गोरखपुर में कागज की कश्ती में सुरक्षित जिंदगानी, जान ले रहा दरिया का पानी
गोरखपुर में गर्मी से राहत पाने के लिए नदियों में नहाने गए बच्चों की डूबने से मौतें बढ़ रही हैं। सुरक्षा उपायों की कमी और खतरनाक घाटों पर चेतावनी बोर्ड ...और पढ़ें

राप्ती नदी में डुबने से तीन बच्चों की मौत, राजघाट पर लगी भीड़ व रोते बिलखते परिजन। जागरण
HighLights
गोरखपुर में नदियों में डूबने से आठ लोगों की मौत।
मृतकों में छह स्कूली बच्चे, सुरक्षा उपायों की कमी।
खतरनाक घाटों पर बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड नहीं।
आशुतोष मिश्र, गोरखपुर। गर्मी से राहत पाने के लिए ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों के बच्चे स्कूल की छुट्टियों में नदियों का रुख कर रहे हैं। बिना किसी सुरक्षा उपाय या प्रशिक्षक के दरिया के पानी में उतरना, इनके लिए जानलेवा बन जा रहा है। 21 से 26 मई के बीच आठ जानें जा चुकी हैं, जिनमें छह तो स्कूली बच्चे थे।
ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए शासन की ओर से सुरक्षा प्रबंधों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश व कानूनी प्रविधान तय हैं। नदी घाटों पर ये इंतजाम कागजों तक सिमटे दिखते हैं। कागज की कश्ती में सुरक्षित जिंदगानी के सामने लगातार जान ले रहा दरिया का पानी कई सवाल खड़े कर रहा है।
मंगलवार को गर्मी से राहत पाने के लिए राजघाट पहुंचे तीन स्कूली बच्चे राप्ती नदी में उतरे और काल के गाल में समा गए। इनके परिवारीजन के चीत्कारों के बीच एक बार फिर सुरक्षा प्रबंधों को लेकर सवाल खड़ा हो गया। समग्रता में नजर डालें तो अधिकांश घटनाएं दोपहर 12 बजे से चार बजे के बीच की हैं। इस दौरान गर्मी अधिक होती है, जिससे लोग नहाने के लिए नदी का रुख करते हैं।
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राजघाट, गोला, झंगहा और सहजनवा में जहां हादसे हुए, नदी का वह क्षेत्र निर्माण के कचरे या कटान के कारण डेंजर जोन हो गया है। लेकिन, कहीं भी न तो कोई बैरिकेडिंग है और न ही चेतावनी बोर्ड लगा है। ऐसे घाटों पर सुरक्षा तंत्र व पेट्रोलिंग की कोई व्यवस्था नजर नहीं आती। जल पुलिस तो दूर स्थानीय गोताखोरों की तैनाती भी नहीं है। राजघाट जैसे व्यस्त घाट पर कोई वाच टावर या पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम नहीं है। हादसे के बाद लोग यहां पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाने एवं सुरक्षा तंत्र तैयार करने की मांग करते नजर आए।

