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    6 साल में जासूसी और टेरर फंडिंग से जुड़े कई माड्यूल पकड़े गए, गोरखपुर को ट्रांजिट हब की तरह इस्तेमाल कर रही ISI

    Updated: Thu, 07 May 2026 09:18 PM (IST)

    गोरखपुर नेपाल सीमा और बिहार से जुड़ाव के कारण देश विरोधी गतिविधियों का केंद्र बन गया है, जहां पिछले छह वर्षों में जासूसी, टेरर फंडिंग और फर्जी दस्तावे ...और पढ़ें

    इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

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    जागरण संवाददाता, गोरखपुर। नेपाल सीमा से नजदीकी और बिहार से जुड़ा भौगोलिक रास्ता सुरक्षा एजेंसियों के लिए लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। यही वजह है कि पिछले छह वर्ष में गोरखपुर और आसपास के जिलों में देश विरोधी गतिविधियों, टेरर फंडिंग, जासूसी और फर्जी दस्तावेजों से जुड़े एक दर्जन से अधिक मामलों में कार्रवाई हो चुकी है।

    खुफिया एजेंसियों के अनुसार, गोरखपुर को कई बार ट्रांजिट प्वाइंट और नेटवर्किंग सेंटर की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश की गई। यहां किराये पर रहकर या फर्जी पहचान बनाकर संदिग्ध गतिविधियां संचालित करने के इनपुट समय-समय पर मिलते रहे हैं। वर्ष 2020 में एटीएस ने शहर में रहने वाले एक व्यक्ति को हिरासत में लिया था, जिसकी रिश्तेदारी पाकिस्तान में थी।

    जांच में सामने आया कि वर्ष 2014, 2016, 2017 और दिसंबर 2018 में वह कराची गया था। आखिरी यात्रा के दौरान आइएसआइ एजेंटों ने उसे अपने जाल में फंसाया और गोरखपुर के महत्वपूर्ण स्थानों की तस्वीरें वाट्सएप पर मंगवाईं। हालांकि युवक ने पकड़े जाने से पहले मोबाइल फोन फार्मेट कर दिया था, जिससे ठोस साक्ष्य नहीं मिल सके।

     एजेंसियां आज भी कर रहीं निगरानी

    पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया गया, लेकिन एजेंसियां आज भी उसकी निगरानी कर रही हैं। वर्ष 2021 में एटीएस ने गोला क्षेत्र से जुड़े एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था, जो तीन साल से फरार चल रहा था। उस पर हवाला के जरिए पाकिस्तानी हैंडलरों तक टेरर फंडिंग पहुंचाने का आरोप था। वहीं वर्ष 2023 में एनआइए ने गोरखपुर से आतंकी दीपक रंगा को गिरफ्तार किया था।

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    इसी वर्ष एटीएस ने आइएसकेपी से जुड़े तारिक अतहर और उसके साथी को पकड़ा था। गुजरात एटीएस ने भी गोरखपुर रेलवे स्टेशन से दो बांग्लादेशी आतंकियों को गिरफ्तार किया था। 19 मई 2024 को एटीएस ने पिपराइच क्षेत्र के रमवापुर निवासी राम सिंह को गिरफ्तार किया था। जांच में पता चला कि वह गोवा के शिपयार्ड नेवल बेस पर पार्ट टाइम वर्कर के रूप में काम करता था और आइएसआइ एजेंटों को भारतीय नौसेना से जुड़ी संवेदनशील सूचनाएं और युद्धक जहाजों की तस्वीरें भेज रहा था।

    संदिग्ध लेनदेन के भी साक्ष्य मिले

    एटीएस को जांच में बैंक खातों के जरिए संदिग्ध लेनदेन के भी साक्ष्य मिले थे। एजेंसियों के अनुसार, आइएसआइ एजेंट छद्म नामों से नौसेना कर्मचारियों और निजी वर्करों से संपर्क कर उन्हें लालच देकर गोपनीय सूचनाएं हासिल कर रहे थे।

    मई 2025 के अंत में एनआइए ने शहर के तारामंडल और राजघाट क्षेत्र में मनी लान्डिंग और संदिग्ध विदेशी लेनदेन के मामले में छापेमारी की थी। आरोप था कि बैंकाक से जुड़े संदिग्ध वित्तीय लेनदेन स्थानीय खातों के जरिए किए जा रहे थे। इसके अलावा अगस्त 2025 में चौरीचौरा क्षेत्र से एटीएस ने एक व्यक्ति को 25 फर्जी आधार कार्डों के साथ गिरफ्तार किया था।

    जांच एजेंसियों को आशंका थी कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल संदिग्ध नेटवर्क के लिए किया गया था। शाहपुर के कौवाबाग में किराए पर कमरा लेकर रहने वाले कुशीनगर जिले के कृष्णा मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद एजेंसियां फिर से गोरखपुर और आसपास के जिलों में सक्रिय संदिग्ध नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुट गई हैं।