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    शताब्दी 'कल्याण' की: 1926 में जन्मी वो पत्रिका, जिसने करोड़ों दिलों में जगाया अध्यात्म

    Updated: Sun, 09 Aug 2026 08:32 AM (IST)

    गीताप्रेस से प्रकाशित मासिक पत्रिका 'कल्याण' ने अपने सौ वर्ष पूरे कर लिए हैं, जिसका पहला अंक विक्रम संवत 2083 में प्रकाशित हुआ था। यह पत्रिका अध्यात्म ...और पढ़ें

    कल्याण के आदि संपादक भाईजी हनुमान प्रसाद पोद्दार। जागरण आर्काइव

    कल्याण के आदि संपादक भाईजी हनुमान प्रसाद पोद्दार। जागरण आर्काइव

    HighLights

    1. 'कल्याण' पत्रिका ने पूरे किए सौ वर्ष।

    2. पहला अंक विक्रम संवत 2083 में प्रकाशित हुआ।

    3. भारत सहित कई देशों में पहुंच रही पत्रिका।

    जागरण संवाददाता, गोरखपुर। गीताप्रेस से प्रकाशित मासिक पत्रिका 'कल्याण' के सौ वर्ष रविवार को पूरे हो रहे हैं। विक्रम संवत 2083 यानी सन 1926 में श्रावण कृष्ण एकादशी के दिन ‘कल्याण’ का पहला अंक प्रकाशित हुआ था। इस वर्ष नौ अगस्त को उसी तिथि के साथ ‘कल्याण’ अपनी प्राकट्य शताब्दी पूरी कर रहा है। सौ वर्ष पहले कागज की सादगी, शब्दों की गहराई और उद्देश्य की पवित्रता लिए एक पत्रिका निकली ‘कल्याण’।

    तब शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यह छोटी-सी पत्रिका आने वाले सौ वर्षों तक करोड़ों लोगों के मन में अध्यात्म की लौ जलाती रहेगी। उस समय एक प्रति की कीमत मात्र छह आना थी। विदेश में रहने वाले पाठकों के लिए इसका मूल्य आठ आना था। वार्षिक सदस्यता देश में तीन तो विदेश में 4.50 रुपये थी।

    हनुमान प्रसाद पोद्दार स्मारक समिति के संयुक्त सचिव रसेंदु फोगला बताते हैं कि सौ वर्ष पहले इसके पहले अंक का मुद्रण मुंबई के वेंकटेश्वर प्रेस में हुआ था। दूसरे वर्ष से इसके सभी अंक गीताप्रेस से प्रकाशित होने लगे और यह यात्रा आज भी अनवरत जारी है।

    गीताप्रेस के प्रबंधक डा. लालमणि तिवारी ने बताया कि यह पत्रिका भारत के अलावा आस्ट्रेलिया, कनाडा, जर्मनी, मारिसस, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, यूके, यूएसए, जांबिया, युगांडा, यूएई, श्रीलंका, नार्वे, फिजी, नेपाल व चीन में भी पहुंचकर पाठकों का 'कल्याण' कर रही है। वर्तमान में 835 प्रतियां देश के बाहर भेजी जा रही हैं। इसमें 720 प्रतियां नेपाल के काठमांडू में जा रही हैं।

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    कल्याण के आदि संपादक भाईजी हनुमान प्रसाद पोद्दार। फाइल फोटो, सौ गीता वाटिका


     

    ‘कल्याण’ के आदि सम्पादक भाईजी हनुमानप्रसाद पोद्दार ने प्रथम अंक का सम्पादकीय निवेदन ‘कल्याण की आवश्यकता’ शीर्षक से किया है। भाईजी लिखते हैं- ‘कल्याण’ की आवश्यकता सबको है। जगत में कौन ऐसा मनुष्य है जो अपना कल्याण नहीं चाहता? इसी आवश्यकता का अनुभव कर आज यह ‘कल्याण’ भी प्रकट हो रहा है।

    अपनी- अपनी रुचि के अनुसार लोग कल्याण का भिन्न-भिन्न अर्थ किया करते हैं, वास्तविक कल्याण किस वस्तु में है इसका एक मत से निर्णय आजतक नहीं हो सका है। परंतु त्रिकालज्ञ ऋषि मुनियों ने, महात्माओं ने और जगत के बड़े- बड़े धीमान पुरुषों ने अपनी दिव्य दृष्टिसे परमात्माकी आज्ञानुसार शुभ कर्म करते हुए अंत में परमात्मा की प्राप्ति कर लेने को ही परम कल्याण माना है।

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    इसी बात का प्रचार करने के लिए, उसी कल्याण के स्वामी की पवित्र प्रेरणा से और कुछ कल्याणमय तथा कल्याणकामी महानुभावों की अनुमति से इस 'कल्याण' का जन्म हुआ है।

    कल्याण के प्रथमकांक से चयनित पदों का गायन आज
    नौ अगस्त को प्रातः सात बजे गीता वाटिका स्थित भाईजी के पावन कक्ष में ‘कल्याण’ के प्रथम अंक से चयनित पदों का गायन, भगवन्नाम संकीर्तन और भाईजी व ‘कल्याण’ ग्रंथ का पूजन-अर्चन होगा। यह जानकारी रसेंदु फोगला ने दी है।