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गोरखपुर में डॉग शेल्टर निर्माण को मिली हरी झंडी, आवारा कुत्तों से मिलेगी बड़ी राहत

Updated: Wed, 18 Feb 2026 11:30 AM (IST)

गोरखपुर में डॉग शेल्टर निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। विशेष सचिव नगर विकास ने उपलब्ध भूमि पर शेल्टर बनाने की अनुमति दी है, जिससे मानक भूमि की बाधा द ...और पढ़ें

नगर निगम को प्रस्ताव बनाकर भेजने के निर्देश। जागरण

नगर निगम को प्रस्ताव बनाकर भेजने के निर्देश। जागरण

HighLights

  1. गोरखपुर में डॉग शेल्टर निर्माण की बाधा हुई दूर।

  2. उपलब्ध भूमि पर शेल्टर बनाने की मिली विशेष अनुमति।

  3. आवारा कुत्तों की समस्या से मिलेगी शहरवासियों को राहत।

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। नगर निगम क्षेत्र में डॉग शेल्टर (डॉग सेंटर) निर्माण का रास्ता आखिरकार साफ हो गया है। अब तक निर्धारित मानकों के अनुरूप भूमि उपलब्ध न होने के कारण शेल्टर निर्माण की योजना अटकी हुई थी। शासन स्तर पर नगर विकास के विशेष सचिव उदयभान त्रिपाठी यह अनुमति दे दी गई है कि भूमि की उपलब्धता के आधार पर डाग शेल्टर का निर्माण किया जा सकेगा। साथ ही नगर निगम से इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

शासन के मानक और कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज (सीएंडडीएस) के माडल के अनुसार 1,000 कुत्तों की क्षमता वाले शेल्टर होम के लिए 15,464 वर्ग मीटर (लगभग चार एकड़) भूमि अनिवार्य मानी गई थी। इतने बड़े भूखंड की अनुपलब्धता के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही थी। नगर निगम की ओर से डाग शेल्टर के लिए शहर के दो स्थानों पर कुल 5200 वर्ग मीटर आकार का स्थान चिह्नित कर शासन को भेजा था, लेकिन मानक के अनुसार जगह कम होने की वजह से अड़चन आ रही थी।

अब विशेष सचिव के निर्देश के बाद यह बाधा दूर हो गई है और नगर निगम उपलब्ध जमीन के आधार पर डाग शेल्टर निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर सकेगा। डाग शेल्टर निर्माण को लेकर शहरवासियों में भी उम्मीद जगी है। यदि योजना समयबद्ध तरीके से पूरी होती है तो गोरखपुर में आवारा कुत्तों की समस्या से काफी हद तक निजात मिल सकती है।

नगर निगम पिछले कई महीनों से इस दिशा में प्रयासरत था। भूमि चयन, मानक निर्धारण और शासन से अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया में समय लग रहा था। अब शासन से स्पष्ट अनुमति मिलने के बाद अधिकारियों ने प्रस्ताव तैयार करने की कवायद तेज कर दी है। नगर निगम जल्द ही उपलब्ध भूमि का सर्वे कर अंतिम प्रस्ताव शासन को भेजेगा। इसके बाद निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।

हर रोज जिला अस्पाताल में आते हैं 300 से ज्यादा कुत्तों के काटने के मामले
शहर में पिछले कुछ वर्षों से आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अनुमानित आकड़ों के अनुसार शहर में आवारा कुत्तों की संख्या 65 हजार से भी ज्यादा है। हर गली-मोहल्लों में कुत्तों का जमावड़ा लगा रहता है। मोहल्लों, बाजारों, कालोनियों और मुख्य सड़कों पर झुंड में घूमते कुत्ते लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं।

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सुबह-शाम टहलने वाले नागरिकों, स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को खास दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई क्षेत्रों से कुत्तों के काटने की घटनाएं भी सामने आती रही हैं, जिससे लोगों में भय का माहौल बना रहता है। जिला अस्पताल से प्राप्त आकड़ों के अनुसार रोजाना 300 से ज्यादा लोग आवारा कुत्तों के शिकार हो रहे हैं।

इनको पकड़ने के लिए नगर निगम के पास लगातार शिकायतें पहुंचती रहती हैं। खासकर घनी आबादी वाले इलाकों में कुत्तों के झुंड के कारण राहगीरों को डर और असुविधा झेलनी पड़ती है। रात के समय सड़कों पर कुत्तों का आतंक और अधिक बढ़ जाता है। ऐसे में स्थायी समाधान की मांग लंबे समय से उठती रहती है।

अब तक वैक्सीनेशन और बधियाकरण तक सीमित कार्रवाई
अब तक नगर निगम की कार्रवाई मुख्य रूप से आवारा कुत्तों को पकड़कर उनका वैक्सीनेशन और बधियाकरण (स्टरलाइजेशन) कराने तक सीमित है। इसके बाद उन्हें उसी क्षेत्र में छोड़ दिया जाता था। यह प्रक्रिया पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) कार्यक्रम के तहत की जाती रही है। हालांकि यह व्यवस्था कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के उद्देश्य से की जाती है, लेकिन स्थायी आश्रय की व्यवस्था न होने के कारण समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाई।

नागरिकों का कहना था कि पकड़कर छोड़ देने से कुत्तों का जमावड़ा फिर उसी क्षेत्र में हो जाता है। डाग शेल्टर बनने के बाद पकड़े गए कुत्तों को सुरक्षित स्थान पर रखा जा सकेगा। यहां उनके लिए भोजन, चिकित्सा, टीकाकरण और देखभाल की समुचित व्यवस्था की जाएगी। बीमार, आक्रामक या घायल कुत्तों को अलग रखकर उपचार दिया जा सकेगा।

नगर निगम के मुख्य पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डा. रोबिन चंद्रा ने कहा कि इससे शहर की सड़कों पर कुत्तों की संख्या में कमी आएगी और आम नागरिकों को राहत मिलेगी। साथ ही पशु कल्याण के मानकों का भी पालन सुनिश्चित किया जा सकेगा। नगर निगम का मानना है कि शेल्टर निर्माण से कुत्तों के काटने की घटनाओं में कमी आएगी और शहर में सुरक्षित वातावरण बनेगा।


नगर विकास विभाग के विशेष सचिव ने जगह की उपलब्धता और अपनी सुविधा के अनुसार डाग शेल्टर का प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया है। एबीसी सेंटर के बगल स्थित भूमि के अलावा जंगल हकीम नंबर दो में भूमि चिह्नित है। जल्द ही प्रस्ताव शासन को भेज दिया जाएगा।

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-प्रमोद कुमार, अपर नगर आयुक्त