गाजीपुर मेडिकल कॉलेज में MRI के लिए 300 वेटिंग, लोगों को महीनेभर बाद मिल रही तारीख
गाजीपुर मेडिकल कॉलेज के जिला अस्पताल में एमआरआई जांच के लिए 300 से अधिक मरीजों को एक महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है। बढ़ते दबाव के कारण मशीन क्षमता स ...और पढ़ें

MRI के लिए 300 वेटिंग।

समय कम है?
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जागरण संवाददाता, गाजीपुर। राजकीय मेडिकल कॉलेज के जिला अस्पताल में नित्य नई-नई सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है, लेकिन मरीजों के बढ़ते दबाव के कारण समस्याएं कम होने का नाम नहीं ले रही है। अस्पताल में स्थापित 1.5 टेस्ला एमआरआई मशीन पर जांच का बोझ इतना बढ़ गया है कि 300 से अधिक मरीजों की जांच अभी वेटिंग में है।
हालत यह है कि मरीजों को एक-एक महीने बाद की तारीख मिल रही है। जिससे मरीजों का समय पर उपचार प्रभावित होता है। हालांकि इमरजेंसी को प्राथमिकता दी जाती है।
अस्पताल में दूर-दराज से आने वाले मरीजों को तारीख मिलने के बाद भी पूरे दिन इंतजार करना पड़ रहा है। मुहम्मदाबाद से आई पूजा ने बताया कि उन्हें अप्रैल महीने की 13 तारीख को शुक्रवार का नंबर दिया गया था।
शुक्रवार की सुबह अस्पताल पहुंचने पर उन्हें टोकन नंबर पांच मिला, लेकिन दोपहर दो बजे तक भी उजांच नहीं हो सकी थी। उन्होंने कहा कि एक महीने इंतजार करने के बाद भी यहां आकर भूखे-प्यासे घंटों बैठना पड़ रहा है।
कॉलेज प्रशासन की ओर से प्रतिदिन केवल छह से सात मरीजों की एमआरआइ जांच करने का आदेश था, लेकिन बढ़ते दबाव को देखते हुए कर्मचारी अपनी क्षमता से अधिक 12 से 15 मरीजों की जांच कर रहे हैं। एक मरीज की जांच में करीब 40 मिनट का समय लगता है।
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जांच का आधिकारिक समय सुबह नौ बजे से दोपहर तीन बजे तक निर्धारित है, लेकिन मरीजों की भीड़ को देखते हुए मशीन देर शाम छह बजे तक संचालित की जा रही है। इसके बावजूद लंबित मामलों की संख्या कम नहीं हो रही है।
जिले का मुख्य सरकारी चिकित्सा केंद्र होने के कारण यहां मरीजों का भारी दबाव बना रहता है। लगातार संचालन के चलते 1.5 टेस्ला एमआरआई मशीन के रखरखाव की चुनौती भी बढ़ती जा रही है। हालांकि कालेज प्रशासन का दावा है कि रखरखाव का ध्यान रखा जाता है।
निजी सेंटरों की तुलना में काफी कम शुल्क
मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में एमआरआई जांच की दर निजी सेंटरों की तुलना में काफी कम है। यहां जांच का सामान्य शुल्क लगभग 3500 से 4500 रुपये के बीच निर्धारित है। यह मशीन पावर ग्रिड कार्पोरेशन ऑफ इंडिया के सीएसआर फंड के माध्यम से लगभग 12 करोड़ की लागत से स्थापित की गई है।