47 साल पुराने मर्डर केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, दोषियों को 6 सप्ताह में सरेंडर करने का आदेश
गोंडा के महादेवा गांव में 47 साल पुराने हत्या के मामले में दोषी दो आरोपितों को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। ...और पढ़ें

47 साल पुराने मर्डर केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला।

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जागरण संवाददाता, गोंडा। कोतवाली देहात के ग्राम महादेवा गांव में 47 साल पूर्व हुई हत्या के मामले में दोषित दो आरोपितों को उच्चतम न्यायालय से करारा झटका लगा है।
आत्मसमर्पण से छूट की याचिका खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें छह सप्ताह के भीतर सीजेएम न्यायालय में आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, ग्राम महादेवा के वादी मुकदमा राजेंद्र प्रसाद ने आठ मार्च 1979 को कोतवाली देहात में एफआइआर दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि सम्मयदीन के पुत्र देवी प्रसाद ने दिसंबर 1978 में उनके और उनके चाचा रामशंकर के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया था।
इस मामले के कारण सम्मयदीन के पुत्र राम नरायन उनसे रंजिश रखते थे। आठ मार्च 1979 को राजेंद्र प्रसाद और राम शंकर खमरीहा गांव गए और दोपहर में महादेवा लौटते समय सालपुर गांव में गुरचरण कोरी से मिले।
उसी समय राम नरायन, ज्ञानेंद्री, रामफेर, नैयर और राम उग्गर ने उन्हें जान से मारने की मंशा से हमला किया। इस हमले में राम शंकर की मृत्यु हो गई। 18 जून 1982 को अपर सत्र न्यायाधीश ने राम नरायन, रामफेर, ज्ञानेंद्री और राम उग्गर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
फरवरी में हाई कोर्ट में हुई थी सुनवाई
अपील के दौरान ज्ञानेंद्री और रामफेर की मृत्यु हो गई। 13 फरवरी 2026 को हाई कोर्ट ने राम नरायन और राम उग्गर को आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी आत्मसमर्पण से छूट की याचिका खारिज कर दी और उन्हें संबंधित न्यायालय में आत्मसमर्पण करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है।