अजब सड़क की गजब कहानी! 27 करोड़ से बना दी ऐसी सड़क, जिसकी नहीं है कोई मंजिल
गोरखपुर में 27 करोड़ की लागत से बनी एकला बांध रिंग रोड सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण NH-27 से जुड़ नहीं पा रही है। ...और पढ़ें

लखनऊ-गोरखपुर-मुजफ्फरपुर फोरलेन पर क्रैश बैरियर बनाकर रोकी गई एकला बांध रिंग रोड की कनेक्टिविटी
HighLights
27 करोड़ की एकला बांध रिंग रोड NH-27 से नहीं जुड़ी।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण NHAI ने रास्ता बंद किया।
नगर निगम अब 12 करोड़ अतिरिक्त खर्च कर रहा है चौड़ीकरण पर।
अरुण चन्द, गोरखपुर। नियोजन और निगरानी में हुई एक छोटी-सी चूक किसी परियोजना की पूरी उपयोगिता पर भारी पड़ सकती है। नगर निगम द्वारा बनाई गई एकला बांध रिंग रोड इसका बड़ा उदाहरण है। करीब 27 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद यह सड़क फिलहाल उस हाईवे तक नहीं पहुंचा पा रही, जहां से उसे शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर कनेक्टिविटी देनी थी।
फोरलेन एनएच-27 से जुड़ने वाले स्थान पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी के चलते एनएचएआई ने इस सड़क के लोकार्पण के करीब महीने भर बाद ही एक जून को क्रैश बैरियर बनाकर रास्ता बंद कर दिया। कनेक्टिविटी को प्राथमिकता देना छोड़ अब निगम प्रशासन इसी सड़क के उस हिस्से को चौड़ा कर फोरलेन बनाने में जुटा है, जो टू लेन रह गई है।
2.88 किलोमीटर लंबी इस सड़क के निर्माण पर 15 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। बाघागाड़ा के पास लखनऊ-गोरखपुर-मुजफ्फरपुर फोरलेन से जुड़ने वाली सड़क का करीब 1100 मीटर हिस्सा फोरलेन है, जबकि 1780 मीटर हिस्सा चार मीटर चौड़ा है। अब इस हिस्से को फोरलेन करने के लिए नगर निगम 12 करोड़ रुपये और खर्च कर रहा है।
एक जून को जंक्शन पर बना कट बंद कर दिया
मौके पर मिट्टी भराई का काम शुरू हो गया है। चौड़ीकरण के साथ यहां पाथवे, साइकिल ट्रैक, डिवाइडर और अर्नामेंटल स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएंगी।
23 अप्रैल को एक भव्य समारोह के बीच सड़क का लोकार्पण हुआ। लेकिन एनएच-27 पर जहां यह सड़क कनेक्ट की गई थी वहां बढ़ती दुर्घटनाओं के बाद एनएचएआई ने एक जून को जंक्शन पर बना कट बंद कर दिया। रास्ता खोलने के लिए एनएचएआई ने 300-300 मीटर लंबी एक्सेलेरेशन और डी-एक्सेलेरेशन लेन बनाने की डिजाइन सुझाई।
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साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक्सेस प्वाइंट विकसित करने के लिए नगर निगम, एनएचएआई और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की स्वीकृति को जरूरी बताया और स्पष्ट किया कि जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, रास्ता बंद रहेगा।
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हाईवे पर चढ़ने वाले वाहनों की गति बढ़ाने के लिए एक्सेलेरेशन लेन और उतरने वाले वाहनों की गति नियंत्रित करने के लिए डी-एक्सेलेरेशन लेन जरूरी होती है। इन सुरक्षा व्यवस्थाओं को परियोजना के डीपीआर में दर्ज नहीं किए जाने से तैयार सड़क का कनेक्शन ही बंद हो गया।
अब उसी कनेक्टिविटी को सुरक्षित बनाने के लिए अतिरिक्त निर्माण और स्वीकृतियों की जरूरत पड़ रही है। यानी जिस सड़क को पहले ही पूरी योजना के साथ उपयोगी बनाया जाना चाहिए था, उसे अब चरणबद्ध तरीके से पूरा करने की कवायद हो रही है।
एनएचएआई से स्वीकृति के लिए आवेदन कर दिया गया है। टेंडर भी फाइनल है। सड़क चौड़ीकरण के लिए जो 12 करोड़ रुपये मिले हैं, उसी से मानकाें के अनुरूप सर्विस लेन का भी निर्माण कराया जाएगा। एनएचएआइ से स्वीकृति मिलते ही काम शुरू हो जाएगा।
अजय जैन, नगर आयुक्त, गोरखपुर