यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 10, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
गर्भावस्था जागरूकता सप्ताह : प्रसव पूर्व जांच से रोकी जा सकती हैं गर्भावस्था की जटिलताएं
जागरूकता सप्ताह की शुरुआत से पहले इसके फायदों पर चर्चा करते हुए सीएमओ ने बांसगांव के वार्ड नंबर छह निवासी रिंका का भी जिक्र किया जिसने प्रसव पूर्व जां ...और पढ़ें

गोरखपुर, जागरण संवाददाता। गर्भवती महिलाओं को जागरूक करने के उद्देश्य से 10 से 16 फरवरी तक गर्भावस्था जागरूकता सप्ताह मनाया जाएगा। प्रसव पूर्व जांच से गर्भावस्था की जटिलताएं रोकी जा सकती हैं। यह बातें सीएमओ डा.आशुतोष कुमार दूबे ने बताईं।
प्रसव पूर्व जांच से पता चल जाती है बीमारी
जागरूकता सप्ताह की शुरुआत से पहले इसके फायदों पर चर्चा करते हुए सीएमओ ने बांसगांव के वार्ड नंबर छह निवासी रिंका का भी जिक्र किया, जिसने प्रसव पूर्व जांच कराई तो न केवल उसकी बीमारी पकड़ में आ गई बल्कि प्रसव भी सकुशल हो गया। उन्होंने बताया कि रिंका का हीमोग्लोबिन सात ग्राम था, जांच में पता चलने पर आयरन सुक्रोज चढ़ाया गया। 20 दिन में हीमोग्लोबिन का स्तर 9.7 ग्राम हो गया। सभी गर्भवती महिलाओं को रिंका की तरह जागरूक होना चाहिए।
इन दिवसों पर होती है जांच
प्रसव पूर्व जांच की सुविधा सभी ग्राम स्वास्थ्य स्व'छता पोषण दिवस (वीएचएसएनडी), प्रत्येक माह की नौ तारीख को होने वाले प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान दिवस (पीएमएसएमए) और सभी सरकारी अस्पतालों के ओपीडी में निश्शुल्क उपलब्ध है।
प्रसव पूर्व जांच की संख्या बढ़ी
राष्ट्रीय पारिवारिक हेल्थ सर्वेक्षण (एनएचएफएस)-05, वर्ष 2019-21 के आंकड़ों के अनुसार जिले में 56.3 प्रतिशत महिलाओं ने प्रसव पूर्व जांच कराई। एनएचएफएस-04 (2015-16) के आंकड़ों के मुताबिक प्रसव पूर्व जांच कराने वाली महिलाओं की संख्या 35.2 प्रतिशत थी।
स्वास्थ्य केंद्र उसवा बाबू में शुरू हुआ ओपीडी
खजनी के उसवा बाबू में नवनिर्मित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बुधवार को शुरू हो गया। सीएमओ डा. आशुतोष कुमार दूबे ने पहुंचकर स्वयं रोगियों को देखा। पहले दिन 12 रोगी देखे गए। अब नियमित रूप से अस्पताल खुलेगा और रोगी देखे जाएंगे। दवाएं भेज दी गई हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिसंबर के पहले सप्ताह में स्वास्थ्य केंद्र का आनलाइन उद्घाटन कर दिया था। लेकिन आज तक वहां बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) शुरू नहीं हो पाया था। कारण जिन डाक्टरों की तैनाती की गई है, वे वहां जाकर ज्वाइन करने को तैयार नहीं थे।
स्वास्थ्य केंद्र पर लगा मिला था ताला
नवागत सीएमओ को यह बात पता नहीं थी। बुधवार को वह खजनी क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण करने निकले। खजनी व हरनही स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण करने के बाद सीधे उसवा बाबू पहुंच गए। वहां ताला बंद था। पूछने पर पता चला कि कोई डाक्टर यहां आना नहीं चाहता, इसलिए आज तक ओपीडी शुरू नहीं हो पाया है। उन्होंने ताला खोलवाया और गांव में संदेश भेजवा दिया कि अस्पताल खुल गया है। रोगी आने लगे। उन्होंने वहां तैनात डाक्टरों को फोन कर बुलाया और हिदायत दी कि आज से ओपीडी शुरू हो चुका है। यह नियमित चलना चाहिए। उनके साथ एसीएमओ डा. विनय कुमार पांडेय, सहायक शोध अधिकारी एसएन शुक्ला व प्रधान सहायक आइडी सिंह भी थे।