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    बांसगांव विधायक का रिपोर्ट कार्ड: सड़क-पुल और अस्पताल का हुआ निर्माण, जाम और जलनिकासी बनी चुनौती

    Updated: Sat, 25 Jul 2026 10:15 PM (IST)

    बांसगांव विधायक डॉ. विमलेश पासवान के साढ़े चार साल के कार्यकाल में सड़क, पुल और अस्पताल जैसे विकास कार्य हुए हैं, लेकिन कौड़ीराम में जाम और जल निकासी ...और पढ़ें

    बांसगांव विधायक डॉ. विमलेश पासवान।

    बांसगांव विधायक डॉ. विमलेश पासवान।

    HighLights

    1. सड़क, पुल, शिक्षा और स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण कार्य हुए।

    2. कौड़ीराम में जाम और जल निकासी बड़ी समस्या।

    3. नगर पंचायत और रोजगार सृजन के वादे अधूरे।

    जागरण संवाददाता, गोरखपुर। बांसगांव विधानसभा क्षेत्र में भाजपा विधायक डॉ. विमलेश पासवान का साढ़े चार वर्षों का कार्यकाल जहां एक ओर उपलब्धियों भरा दिखाई देता है, वही कुछ अधूरे वादों की फेहरिस्त भी साफ नजर आती है।

    क्षेत्र में कुछ स्थानों पर बुनियादी समस्याएं भी बनी हुई हैं। कौड़ीराम से गोला, गजपुर, बांसगांव, खजनी और माल्हनपार तक अधिकांश प्रमुख मार्गों का चौड़ीकरण और टू-लेन निर्माण कराया गया। एनएच-29 से गांवों को जोड़ने में विधायक को सफलता मिली है।

    बेला बंधा, कुशवासी और चंदाघाट पुल के निर्माण से बाढ़ प्रभावित इलाके की कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार हुआ। भीटी रावत-कौड़ीराम-गोला और डिगवा-जगदीशपुर-लाहीडाढ़ी-धुरियापार जैसे मार्गों को औद्योगिक दृष्टि से विकसित करने की पहल भी महत्वपूर्ण मानी जा सकती है।

    शिक्षा के क्षेत्र में प्राथमिक विद्यालयों में बाउंड्रीवाल, स्मार्ट क्लास, अलग शौचालय और फर्नीचर उपलब्ध कराने का काम हुआ। बांसगांव में 50 बेड के चिकित्सालय और स्टेडियम का निर्माण भी विधायक अपनी बड़ी उपलब्धियों में गिनाते हैं।

    गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से छह करोड़ 20 लाख रुपये से अधिक की सहायता दिलाने और देवरार खुर्द में फायर स्टेशन बनवाने जैसे कार्य भी धरातल पर स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। महावीर छपरा को बांसगांव से सीधे जोड़ने वाली दो लेन की सड़क लोगोें केे लाभकारी साबित हो रही है।

    हालांकि इन उपलब्धियों के समानांतर कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर जनता अब भी जवाब चाहती है। कौड़ीराम कस्बे में वर्षों पुरानी जाम और जलनिकासी की समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है।

    नाला निर्माण न होने से व्यापारियों और स्थानीय लोगों को हर बरसात में परेशानी झेलनी पड़ती है। मलाव विद्युत उपकेंद्र, कौड़ीराम, गजपुर और हाटा को नगर पंचायत का दर्जा और जानीपुर को ब्लॉक बनाने जैसी घोषणाएं अभी तक धरातल पर नहीं उतर सकीं है।

    स्वास्थ्य सेवाओं में 50 बेड के महिला अस्पताल का निर्माण नहीं हो सका और कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जर्जर स्थिति में हैं। रकहट, कोठा और गरया कोल बंधों की मरम्मत और ग्रामीण सड़कों के पुनर्निर्माण की मांग भी अधूरी है। उद्योग स्थापित न होने से रोजगार के अवसर नहीं बढ़े और बड़ी संख्या में युवाओं का पलायन जारी है।

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    रेलवे परियोजना में किसानों को बाजार दर पर मुआवजा न मिलने की शिकायतें भी लगातार उठती रही हैं। कुल मिलाकर डॉ. विमलेश पासवान ने सड़क, पुल और बुनियादी ढांचे पर प्रभावी काम किया है, लेकिन नगर निकायों का गठन, रोजगार, सिंचाई, जलनिकासी और शहरी सुविधाओं जैसे मुद्दों पर अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सके।

    मेरे लिए राजनीति केवल चुनाव जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि क्षेत्र के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने का संकल्प है। पिछले साढ़े चार वर्षों में हमने बांसगांव विधानसभा क्षेत्र में सड़क, पुल, शिक्षा, स्वास्थ्य और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य किए हैं। बाढ़ प्रभावित गांवों को मुख्य मार्गों से जोड़ा, 50 बेड अस्पताल, स्टेडियम और फायर स्टेशन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराईं। साथ ही गंभीर मरीजों को करोड़ों रुपये की आर्थिक सहायता दिलाई। कुछ कार्य प्रक्रियाधीन हैं, जिनमें नगर पंचायतों का गठन, जानीपुर को ब्लाक का दर्जा, औद्योगिक विकास और ग्रेटर गीडा से क्षेत्र को जोड़ना प्रमुख है। मेरा लक्ष्य केवल निर्माण कार्य कराना नहीं, बल्कि बांसगांव को रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। आने वाले समय में अधूरे कार्यों को भी प्राथमिकता के साथ पूरा कराया जाएगा। -डॉ. विमलेश पासवान, विधायक, बांसगांव।


    विकास के जितने दावे किए जा रहे हैं, वह धरातल पर दिखाई नहीं देते। कौड़ीराम में जाम और जलनिकासी की समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है। मलांव विद्युत उपकेंद्र, बांसगांव में 50 बेड महिला अस्पताल, ग्रामीण सड़कों का पुनर्निर्माण और तटबंधों की मरम्मत जैसे वादे पूरे नहीं हुए। उद्योग नहीं लगने से युवाओं को रोजगार के लिए पलायन करना पड़ रहा है। रेलवे परियोजना में किसानों को बाजार दर के अनुसार मुआवजा नहीं मिला। कौड़ीराम, गजपुर, हाटा को नगर पंचायत तथा जानीपुर को ब्लाक का दर्जा देने के वादे भी अधूरे हैं। -डॉ. संजय कुमार, प्रमुख प्रतिद्वंद्वी।

     

    • कुल मतदाता : 320704
    • पुरुष मतदाता : 178006
    • महिला मतदाता : 142685

    चुनाव के समय नेता बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन जीतने के बाद लौटकर नहीं आते। गांव की नालियों से पानी की निकासी नहीं हो पाती, बिजली के तार और पोल जर्जर हैं। बरसात में जलभराव से लोग परेशान रहते हैं, लेकिन जनता की इन समस्याओं की सुनवाई नहीं होती। -अवधेश सिंह, बांसगांव।

     

    क्षेत्र में जितना विकास इस बार हुआ, पहले कभी नहीं हुआ। विधायक लगातार जनता के बीच रहते हैं। बांसगांव में 50 बेड अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर आक्सीजन प्लांट और मिनी स्टेडियम जैसी परियोजनाएं उनकी सक्रियता और विकास कार्यों की पहचान हैं। -यशवंत सिंह श्रीनेत, बांसगांव।

     

    कछार क्षेत्र आज भी उपेक्षा का शिकार है। सड़क, बिजली, खाद और बाढ़ की समस्या अब भी बनी हुई है। ग्रामीण क्षेत्र के सड़कों की हालत बेहद खराब है। कस्बों में जाम व जलजमाव की समस्या बरकरार है। कुल मिलाकर कछारवासियों की समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। -सबलू ओझा, असवनपार।

     

    सरकार की योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंच रहा है। विधायक की सक्रियता से पर्याप्त सड़कें बनीं हैं। बिजली व्यवस्था बेहतर हुई। आवास, शौचालय और राशन जैसी योजनाओं का लाभ लोगों को मिल रहा है। क्षेत्र में विकास कार्य निरंतर हो रहा है। विधायक इसे लेकर जागरूक रहते हैं। -अजय सिंह, बांसगांव।

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