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    रेल कर्मचारियों को राहत, 'आरके शर्मा' बिना गजट हो सकेंगे 'राज कुमार शर्मा'

    Updated: Fri, 31 Jul 2026 12:22 PM (GMT+05:30)

    रेलवे बोर्ड ने लाखों रेल कर्मचारियों के लिए सेवा अभिलेख में नाम बदलने की प्रक्रिया को सरल किया है। अब वैध पहचान पत्र के आधार पर संक्षिप्त नाम को पूर्ण ...और पढ़ें

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    HighLights

    1. रेलवे सेवा अभिलेख में नाम बदलने के नियम सरल।

    2. राजपत्र अधिसूचना की अनिवार्यता अब पूरी तरह समाप्त।

    3. वैध पहचान पत्र से संक्षिप्त नाम को पूर्ण नाम में बदलें।

    प्रेम नारायण द्विवेदी, गोरखपुर। रेलवे के सेवा अभिलेख में दर्ज नाम अगर केवल प्रारंभिक अक्षरों (आर के शर्मा) तक सीमित है तो अब उसे पूरा (राज कुमार शर्मा) कराने के लिए रेलकर्मियों को राजपत्र अधिसूचना की लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। रेलवे बोर्ड के निदेशक राजेश कुमार ने आदेश जारी कर देशभर के लाखों रेलकर्मियों को प्रशासनिक राहत देते हुए नाम दर्ज कराने के नियम में बदलाव किया है।

    अब वैध पहचान प्रमाण के आधार पर संक्षिप्त नाम को पूर्ण स्वरूप में सेवा अभिलेख में दर्ज कराया जा सकेगा। इस बदलाव से सेवा अभिलेख में दर्ज नाम को आधार, पैन, बैंक खाते और अन्य सरकारी दस्तावेजों में दर्ज नाम के अनुरूप करने में सुविधा होगी। नाम की एकरूपता होने से पेंशन, पदोन्नति और अन्य सेवा लाभों से जुड़ी प्रक्रियाओं में दस्तावेजों के मिलान के दौरान होने वाली परेशानी कम होगी। साथ ही, कर्मचारियों को अनावश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया और राजपत्र अधिसूचना पर होने वाले समय व खर्च से भी राहत मिलेगी।

    23 जुलाई को जारी पत्र के माध्यम से रेलवे बोर्ड के निदेशक ने सभी जोनल महाप्रबंधकों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी का नाम सेवा रिकार्ड में 'आर के शर्मा' के रूप में दर्ज है, तो वह अब पहचान के वैध प्रमाण के आधार पर इसे ''राज कुमार शर्मा'' जैसे पूर्ण नाम में परिवर्तित करा सकेगा। इसके लिए पहले की तरह राजपत्र अधिसूचना प्रस्तुत करने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है।

    नए प्रावधान के तहत केवल निर्धारित पहचान प्रमाण प्रस्तुत करना पर्याप्त होगा। बोर्ड ने इसके लिए मान्य पहचान दस्तावेजों की सूची भी जारी कर दी है। आदेश सभी भारतीय रेलवे एवं उत्पादन इकाइयों पर लागू होगा, जो रेलवे बोर्ड के सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति प्राप्त है। यह महत्वपूर्ण निर्णय छह जनवरी 2025 को जारी पूर्व निर्देशों के स्थान पर लिया गया है।

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    दरअसल, अधिकतर रेलकर्मी सेवा पुस्तिकाओं में भी अपना संक्षिप्त नाम लिख देते हैं, जो आगे भी लिखते रहते हैं। लेकिन, पदोन्नति, पेंशन और अन्य सेवा लाभों से जुड़ी प्रक्रियाओं में दस्तावेजों में नाम मिलान को लेकर मुश्किलों का सामना करना पड़ जाता है। कर्मचारी संगठनों ने रेलवे बोर्ड के इस फैसले का स्वागत किया है।

    एनई रेलवे मजदूर यूनियन (नरमू) के महामंत्री बसंत चतुर्वेदी कहते हैं कि आल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन (एआइआरएफ) के जनरल सेक्रेटरी शिव गोपाल मिश्र ने रेलकर्मियों की इस समस्या को स्थायी वार्ता तंत्र (पीएनएम) की बैठक में प्रमुखता से उठाया था।