनाव।

  2. हापुड़-मोदीनगर मार्ग दो घंटे तक रहा जाम।

  3. दोषियों पर कार्रवाई और मुआवजे की मांग।

जागरण संवाददाता, हापुड़। हापुड़ में बदनौली गोलीकांड में घायल दीपक की रविवार को उपचार के दौरान मौत के बाद गांव में एक बार फिर तनाव बढ़ गया। मौत की सूचना मिलते ही स्वजन में कोहराम मच गया, जबकि दलित समाज के लोगों में जबदस्त आक्रोश फैल गया।

वहीं, हालात की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए गांव को छावनी में तब्दील कर दिया। मेरठ से पोस्टमार्टम के बाद सायं करीब चार बजे एंबुलेंस से दीपक का शव गांव पहुंचा तो बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने एंबुलेंस को सड़क पर ही रोक लिया और शव को बाहर नहीं निकालने दिया।

वहीं, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, मुआवजा और सुरक्षा समेत विभिन्न मांगों को लेकर जमकर नारेबाजी की गई। करीब दो घंटे तक चले हंगामे के कारण हापुड़-मोदीनगर मार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप रहा।

पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने का काफी प्रयास किया, लेकिन वह अपनी मांगों पर अड़े रहे। स्थिति को देखते हुए मेरठ, हापुड़ और बुलंदशहर जिले के कई थानों के प्रभारी भारी पुलिस बल और पीएसी के जवानों के साथ गांव में तैनात रहे।

एसपी यातायात मेरठ, एएसपी हापुड़ विनीत भटनागर, एडीजी के स्टाफ अफसर राजेश कुमार समेत कई अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। सुबह से ही चल रहे हंगामे की सूचना पर डीएम कविता मीना और एसपी कुंवर ज्ञानंजय सिंह मौके पर पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने मृतक के स्वजन से बातचीत कर उनकी मांगें सुनीं।

अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि स्वजन की सुरक्षा, आर्थिक सहायता, पारिवारिक लाभ योजना और शस्त्र लाइसेंस समेत अन्य मांगों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के आश्वासन के बाद ग्रामीण शांत हुए और शव को अंतिम संस्कार की तैयारियों के लिए घर ले गए।

शुक्रवार को हुआ था खूनी संघर्ष

शुक्रवार को बदनौली गांव में जाट और दलित समाज के लोगों के बीच विवाद के दौरान गोलीबारी और पथराव हुआ था। गोली लगने से तीन लोग घायल हुए थे, जबकि पथराव में चार लोगों को चोट आई थी। इनमें दीपक की हालत गंभीर थी और रविवार को उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। गोली से उसके गुर्दे अौररीढ़ की हड़्डी को नुकसान पहुंचा था।

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपित पूर्व प्रधान संदीप सिंह समेत पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया है। वहीं, दलित पक्ष की ओर से 33 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। फरार आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।

रीढ़ की हड्डी और गुर्दे का ऑपरेशन नहीं कियाजा सका। जिनमें संक्रमण के चलते दीपक की मौत हो गई। उसके बाद पुलिस-प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ ही फरार आरोपितों की गिरफ्तारी की चुनौती बढ़ गई है। गांव में निगरानी बढ़ा दी गई है।

अधिकारियों ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है। गांव के चारों ओर बेरियर लगाकर बाहरी और राजनीतिक लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई। करीब 200 युवक नारेबाजी करते हुए बाइक से गांव में पहुंच गए।

एएसपी विनीत भटनागर व पुलिस अधिकारियों ने उनको समझाकर व कड़ी मशक्कत के बाद वापस भेजा। उसके बाद युवकों ने हापुड़ में आंबेडकर तिराहे पर जाम लगा दिया। जहां से उनको बामुश्किल हटाया जा सका।

स्वजन का रो-रोकर बुरा हाल

दीपक परिवार में सबसे बड़ा था। उसके पिता बच्चू सिंह और मां बिमला देवी हैं। उसकी तीन बहनें बिंदू, खुशबू और दीपिका तथा भाई सरदार है। दीपक की मौत के बाद पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। हालांकि दीपक के खिलाफ भी गंभीर धाराओं में पहले से कई अभियोग पंजीकृत हैं।

ग्रामीण मृतक के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने, शस्त्र लाइसेंस बनाने, 50 लाख रुपये की आर्थिंक सहायता देने और आरोपितों के घरों पर बुलडोजर कार्रवाई की मांग कर रहे थे।

डीएम और एसपी ने कड़ी मशक्कत के बाद उनको समझाकर शांत किया। देर सायं कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच गांव में ही दीपक का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

हमने घायल दीपक का बेहतर उपचार कराया। उसको बचाने के लिए मेरठ के योग्य चिकित्सकों की टीम लगाई गईं, लेकिन दुर्भाग्य से उसको बचाया नहीं जा सका। आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। एक निजी अस्पताल में भर्ती घायल युवक को भी गिरफ्तार किया गया है। हम पीड़ित परिवार के साथ हैं। गांव में पूरी तरह से शांति है। - कुंवर ज्ञानंजय सिंह, पुलिस अधीक्षक

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