गोरखपुर के डॉ. परमात्मा खुदकुशी: वेतन से दोगुणा जमा कर रहे थे ब्याज, बैंकों के तकादा से चल रहे थे परेशान
डॉ. परमात्मा सिंह ने बैंकों के बढ़ते ब्याज और लगातार तकादे से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। उन्होंने 1.40 करोड़ रुपये का लोन लिया था, जिसका ब्याज उनकी ...और पढ़ें

पशु चिकित्सक परमात्मा सिंह के आत्महत्या किये जाने की सूचना मिलते ही घटनास्थल पर जांच करती फारेंसिक टीम। जागरण
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। खुदकुशी करने वाले डा. परमात्मा सिंह लोन के बढ़ते ब्याज और बैंकों के तकादे से परेशान थे। वह हर महीने अपनी वेतन राशि से करीब दोगुणा, पौने दो लाख रुपये ब्याज के रूप में जमा कर रहे थे। इससे वह आर्थिक दबाव में आ गए थे। उन्होंने पांच अगस्त को एम्स थाने में गरिमा सिंह के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया था। इधर, बैंक की तरफ से लगातार बकाया ब्याज को लेकर तकादा किया जा रहा था।
फरवरी 2026 में गरिमा के कहने पर उन्होंने छह बैंकों, एसबीआइ, एचडीएफसी, आइसीआइसीआइ, बंधन, चोला मंडलम और एफएनजी से 1.40 करोड़ रुपये का लोन लिया था। लोन दिलाते समय गरिमा ने ही ब्याज जमा करने की बात कही थी। पत्नी डा. सावित्र सिंह के अनुसार आरोपित ने शुरुआती दो महीने तक ब्याज जमा किया, लेकिन इसके बाद भुगतान बंद कर दिया।
बैंकों की ओर से तकादा शुरू होने पर उनके पति डा. परमात्मा सिंह अपने पास से ब्याज जमा करने लगे। वेतन से अधिक राशि ब्याज में जाने के कारण वह लगातार परेशान थे। पांच अगस्त को एम्स में मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने उन बैंक खातों को सीज कर दिया, जिनसे रुपये निकाले और जमा किए गए थे। इसके बाद बैंक की तरफ से ब्याज की वसूली करने वाले लोग उनके घर पहुंचने लगे।
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पत्नी सावित्री सिंह ने बताया कि बुधवार को वह और उनके पति महरजागंज ड्यूटी पर गए थे। इसी दौरान चोला मंडलम से ब्याज की रिकवरी करने वाले लोग घर पहुंचे। बाहर से पति का नाम लेते हुए आवाज लगाई, घर पर नहीं होने की जानकारी जब बेटे अरिहंत ने दी तो उन लोगों ने बेटे को बाहर बुलाया और एक कागज पर हस्ताक्षर कराया। घर पहुंचने जब बेटे के द्वारा इसकी जानकारी पति को मिली तो वह परेशान हो गए। कुछ देर बाद हालांकि, परिवार को अंदाजा नहीं था कि वह इतना बड़ा कदम उठा लेंगे।

