गोरखपुर में सीएम ग्रिड योजना से बदलेगी शहर की तस्वीर, छह नई सड़कों के लिए टेंडर जारी
गोरखपुर में सीएम ग्रिड योजना के तहत स्मार्ट सड़कों का निर्माण तेजी से जारी है। तीसरे और अनुपूरक चरण में छह सड़कों के लिए 242.22 करोड़ रुपये के टेंडर ज ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
HighLights
छह सड़कों के लिए 242.22 करोड़ रुपये स्वीकृत।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगी ये स्मार्ट सड़कें।
ट्रैफिक सुगम होगा, शहर का विकास तेज।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। स्मार्ट सिटी के विजन को जमीन पर उतारने के लिए नगर निगम की ओर से सीएम ग्रिड योजना शहर के तहत शहरी ढांचे को नई दिशा दे रहा है। पर्यावरण संरक्षण के साथ आधुनिक सुविधाओं से लैस स्मार्ट सड़कों का निर्माण तेजी से जारी है।
अब तक गोरखपुर के लिए करीब 340 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत हो चुकी है। वहीं, तीसरे और अनुपूरक चरण में कुल छह सड़कों के निर्माण के लिए 242.22 करोड़ रुपये की मंजूरी मिल चुकी है। नगर निगम की ओर से इनके निर्माण के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। इन सड़कों के निर्माण के लिए एक से डेढ़ साल की समय सीमा तय की गई है।
योजना के तहत पहले चरण में राप्तीनगर क्षेत्र की तीन सड़कों का निर्माण 44 करोड़ रुपये की लागत से लगभग पूरा हो चुका है। दूसरे चरण में गोलघर और आसपास की पांच प्रमुख सड़कों पर 53.68 करोड़ रुपये की लागत से काम तेजी से चल रहा है।
तीसरे चरण में भी परियोजनाओं को गति मिलने लगी है। स्पोर्ट्स कालेज रोड से जायसवाल मार्ट होते हुए पुलिया तक, गणेश चौराहा से डीएम आवास होते हुए हरिओमनगर तिराहे तक समेत कुल छह सड़कों के निर्माण का टेंडर जारी कर दिया गया है।
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नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने बताया कि तीसरे और अनुपूरक चरण में कुल छह सड़कों के निर्माण के लिए 242.22 करोड़ रुपये की मंजूरी मिल चुकी है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद गोरखपुर में ट्रैफिक व्यवस्था सुगम होगी और शहर का समग्र विकास तेज होगा। उन्होंने कहा कि सीएम ग्रिड के तहत बनने वाली सड़कों में स्टार्म वाटर मैनेजमेंट, यूटिलिटी डक्ट, फुटपाथ और आधुनिक स्ट्रीट लाइटिंग जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
खास बात यह है कि सड़कों के किनारे मौजूद पेड़ों को संरक्षित रखते हुए निर्माण किया जा रहा है, जिससे हरियाली पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यूटिलिटी डक्ट के निर्माण से भविष्य में बिजली, गैस या अन्य पाइपलाइन डालने के लिए सड़कों को बार-बार खोदने की जरूरत नहीं होगी। इससे न सिर्फ सड़कों की गुणवत्ता बनी रहेगी, बल्कि नगर निगम को डक्ट के उपयोग से आय भी प्राप्त होगी।