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    गाजीपुर में स्कूल बस से उतरते ही मासूम आयुष को कार ने रौंदा, स्कूल प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 09:17 AM (IST)

    गाजीपुर में स्कूल बस से उतरकर सड़क पार कर रहे 7 वर्षीय आयुष चौहान को तेज रफ्तार हुंडई एक्सटर ने टक्कर मार दी, जिससे वाराणसी में इलाज के दौरान उसकी मौत ...और पढ़ें

    सांकेतिक तस्वीर।

    सांकेतिक तस्वीर।

    HighLights

    1. गाजीपुर में 7 वर्षीय आयुष की सड़क हादसे में मौत।

    2. स्कूल बस से उतरकर सड़क पार करते समय कार ने टक्कर मारी।

    3. स्कूल प्रशासन की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े हुए।

    जागरण संवाददाता, शादियाबाद (गाजीपुर)। स्थानीय कस्बे में शादियाबाद-जंगीपुर मुख्य मार्ग पर शनिवार को करीब तीन बजे स्कूल बस से उतरकर सड़क पार कर रहे सात वर्षीय आयुष चौहान को तेज रफ्तार हुंडई एक्सटर ने टक्कर मार दी। हादसे में गंभीर रूप से घायल आयुष ने ट्रामा सेंटर वाराणसी में इलाज के दौरान देर रात दम तोड़ दिया। घटना में स्कूल प्रशासन की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्कूल प्रबंधन के अनुसार बस में परिचारक मौजूद था, लेकिन अभिभावकों के नहीं पहुंचने पर भी मासूम बच्चों को सुरक्षित सड़क पार कराने की व्यवस्था नहीं की गई।

    स्कूल प्रशासन की लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल

    बहरियाबाद के नौरंगाबाद निवासी जितेंद्र चौहान का सात वर्षीय इकलौता पुत्र आयुष चौहान कस्बा कोईरी गांव में अपनी फुआ बिंदू चौहान पत्नी अमरजीत चौहान के यहां रहकर पढ़ाई करता था। करीब 15 दिन पहले ही आयुष पढ़ाई के लिए फुआ के घर आया था।

    फुआ और फूफा ने 25 जुलाई को उसका दाखिला गुरैनी स्थित एसएसएस पब्लिक स्कूल में एलकेजी में कराया था। आयुष रोज स्कूल बस से विद्यालय आता-जाता था। शनिवार को करीब तीन बजे स्कूल बस से उतरने के बाद आयुष शादियाबाद-जंगीपुर मुख्य मार्ग पार कर रहा था। इसी दौरान पीछे से आ रही तेज रफ्तार हुंडई एक्सटर ने उसे टक्कर मार दी। टक्कर लगते ही आयुष गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़ा और उसके सिर से खून बहने लगा। हादसे के बाद वाहन चालक गाड़ी छोड़कर फरार हो गया।

    पांच बच्चों को नहीं कराया गया सड़क पार

    सूचना मिलने पर वाहन स्वामी मौके पर पहुंचा और घायल आयुष को उसी वाहन से निजी चिकित्सक के पास ले गया। वहां चिकित्सक ने जवाब दे दिया तो उसे ट्रामा सेंटर वाराणसी ले जाया गया, जहां देर रात इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। थाना प्रभारी बागिश विक्रम सिंह ने बताया कि आयुष के पिता जितेंद्र चौहान की तहरीर पर अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। पुलिस हादसे के कारणों और वाहन चालक के संबंध में जांच कर रही है।

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    बस में परिचारक था, फिर अकेले क्यों सड़क पार कर रहा था आयुष?

    स्कूल प्रबंधक अर्जुन यादव के अनुसार बस में परिचारक अखिलेश प्रजापति मौजूद था। आयुष के साथ उसकी फुआ के पुत्र हरिओम, पुत्री परी तथा फुआ के देवर इंद्रजीत के पुत्र ओम और पुत्री ओरसिका भी रोज उसी स्थान पर बस से उतरते थे। सामान्य दिनों में इन बच्चों के स्वजन उन्हें लेने पहुंचते थे और सड़क पार कराकर अपने साथ ले जाते थे। शनिवार को कोई स्वजन बच्चों को लेने नहीं पहुंचा। इसके बावजूद बस में मौजूद परिचारक ने बच्चों को सड़क पार नहीं कराया।

    जिम्मेदारी किसकी है, उठ रहे ये सवाल

    यही सवाल अब पूरी घटना में सबसे अहम है कि जब सात साल का बच्चा व्यस्त मुख्य मार्ग के किनारे बस से उतरा तो उसकी सुरक्षित घर तक पहुंच सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी थी? यदि अभिभावक नहीं पहुंचे थे तो स्कूल बस के परिचारक को बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी क्यों नहीं सौंपी गई?स्कूल प्रबंधक अर्जुन यादव का कहना है कि चालक की सूचना मिलते ही वह तत्काल मौके पर पहुंचे और ट्रामा सेंटर वाराणसी भी गए।

    स्कूल प्रबंधक का कहना है कि पांच बच्चे रोज वहीं उतरते थे और उनके स्वजन उन्हें लेने पहुंचते थे। शनिवार को स्वजन नहीं आए थे। वह अपने परिचारक की गलती मानने को भी तैयार नहीं है।

    इकलौते बेटे की मौत से परिवार में कोहराम

    आयुष अपने माता-पिता जितेंद्र चौहान और मानसी का इकलौता पुत्र था। उसकी दो छोटी बहनें हैं। एक की उम्र महज छह माह और दूसरी करीब दो वर्ष है। भाई की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मां मानसी, पिता जितेंद्र, बहनें अंशिका और अरुशी तथा फुआ बिंदू चौहान का रो-रोकर बुरा हाल है। जिस आयुष को माता-पिता ने पढ़-लिखकर बड़ा करने का सपना देखा था, वह महज सात वर्ष की उम्र में उनसे हमेशा के लिए दूर हो गया। दो मासूम बहनों के लिए भी यह ऐसा दुख है, जिसकी भरपाई संभव नहीं। आने वाले रक्षाबंधन पर उनकी कलाई पर भाई की राखी नहीं बंधेगी।

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