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    गोरखपुर में नए कनेक्शन पर रोक, कालाबाजारी रोकने का मास्टरस्ट्रोक

    Updated: Mon, 30 Mar 2026 12:33 PM (IST)

    गोरखपुर में रसोई गैस कंपनियों ने नए कनेक्शन जारी करने पर रोक लगा दी है। यह कदम घरेलू सिलेंडरों की कालाबाजारी रोकने के लिए उठाया गया है, जिसका उपयोग हो ...और पढ़ें

    रसोई गैस संकट। जागरण

    रसोई गैस संकट। जागरण

    HighLights

    1. नए रसोई गैस कनेक्शन पर गोरखपुर में रोक लगी।

    2. घरेलू सिलेंडरों की कालाबाजारी रोकने को उठाया कदम।

    3. होटलों, ढाबों को अब वाणिज्यिक गैस लेनी होगी।

    दुर्गेश त्रिपाठी, गोरखपुर। रसोई गैस संकट, केवाइसी के लिए लगी लाइन के बीच कंपनियों ने नए कनेक्शन पर रोक लगा दी है। इसे कंपनी के अधिकारी कालाबाजारी रोकने का मास्टरस्ट्रोक बता रहे हैं। इसके चलते उन होटल, ढाबा और स्ट्रीट वेंडरों की परेशानी बढ़ गई है जो अब तक हाकरों से सेटिंग कर ब्लैक में घरेलू गैस सिलिंडर लेकर व्यावसायिक उपयोग कर रहे थे।

    घरेलू कनेक्शन का जुगाड़ न होने से अब ऐसे लोगों को कर्मशियल सिलिंडर लेना ही होगा। बिना डिजिटल अथेंटिकेशन कोड (डीएसी) के सिलिंडर देने पर रोक लगने के कालाबाजारी करने वाले हाकरों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। मजबूरी में जब ये लोग कनेक्शन लेने के लिए एजेंसियों पर पहुंच रहे हैं तो बताया जा रहा है कि नया कनेक्शन नहीं मिल सकता, क्योंकि पेट्रोलियम कंपनियों ने इस पर लाक लगा दिया है।

    मास्टरस्ट्रोक के बारे में पूछने पर कंपनी अधिकारी समझाते हैं कि एक ठीक-ठाक रेस्टोरेंट में औसतन दो सिलिंडर की रोजाना खपत होती है। महीने में उसे 60 सिलिंडर की जरूरत होती है। इसके लिए कम से कम 45 कनेक्शन चाहिए जो कि एक व्यक्ति के पास संभव नहीं है।

    ऐसे में उन्हें कमर्शियल कनेक्शन लेना ही होगा। घरेलू गैस लगभग 65 रुपये किलो है जबकि व्यावसायिक गैस 100 रुपये किलो पड़ती है। इसीलिए होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट में ज्यादातर घरेलू गैस सिलिंडर का प्रयोग हो रहा था, जो अब बंद हो जाएगा।

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    पेट्रोलियम कंपनियों ने नए कनेक्शन के आप्शन पर फिलहाल लाक लगा दिया है। ऐसे में नए कनेक्शन के लिए आवेदन नहीं हो पा रहे हैं। उधर, बिना डीएसी के घरेलू सिलिंडर नहीं दिए जा रहे हैं। ऐसे में घरेलू कनेक्शन का कर्मशियल उपयोग करने वालों पर अंकुश लगेगा। रेस्टोरेंट जैसे प्रतिष्ठान जिन्हें प्रति माह कई सिलिंडर की जरूरत होती है, अब उन्हें कर्मशियल सिलिंडर खरीदने ही पड़ेंगे।

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    - रामेंद्र प्रताप सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी