गोंडा में अब ओवरलोड का नहीं चलेगा बहाना, बिजली जाने पर होगी तकनीकी जांच
गोंडा में बिजली आपूर्ति की लापरवाही पर अब पर्दा डालना मुश्किल होगा। ट्रांसफार्मर फुंकने या तार टूटने पर अब विस्तृत तकनीकी जांच अनिवार्य कर दी गई है, ज ...और पढ़ें

अब बिजली जाने पर होगी जांच।
HighLights
बिजली आपूर्ति में लापरवाही पर अब सख्त कार्रवाई होगी।
ट्रांसफार्मर फुंकने या तार टूटने पर तकनीकी जांच अनिवार्य।
जांच में लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई।
संवाद सूत्र, गोंडा। जिले में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को लेकर अब लापरवाही पर पर्दा डालना आसान नहीं होगा। ट्रांसफार्मर फुंकने, तार टूटने और केबल दगने की घटनाओं को लेकर बिजली विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है।
अब तक जहां इन घटनाओं को सामान्य तकनीकी खराबी या ओवरलोड बताकर फाइल बंद कर दी जाती थी, वहीं नई व्यवस्था लागू होने के बाद हर मामले में विस्तृत तकनीकी जांच अनिवार्य कर दी गई है।
देवीपाटन मंडल के चारों जिलों में करीब 90 हजार ट्रांसफार्मरों के माध्यम से 14 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति की जा रही है। गर्मी के मौसम में बढ़ते लोड के बीच बार-बार सामने आ रही खराबियों ने विभाग को नई व्यवस्था लागू करने के लिए मजबूर किया है। अब हर घटना के पीछे के वास्तविक कारणों की पड़ताल की जाएगी।
नए निर्देशों के अनुसार बिजली कर्मियों को अपनी जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट रूप से बताना होगा कि संबंधित ट्रांसफार्मर की क्षमता कितनी थी और उस पर वास्तविक लोड कितना था।
साथ ही यह भी उल्लेख करना अनिवार्य होगा कि ओवरलोड की स्थिति किन कारणों से उत्पन्न हुई। इससे यह साफ हो सकेगा कि समस्या तकनीकी थी या कहीं न कहीं लापरवाही भी जिम्मेदार रही।
विभागीय स्तर पर यह भी तय किया गया है कि जांच केवल कागजी औपचारिकता तक सीमित न रहे। फील्ड पर जाकर यह परखा जाएगा कि कहीं अवैध कनेक्शन, अनियंत्रित लोड वृद्धि, जर्जर लाइन या समय पर मेंटेनेंस न होने से ट्रांसफार्मर पर दबाव तो नहीं बढ़ा। यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य अभियंता बिजली देवीपाटन मंडल यदुनाथ यथार्थ का कहना है कि ट्रांसफार्मर फुंकने सहित लाइनों में अन्य तकनीकी खामी आने पर पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। दोषी अभियंताओं और कर्मियों पर कार्रवाई की जाएगी।