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    रेलवे कर्मचारियों में TTE, बुकिंग क्लर्क और सुपरवाइजर को भी देना होगा संपत्ति का ब्योरा

    Updated: Wed, 11 Mar 2026 01:13 PM (IST)

    भारतीय रेलवे में टीटीई, बुकिंग क्लर्क और सुपरवाइजर जैसे अराजपत्रित कर्मचारियों को अब अपनी और परिवार की अचल संपत्ति का ब्योरा देना होगा। यह निर्देश रेल ...और पढ़ें

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    HighLights

    1. टीटीई, बुकिंग क्लर्क, सुपरवाइजर को संपत्ति बतानी होगी।

    2. ग्रुप 'सी' कर्मचारियों के लिए अचल संपत्ति का ब्योरा अनिवार्य।

    3. पहली नियुक्ति पर, फिर हर साल जनवरी में जानकारी दें।

    जागरण संवाददाता, गोरखपुर। टिकट चेकिंग स्टाफ (टीटीई), बुकिंग क्लर्क और सुपरवाइजर जैसे अराजपत्रित कर्मचारियों (नान गजटेड) को भी अपनी संपत्ति का ब्योरा देना होगा। रेलवे में ग्रुप ‘सी’ के ऐसे पर्यवेक्षी कर्मचारी जिनका वेतनमान अधिकतम ग्रेड पे 4600 रुपये या उससे अधिक है, उन्हें भी अपनी अचल संपत्ति की वार्षिक जानकारी देनी होगी।

    इसमें वह संपत्ति भी शामिल होगी, जो उन्हें उत्तराधिकार में मिली हो, स्वयं अर्जित की हो, स्वामित्व में हो या लीज पर अपने या परिवार के किसी सदस्य के नाम पर हो।

    रेलवे बोर्ड की निदेशक (स्थापना) प्रिया गोपाल कृष्णन ने दो फरवरी 2026 को जारी पत्र में स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों को सिर्फ अपनी ही नहीं, बल्कि अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर खरीदी गई जमीन, मकान या फ्लैट की जानकारी भी देनी होगी। इसमें विरासत में मिली संपत्ति से लेकर लीज या बंधक व गिरवी पर ली गई प्रापर्टी तक का पूरा विवरण शामिल करना होगा।

    नई व्यवस्था के अनुसार कर्मचारियों को राजपत्रित अधिकारियों की तरह रेलवे सेवा में पहली नियुक्ति के तीन महीने के भीतर अपनी संपत्ति का विवरण देना होगा। इसके बाद हर वर्ष जनवरी माह में अचल संपत्ति की वार्षिक विवरणी जमा करनी होगी।

    रेलवे बोर्ड ने वाणिज्यिक विभाग की कुछ श्रेणियों जैसे आरक्षण लिपिक, पार्सल लिपिक, बुकिंग लिपिक, चल टिकट परीक्षक तथा टिकट कलेक्टर को विशेष रूप से निर्देशित किया है कि वे अपनी प्रारंभिक नियुक्ति के समय संपत्ति विवरणी प्रस्तुत करें। साथ ही प्रत्येक पदोन्नति के समय और सेवानिवृत्ति से लगभग दो वर्ष पहले पेंशन संबंधी दस्तावेजों के साथ भी संपत्ति की अद्यतन जानकारी देना अनिवार्य होगा।

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    दरअसल, रेलवे बोर्ड ने अधिकारियों की तरह रेल कर्मचारियों को भी चल- अचल संपत्ति का विवरण देने के लिए निर्देशित किया था, लेकिन न रेलवे प्रशासन बोर्ड के नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करा पा रहा था और न ही न कर्मचारी ध्यान दे रहे थे। जोनल स्तर पर इसको लेकर उदासीनता बनी रही है। इधर, जब इसकी शिकायत बढ़ी है तो रेलवे प्रशासन गंभीर हुआ है और पत्र लिखकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किया है।

    रेलवे बोर्ड ने कहा है कि भारतीय रेलवे स्तर पर कई जोन व उत्पादन इकाइयों में दिशा- निर्देशों का पूर्ण रूप से पालन नहीं किया जा रहा है। ऐसे में सभी रेलवे जोन, उत्पादन इकाइयों और अन्य संबंधित इकाइयां अपने अधीन कार्यरत कर्मचारियों से निर्धारित प्रारूप में अचल संपत्ति विवरणी निर्धारित समय से जमा कराना सुनिश्चित करें और नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराएं।